जमुई की बहनों को 500 राखियों का मिला ऑर्डर:सृष्टि-अंकिता ने आर्ट एंड क्राफ्ट से पूरे किए मां के सपने, फोटो वाली राखियों की डिमांड

जमुई की बहनों को 500 राखियों का मिला ऑर्डर:सृष्टि-अंकिता ने आर्ट एंड क्राफ्ट से पूरे किए मां के सपने, फोटो वाली राखियों की डिमांड

जमुई के झाझा की चचेरी बहनें सृष्टि और अंकिता रक्षाबंधन के लिए अनोखी राखियां बना रही हैं। उनकी हस्तनिर्मित राखियों की बाजार में काफी मांग है। ये बहनें कई वर्षों से आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ी हैं और विभिन्न अवसरों के लिए हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करती हैं। इस बार उन्होंने रक्षाबंधन के लिए कई प्रकार की राखियां बनाई हैं, जिनमें फोटो वाली राखियों की विशेष मांग है। सृष्टि बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही क्राफ्ट बनाने का शौक रहा है। स्कूल के दिनों से ही वे विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाती थीं। अपनी मां को कढ़ाई-बुनाई करते देखकर उनका रुझान इस कला की ओर बढ़ा। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया।अब वे हर त्योहार के लिए अलग-अलग सजावटी और उपयोगी वस्तुएं तैयार करती हैं। 500 राखियों के मिल चुके है ऑर्डर रक्षाबंधन के लिए दोनों बहनों ने लगभग 10 दिन पहले राखियां बनाना शुरू किया। सृष्टि के अनुसार,उन्हें अब तक 500 से अधिक राखियों के ऑर्डर मिल चुके हैं। ग्राहक व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के माध्यम से उनसे संपर्क कर राखियां मंगवा रहे हैं।फोटो वाली राखियों में लोग अपने भाई-बहन की तस्वीरें लगवाकर उन्हें व्यक्तिगत स्पर्श दे रहे हैं। अंकिता बताती हैं कि क्राफ्ट बनाना उनके लिए केवल एक काम नहीं, बल्कि एक सुकून भरा अनुभव है। दोनों बहनें साथ बैठकर क्राफ्ट तैयार करती हैं और इस दौरान आपस में बातचीत भी करती रहती हैं। वे पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस हुनर को भी आगे बढ़ा रही हैं। सृष्टि ग्रेजुएशन के चौथे सेमेस्टर में हैं, जबकि अंकिता दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। दोनों बहनों ने मिलकर एक इग्लू भी तैयार किया है, जो किसी पेशेवर प्रोजेक्ट से कम नहीं लगता। उनके माता-पिता भी इस काम में उनका पूरा सहयोग करते हैं। स्थानीय लोग भी उनकी कला की सराहना करते हैं। मां अपने हुमनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकी अंकिता कहती हैं कि उनकी कोशिश है कि यह कला कभी खत्म न हो और भविष्य में इसे बड़े स्तर तक ले जाया जाए। वहीं सृष्टि बताती हैं कि उनकी मां भी कभी इसी तरह का काम करती थीं, लेकिन अपने हुनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकीं। अब दोनों बहनें मां के उसी अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। अंकिता कहती हैं कि उनकी कोशिश है कि यह कला कभी खत्म न हो और भविष्य में इसे बड़े स्तर तक ले जाया जाए। वहीं सृष्टि बताती हैं कि उनकी मां भी कभी इसी तरह का काम करती थीं, लेकिन अपने हुनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकीं। अब दोनों बहनें मां के उसी अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। जमुई के झाझा की चचेरी बहनें सृष्टि और अंकिता रक्षाबंधन के लिए अनोखी राखियां बना रही हैं। उनकी हस्तनिर्मित राखियों की बाजार में काफी मांग है। ये बहनें कई वर्षों से आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ी हैं और विभिन्न अवसरों के लिए हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करती हैं। इस बार उन्होंने रक्षाबंधन के लिए कई प्रकार की राखियां बनाई हैं, जिनमें फोटो वाली राखियों की विशेष मांग है। सृष्टि बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही क्राफ्ट बनाने का शौक रहा है। स्कूल के दिनों से ही वे विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाती थीं। अपनी मां को कढ़ाई-बुनाई करते देखकर उनका रुझान इस कला की ओर बढ़ा। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदल गया।अब वे हर त्योहार के लिए अलग-अलग सजावटी और उपयोगी वस्तुएं तैयार करती हैं। 500 राखियों के मिल चुके है ऑर्डर रक्षाबंधन के लिए दोनों बहनों ने लगभग 10 दिन पहले राखियां बनाना शुरू किया। सृष्टि के अनुसार,उन्हें अब तक 500 से अधिक राखियों के ऑर्डर मिल चुके हैं। ग्राहक व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के माध्यम से उनसे संपर्क कर राखियां मंगवा रहे हैं।फोटो वाली राखियों में लोग अपने भाई-बहन की तस्वीरें लगवाकर उन्हें व्यक्तिगत स्पर्श दे रहे हैं। अंकिता बताती हैं कि क्राफ्ट बनाना उनके लिए केवल एक काम नहीं, बल्कि एक सुकून भरा अनुभव है। दोनों बहनें साथ बैठकर क्राफ्ट तैयार करती हैं और इस दौरान आपस में बातचीत भी करती रहती हैं। वे पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस हुनर को भी आगे बढ़ा रही हैं। सृष्टि ग्रेजुएशन के चौथे सेमेस्टर में हैं, जबकि अंकिता दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रही हैं। दोनों बहनों ने मिलकर एक इग्लू भी तैयार किया है, जो किसी पेशेवर प्रोजेक्ट से कम नहीं लगता। उनके माता-पिता भी इस काम में उनका पूरा सहयोग करते हैं। स्थानीय लोग भी उनकी कला की सराहना करते हैं। मां अपने हुमनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकी अंकिता कहती हैं कि उनकी कोशिश है कि यह कला कभी खत्म न हो और भविष्य में इसे बड़े स्तर तक ले जाया जाए। वहीं सृष्टि बताती हैं कि उनकी मां भी कभी इसी तरह का काम करती थीं, लेकिन अपने हुनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकीं। अब दोनों बहनें मां के उसी अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। अंकिता कहती हैं कि उनकी कोशिश है कि यह कला कभी खत्म न हो और भविष्य में इसे बड़े स्तर तक ले जाया जाए। वहीं सृष्टि बताती हैं कि उनकी मां भी कभी इसी तरह का काम करती थीं, लेकिन अपने हुनर को बड़े स्तर तक नहीं ले जा सकीं। अब दोनों बहनें मां के उसी अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *