नवादा के नारदीगंज प्रखंड के मधुवन और मोतनाजे गांव में गंगाजल परियोजना के तहत जमीन लेने और किसानों की फसल बर्बाद करने के विरोध में गुरुवार को मधुवन खेल मैदान में किसान महापंचायत हुई। इस कार्यक्रम में राजद के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई किसान नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जलाशय बनाने के नाम पर आम लोगों के मकान और जमीन उजाड़ी जा रही है। ”जमीन पर काम कर रही सरकार और संबंधित कंपनी” उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को सही मुआवजा दिए बिना उनकी संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय नेता किसानों को राशन कार्ड बनाने के बहाने नवादा ले जाकर कागजात पर दस्तखत करा रहे हैं। इस तरह उनकी जमीन हड़पी जा रही है। किसान नेताओं ने बताया कि सरकार और संबंधित कंपनी किसानों की जमीन पर काम कर रही है, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास को लेकर स्थिति साफ नहीं है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बिहार-झारखंड प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले किसानों की समस्याएं सुनी थीं। विस्थापितों के पुनर्वास के लिए जगह भी तय नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि जेसीबी और पोकलेन मशीनों से तैयार धान की फसल को बर्बाद कर दिया गया। बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि खेती किसानों की संस्कृति और आजीविका है, इसे सिर्फ पैसे से नहीं देखा जा सकता। किसानों ने दावा किया कि मधुवन और मोतनाजे में करीब 968 एकड़ जमीन ली गई है। अभी तक मुआवजा तय नहीं हुआ है और विस्थापितों के पुनर्वास के लिए जगह भी तय नहीं की गई है। किसानों ने 2 सितंबर को ली गई जमीन पर खड़ी धान की फसल को मशीनों से नष्ट किए जाने का भी आरोप लगाया। इस मौके पर पूर्व विधायक कामरान और पूर्व मंत्री अखलाक अहमद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। नवादा के नारदीगंज प्रखंड के मधुवन और मोतनाजे गांव में गंगाजल परियोजना के तहत जमीन लेने और किसानों की फसल बर्बाद करने के विरोध में गुरुवार को मधुवन खेल मैदान में किसान महापंचायत हुई। इस कार्यक्रम में राजद के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई किसान नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जलाशय बनाने के नाम पर आम लोगों के मकान और जमीन उजाड़ी जा रही है। ”जमीन पर काम कर रही सरकार और संबंधित कंपनी” उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को सही मुआवजा दिए बिना उनकी संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय नेता किसानों को राशन कार्ड बनाने के बहाने नवादा ले जाकर कागजात पर दस्तखत करा रहे हैं। इस तरह उनकी जमीन हड़पी जा रही है। किसान नेताओं ने बताया कि सरकार और संबंधित कंपनी किसानों की जमीन पर काम कर रही है, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास को लेकर स्थिति साफ नहीं है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बिहार-झारखंड प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले किसानों की समस्याएं सुनी थीं। विस्थापितों के पुनर्वास के लिए जगह भी तय नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि जेसीबी और पोकलेन मशीनों से तैयार धान की फसल को बर्बाद कर दिया गया। बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कहा कि खेती किसानों की संस्कृति और आजीविका है, इसे सिर्फ पैसे से नहीं देखा जा सकता। किसानों ने दावा किया कि मधुवन और मोतनाजे में करीब 968 एकड़ जमीन ली गई है। अभी तक मुआवजा तय नहीं हुआ है और विस्थापितों के पुनर्वास के लिए जगह भी तय नहीं की गई है। किसानों ने 2 सितंबर को ली गई जमीन पर खड़ी धान की फसल को मशीनों से नष्ट किए जाने का भी आरोप लगाया। इस मौके पर पूर्व विधायक कामरान और पूर्व मंत्री अखलाक अहमद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

