बीएचयू परिसर में रहने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों के बीच पालतू जानवरों के रखरखाव को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब सख्ती शुरू कर दी है। परिसर में रहने वाले दो हजार से अधिक लोगों के बीच अब तक सिर्फ चार लोगों ने अपने घर में पालतू जानवर होने की जानकारी विश्वविद्यालय के एस्टेट विभाग को दी है। यह स्थिति सामने आने के बाद विभाग ने दोबारा पेट पॉलिसी लागू करने की कवायद शुरू की है। एस्टेट विभाग की ओर से मंगलवार को जारी सूचना में परिसर के सभी आवासीय लोगों को 19 सितंबर तक अपने पालतू पशुओं का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने और निर्धारित प्रारूप में उनकी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय सीमा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जांच कराई जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ नोटिस, जुर्माना और जरूरत पड़ने पर आवास आवंटन रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। जनवरी में ही जारी हुई थी पेट पॉलिसी बीएचयू प्रशासन की ओर से परिसर में रहने वाले लोगों के लिए 22 जनवरी को ही पेट पॉलिसी की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत आवासीय परिसरों में रहने वाले परिवारों को अपने घर में रखे गए पालतू जानवरों की जानकारी विश्वविद्यालय को उपलब्ध करानी थी। इसमें कुत्ते, बिल्ली, पक्षी और मछली समेत अन्य पालतू जानवर शामिल हैं। पॉलिसी के अनुसार पालतू जानवरों का स्मार्ट काशी ऐप अथवा ‘उपयोग’ पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराया जाना था। इसके साथ ही उनके वैक्सीनेशन, उम्र, ब्रीड समेत अन्य आवश्यक विवरण निर्धारित प्रारूप में एस्टेट विभाग को उपलब्ध कराने थे। हालांकि अधिसूचना जारी होने के बाद लंबे समय तक इस दिशा में न तो परिसर के रहवासियों ने गंभीरता दिखाई और न ही संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी निगरानी या कार्रवाई की गई। कुत्ते के हमले के बाद खुली व्यवस्था की पोल बीएचयू परिसर में 13 अगस्त को नर्सिंग स्टाफ प्रेमा राम के 11 वर्षीय बेटे अभिनव पर पालतू कुत्ते के हमले के बाद विश्वविद्यालय की पेट पॉलिसी और उसके अनुपालन का मुद्दा अचानक सामने आया। घटना के बाद जब परिसर में रखे जा रहे पालतू जानवरों की जानकारी जुटाने की बात उठी तो पता चला कि एस्टेट विभाग के पास परिसर के पालतू जानवरों का व्यवस्थित ब्योरा ही उपलब्ध नहीं था। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह सवाल भी उठे कि जब जनवरी में पेट पॉलिसी लागू की गई थी तो उसका पालन सुनिश्चित कराने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए। इसी के बाद एस्टेट विभाग ने अब दोबारा अधिसूचना जारी कर पंजीकरण और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी शुरू की है। 19 सितंबर के बाद होगी जांच नई सूचना के मुताबिक परिसर में रहने वाले सभी परिवारों को 19 सितंबर तक अपने पालतू जानवरों का पंजीकरण और वैक्सीनेशन कराने के साथ ही निर्धारित प्रारूप में उनका पूरा विवरण एस्टेट विभाग को देना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारियों की जांच कराई जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने या नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित आवासीयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें नोटिस और जुर्माने के अलावा आवास आवंटन निरस्त किए जाने तक का प्रावधान शामिल है। इससे परिसर में पालतू जानवर रखने वाले परिवारों के बीच नई अधिसूचना को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विभागाध्यक्ष के मामले की जांच पर भी सवाल इधर, 13 अगस्त को ट्रॉमा सेंटर के नर्सिंग स्टाफ प्रेमा राम के 11 वर्षीय पुत्र अभिनव पर हुए कुत्ते के हमले के मामले में विश्वविद्यालय स्तर पर शुरू की गई जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के दिन ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही थी। घटना के बाद दो दिनों तक मामले से इनकार किए जाने की चर्चा के बीच हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धा सिंह ने 16 अगस्त को ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायल बच्चे के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने घटना पर अफसोस जताया था। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले की विस्तृत जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। हालांकि घटना के करीब 12 दिन बीतने के बाद भी विश्वविद्यालय स्तर पर जांच की प्रगति या उसके निष्कर्ष को लेकर कोई स्पष्ट अद्यतन सूचना सामने नहीं आई है।

