सुल्तानपुर में पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन, ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को शहर में जश्न का माहौल रहा। सुबह नमाज के बाद चौक स्थित जामा मस्जिद से एक नातिया जुलूस निकाला गया, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए खैराबाद स्थित जामे अरबिया मदरसे पर समाप्त हुआ। शाम को मगरिब की नमाज के बाद शहर भर में सजे विभिन्न स्टेज पर अंजुमने नात पढ़ी गईं। राहुल चौराहा, पलटन बाजार चौराहा, शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहा, बाधमंडी चौराहा, जमागेट, दरियापुर चौराहा, चौक घंटाघर और गभड़िया जैसे प्रमुख स्थानों पर भव्य लाइटिंग के साथ स्टेज सजाए गए थे। इन जगहों पर नात पाठ के साथ-साथ लंगर की व्यवस्था भी की गई थी। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से सभी चौराहो पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। नगर पालिका की ओर से सफाई व्यवस्था की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस अवसर पर धर्मगुरु मौलाना मोहम्मद अहमद वारसी ने ईद मिलादुन्नबी को सादगी और शांतिपूर्ण ढंग से मनाने का संदेश दिया। उन्होंने विशेष रूप से डीजे और अनावश्यक शोर-शराबे से बचने की अपील की। मौलाना वारसी ने कहा कि इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं और आदर्शों का पालन करना है।
मौलाना वारसी ने जोर देकर कहा कि इस पवित्र अवसर पर लोगों को झूठ बोलने, दूसरों की बुराई करने (गीबत), उनका हक छीनने या किसी पर अन्याय करने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि पैगंबर साहब जिन सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने आए थे, उनसे स्वयं को और अपनी आने वाली पीढ़ियों को दूर रखना ही सच्ची निष्ठा है। मौलाना ने त्योहार के नाम पर होने वाले हुड़दंग, डीजे के इस्तेमाल और अत्यधिक शोर-शराबे पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजे बजाना, शोर-शराबा करना, नारेबाजी या हंगामा करना पैगंबर मोहम्मद साहब और अल्लाह को पसंद नहीं है। उन्होंने यह भी नसीहत दी कि जुलूस जश्न के दौरान नमाज अदा करना नहीं भूलना चाहिए। मौलाना वारसी ने अंत में कहा कि यदि किसी के कार्य या शोर से पड़ोसी अथवा किसी भी व्यक्ति को परेशानी होती है, तो ऐसा कार्य इस्लाम के सिद्धांतों के विपरीत है।

