ताइवान के समुद्र में चीन की नई चाल, जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर बढ़ा रहा दबाव

ताइवान के समुद्र में चीन की नई चाल, जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर बढ़ा रहा दबाव

चीन और ताइवान के बीच समुद्र में तनाव फिर बढ़ता जा रहा है। ताइवान का आरोप है कि चीन के कोस्ट गार्ड उसके पूर्वी तट के पास जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर परेशान कर रहे हैं और उनके समुद्र में अपना अधिकार जताने की कोशिश कर रहे हैं। ताइवान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

कोस्ट गार्ड ने क्या कहा?

ताइवान के कोस्ट गार्ड के मुताबिक, चीन की दो कोस्ट गार्ड नौकाएं शनिवार को उसके पूर्वी समुद्री इलाके में गश्त कर रही थीं। इसकी जानकारी मिलने के बाद ताइवान ने भी अपने जहाजों को निगरानी के लिए भेज दिया। ताइवान का कहना है कि चीन इस तरह की गतिविधियों के जरिए उस इलाके में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है, जहां उसका कोई अधिकार नहीं है।

समुद्र में जहाजों को रेडियो संदेश भेज रहा चीन

उधर, चीन के सरकारी मीडिया ने भी शनिवार को अपनी कोस्ट गार्ड की गश्त का एक वीडियो जारी किया था। इसमें चीन का एक जहाज रेडियो के जरिए संदेश प्रसारित करता दिखाई दे रहा था। संदेश में कहा गया कि जहाज कानून लागू करने की कार्रवाई कर रहा है और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए भी तैयार है।

हालांकि, चीन की ओर से यह साफ नहीं किया गया कि रेडियो संदेश किस जहाज को भेजा जा रहा था। सरकारी मीडिया के वीडियो में एक मछली पकड़ने वाला जहाज भी दिखाई दिया।

ताइवान ने जताई आपत्ति

ताइवान के कोस्ट गार्ड ने चीन की इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उसका कहना है कि रेडियो संदेशों के जरिए समुद्र में दूसरे जहाजों को परेशान करना चीन की ताकत दिखाने और अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश है। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता को नुकसान पहुंचता है।

जून से चीन ने बढ़ाई गश्त

बता दें कि चीन ने ताइवान के पूर्वी तट के पास जून से अपनी कोस्ट गार्ड की गश्त बढ़ा दी है। ताइवान के अधिकारियों को आशंका है कि चीन इन गतिविधियों के जरिए समुद्री नाकेबंदी की तैयारी कर रहा है। ऐसी स्थिति में चीन अपनी सेना, अर्धसैनिक बलों और आम नागरिकों से जुड़े जहाजों का एक साथ इस्तेमाल कर सकता है।

युद्ध की स्थिति में बेहद अहम है ताइवान का पूर्वी समुद्री रास्ता

ताइवान के लिए उसका पूर्वी समुद्री इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। अगर चीन की ओर से कभी समुद्री नाकेबंदी की जाती है या दोनों पक्षों के बीच संघर्ष शुरू होता है, तो इसी रास्ते से ताइवान को उसके सहयोगी देशों से जरूरी सामान और मदद मिल सकती है।

यही वजह है कि ताइवान चीन की हर समुद्री गतिविधि पर नजर रख रहा है। उसे डर है कि चीन लगातार गश्त के जरिए इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर भविष्य में समुद्री रास्तों पर नियंत्रण की कोशिश कर सकता है।

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