‘मुंज्या’ की सफलता के बाद अभय वर्मा के लिए शोहरत के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। वह कहते हैं कि सफलता ने उनकी भूख कम नहीं की, बल्कि सपनों को और बड़ा कर दिया। शाहरुख खान के साथ ‘किंग’ में काम करना उनके लिए सपने के सच होने जैसा रहा। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अभय ने अपने करियर, ‘मुंज्या’ की सफलता, बड़े होते सपनों और शाहरुख खान से मिली सीख पर बात की। सवाल: ‘मुंज्या’ की सफलता के बाद क्या अब दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव नहीं कहूंगा, लेकिन जिम्मेदारी जरूर बढ़ गई है। सफलता के बाद उम्मीदें बढ़ जाती हैं और आपको अगली बार और मेहनत करनी पड़ती है। मुझे याद नहीं कि पिछली बार आठ घंटे कब सोया था। लेकिन मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते। मैंने एक खूबसूरत बात सुनी थी कि अगर आपको पता हो कि आप फेल नहीं होंगे तो आप कितना बड़ा सपना देखेंगे? इसलिए अब मैंने अपने सपनों की कोई लिमिट नहीं रखी है। आराम बाद में होता रहेगा। अभी मैं अपने दर्शकों का प्यार और बड़ा करना चाहता हूं। सवाल: आज की तारीख में आपको सबसे ज्यादा खुशी किस चीज से मिलती है? जवाब: लोगों का प्यार मेरी सबसे बड़ी खुशी है। मैं इसे एक अमानत मानता हूं। दर्शक जब चाहें यह अमानत दे सकते हैं और जब चाहें अपने खजाने से और प्यार दे सकते हैं। मेरा काम है कि मैं इतनी मेहनत करूं कि यह प्यार बार-बार मिलता रहे। अभी तक जितना प्यार मिला है, उसने मेरी भूख कम नहीं की, बल्कि और बढ़ा दी है। सवाल: शाहरुख खान के साथ ‘किंग’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने सपने देखना ही शाहरुख सर को देखकर शुरू किया है। लोग उन्हें अपना हीरो मानते हैं और उनके जैसा बनने का सपना देखते हैं। मेरे लिए तो वह उससे भी आगे हैं।मैंने उनसे पूछा कि शुरुआती दौर में फिल्में कैसे चुनते थे? उन्होंने कहा- ‘उन लोगों के साथ काम करो, जिनके साथ आपका मन लगे और जो आपको प्यार करते हों।’
उनके अंदर 35 साल के अनुभव के बाद भी सीखने और सिखाने की वही ऊर्जा है। वह सेट पर सैंडबैग उठाकर बताते हैं कि यह आपका मार्क है, ऐसे डायलॉग बोलकर देख सकते हो। जब वह शूट नहीं कर रहे होते तो एक कुर्सी लेकर बैठ जाते और देखते कि सिनेमा कैसे बन रहा है। उनके अंदर का पैशन और जज्बा देखकर मुझे समझ आया कि वह शाहरुख खान क्यों बने हैं। सवाल: पहली बार शाहरुख खान के साथ काम करने का फोन आया तो आपका रिएक्शन क्या था? जवाब: मेरे लिए दो राय की कोई बात नहीं थी। मैंने कहा कि मुझे दीवार पर मक्खी भी बना देंगे तो मैं मक्खी बन जाऊंगा, बस उनके साथ काम करने का मौका मिलना चाहिए। जिस दिन मेरा शूट नहीं होता था, तब भी मैं सेट पर पहुंच जाता था। अगर मेरा शूट जल्दी खत्म हो जाता और उनका शूट चल रहा होता तो मैं पूरा दिन सेट पर रहता। जब फोन आया तो पैसे की बात भी हुई। मैंने कहा कि मेरे लिए इससे ऊपर कोई बात नहीं है। आप प्रोफेशनल तौर पर जो ठीक समझें, करिए। मेरे लिए उनके साथ काम करना ही सबसे बड़ा मौका था। सवाल: शाहरुख खान से पहली मुलाकात कैसी रही? जवाब: पहली बार मैं पोलैंड में उनसे मिला। हम करीब तीन घंटे साथ बैठे। सुहाना खान भी थीं। बाद में साथ डिनर किया। उनसे मिलने के बाद होटल जाते हुए मुझे एहसास हुआ कि यह वही इंसान हैं, जिनको देखकर मैंने सपने देखना सीखा था। लेकिन उनके साथ रहते हुए वह बिल्कुल महसूस नहीं होने देते कि वह इतने बड़े स्टार हैं। यही उनकी लेजेंडरी बात है कि 35 साल बाद भी वह इतने सरल हैं और सिर्फ अपनी कला से जुड़े रहते हैं। सवाल: ‘किंग’ का मैसेज आपके लिए कितना खास था? जवाब: उस मैसेज का स्क्रीनशॉट मैंने संभालकर रखा है। कभी-कभी वह मेरा वॉलपेपर भी बन जाता है। ‘मुंज्या’ को रिलीज हुए दो साल हो गए थे और बीच में कई तरह के विचार आते थे कि आगे क्या होगा, फिल्म कब रिलीज होगी। मैं रिजल्ट से ज्यादा काम को लेकर उत्साहित रहता हूं। लेकिन सफलता के बाद एक खूबसूरत जिम्मेदारी महसूस होती है कि अगली बार और मेहनत करनी है। _____________________________ अभय वर्मा का यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. ‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता अभिनेता अभय वर्मा इन दिनों ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में भारतीय वायुसेना के अधिकारी आरएस धालीवाल का किरदार निभाकर चर्चा में हैं। इस भूमिका ने उन्हें अभिनेता के तौर पर चुनौती दी और देश के अनसंग हीरोज को करीब से समझने का मौका दिया।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
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