दरभंगा में बेमौसम बारिश से फसलें खराब:खेतों में गिरी धान, रबी को भी नुकसान; किसान बोले- कर्ज लेकर खेती की थी, कोई सुनने वाला नहीं

दरभंगा में बेमौसम बारिश से फसलें खराब:खेतों में गिरी धान, रबी को भी नुकसान; किसान बोले- कर्ज लेकर खेती की थी, कोई सुनने वाला नहीं

दरभंगा जिले में चक्रवात तूफान ‘अर्नब’ के चलते हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 28, 29 और 30 अक्टूबर को लगातार रुक-रुककर हुई बारिश के बाद 31 अक्टूबर को भी हल्की बूंदाबांदी होती रही। पूरे दिन आसमान में काले बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली। बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में पककर तैयार धान की फसल गिर गई। इससे खरीफ फसलों की कटाई प्रभावित होने के साथ ही उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है। खेतों में नमी बढ़ने के कारण आगामी रबी फसलों की बुआई में भी देरी हो सकती है। जिला कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष खरीफ फसलों की बुआई के लिए जिले में कुल 1,07,124 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। करीब 1,03,000 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। शेष रकबे में मक्का, दलहन, तिलहन सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई की गई है। रबी फसलों को भी नुकसान जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि वर्तमान समय में बारिश होना खरीफ फसलों के अनुकूल नहीं है। इस समय कुछ फसलें कटाई की अवस्था में हैं, जबकि कुछ पककर तैयार हो रही है। ऐसे में अधिक बारिश होने पर फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। लगातार बारिश से रबी फसलों की बुआई भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल जिले में आंधी का कोई खास प्रभाव नहीं देखा गया है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद संभावित फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा। इसके बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। खेतों में गिरी फसल, कर्ज में डूबने की चिंता किसान गणेश चौबे ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी। अब चक्रवाती मौसम और बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। खेतों में लगी फसलें गिर गई हैं। कर्ज लेकर खेती करते हैं, फिर भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। किसानों को भारी नुकसान, सरकार से राहत की मांग सिंहवाड़ा क्षेत्र के किसान रामजीवन चौधरी ने सात कट्ठे में धान की खेती की थी, लेकिन बारिश के कारण पूरी फसल पानी में गिर गई। लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है, काफी परेशान हैं। सरकार की राहत की मांग की है। वहीं, सिंहवाड़ा मुखिया संघ के पूर्व अध्यक्ष अली अहमद तमन्ने ने कहा कि बेमौसम बारिश से किसानों को भारी क्षति हुई है। किसान काफी मेहनत और कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है। सरकार को नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए। बारिश और हवा से बढ़ी ठंड उत्तर बिहार में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में गिरावट आई है। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और बूंदाबांदी के कारण ठंड का अहसास बढ़ गया है। सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बन गई है। बाजारों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरीय वैज्ञानिक सह नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर बिहार के अधिकतर जिलों में 31 अक्टूबर तक हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मधुबनी और सीतामढ़ी में अच्छी बारिश का अनुमान है। इसके बाद मौसम साफ होने और शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। रबी की बुआई से पहले खेतों की नमी पर रखें नजर कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों की तैयारी में सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिक नमी के कारण रबी फसलों की बुआई जल्दबाजी में नहीं करने को कहा गया है। सब्जियों की खड़ी फसलों में समय पर निराई-गुड़ाई करने और कीटों के प्रकोप पर नजर रखने की सलाह दी गई है। चना की बुआई के लिए पूसा-256, जीवीजी-50, जैकब एन्जेलार-106, पंत जी-186 और पूसा-372 किस्मों की अनुशंसा की गई है। बुआई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करने के साथ राइजोबियम कल्चर से मिलाने की सलाह दी गई है। डीएमसीएच परिसर में जलजमाव, मरीजों की बढ़ी परेशानी लगातार बारिश का असर दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) परिसर में भी देखने को मिला। शनिवार को बारिश के बीच करीब 1200 मरीज इलाज कराने डीएमसीएच पहुंचे। परिसर में जलजमाव के कारण मरीजों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर मरीजों के परिजनों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। दरभंगा जिले में चक्रवात तूफान ‘अर्नब’ के चलते हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 28, 29 और 30 अक्टूबर को लगातार रुक-रुककर हुई बारिश के बाद 31 अक्टूबर को भी हल्की बूंदाबांदी होती रही। पूरे दिन आसमान में काले बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली। बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में पककर तैयार धान की फसल गिर गई। इससे खरीफ फसलों की कटाई प्रभावित होने के साथ ही उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है। खेतों में नमी बढ़ने के कारण आगामी रबी फसलों की बुआई में भी देरी हो सकती है। जिला कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष खरीफ फसलों की बुआई के लिए जिले में कुल 1,07,124 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। करीब 1,03,000 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। शेष रकबे में मक्का, दलहन, तिलहन सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई की गई है। रबी फसलों को भी नुकसान जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि वर्तमान समय में बारिश होना खरीफ फसलों के अनुकूल नहीं है। इस समय कुछ फसलें कटाई की अवस्था में हैं, जबकि कुछ पककर तैयार हो रही है। ऐसे में अधिक बारिश होने पर फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। लगातार बारिश से रबी फसलों की बुआई भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल जिले में आंधी का कोई खास प्रभाव नहीं देखा गया है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद संभावित फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा। इसके बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। खेतों में गिरी फसल, कर्ज में डूबने की चिंता किसान गणेश चौबे ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी। अब चक्रवाती मौसम और बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। खेतों में लगी फसलें गिर गई हैं। कर्ज लेकर खेती करते हैं, फिर भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। किसानों को भारी नुकसान, सरकार से राहत की मांग सिंहवाड़ा क्षेत्र के किसान रामजीवन चौधरी ने सात कट्ठे में धान की खेती की थी, लेकिन बारिश के कारण पूरी फसल पानी में गिर गई। लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है, काफी परेशान हैं। सरकार की राहत की मांग की है। वहीं, सिंहवाड़ा मुखिया संघ के पूर्व अध्यक्ष अली अहमद तमन्ने ने कहा कि बेमौसम बारिश से किसानों को भारी क्षति हुई है। किसान काफी मेहनत और कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदा उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है। सरकार को नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देना चाहिए। बारिश और हवा से बढ़ी ठंड उत्तर बिहार में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में गिरावट आई है। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और बूंदाबांदी के कारण ठंड का अहसास बढ़ गया है। सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बन गई है। बाजारों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरीय वैज्ञानिक सह नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर बिहार के अधिकतर जिलों में 31 अक्टूबर तक हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मधुबनी और सीतामढ़ी में अच्छी बारिश का अनुमान है। इसके बाद मौसम साफ होने और शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। रबी की बुआई से पहले खेतों की नमी पर रखें नजर कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों की तैयारी में सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिक नमी के कारण रबी फसलों की बुआई जल्दबाजी में नहीं करने को कहा गया है। सब्जियों की खड़ी फसलों में समय पर निराई-गुड़ाई करने और कीटों के प्रकोप पर नजर रखने की सलाह दी गई है। चना की बुआई के लिए पूसा-256, जीवीजी-50, जैकब एन्जेलार-106, पंत जी-186 और पूसा-372 किस्मों की अनुशंसा की गई है। बुआई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करने के साथ राइजोबियम कल्चर से मिलाने की सलाह दी गई है। डीएमसीएच परिसर में जलजमाव, मरीजों की बढ़ी परेशानी लगातार बारिश का असर दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) परिसर में भी देखने को मिला। शनिवार को बारिश के बीच करीब 1200 मरीज इलाज कराने डीएमसीएच पहुंचे। परिसर में जलजमाव के कारण मरीजों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर मरीजों के परिजनों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।  

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