खिलचीपुर में पानी के नाम पर करोड़ों बह गए:घरों में सप्लाई नहीं, लोग रोज केन खरीद रहे; 5 साल बाद भी 12 वार्डों में पानी नहीं

खिलचीपुर में पानी के नाम पर करोड़ों बह गए:घरों में सप्लाई नहीं, लोग रोज केन खरीद रहे; 5 साल बाद भी 12 वार्डों में पानी नहीं

खिलचीपुर में मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के तहत करीब 3 करोड़ 32 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी खिलचीपुर के लोगों को घरों में नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2020 में शुरू हुई योजना के तहत नगर में करीब 32 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन 5 साल बाद भी 15 में से सिर्फ 3 वार्डों में ही पानी की सप्लाई शुरू हो सकी है। बाकी 12 वार्डों में घरों के बाहर पाइप कनेक्शन तो दिखाई देते हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं पहुंचा। पानी की सप्लाई शुरू नहीं होने से कई परिवारों को पीने के लिए निजी कैम्पर और केन खरीदने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधा नहीं मिल सकी। 2020 में मिला था ठेका, एक साल में पूरा होना था काम नगर परिषद खिलचीपुर ने वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के तहत करीब 32 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने और घर-घर नल कनेक्शन देने का ठेका ग्वालियर की जैन एंड राय कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया था। योजना को अधिकतम एक साल में पूरा किया जाना था। काम के दौरान नगर की सड़कों और गलियों को खोदकर पाइपलाइन बिछाई गई। लेकिन कई हिस्सों में काम पूरा होने के बाद भी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। नगरवासियों का आरोप है कि पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों का रेस्टोरेशन भी ठीक से नहीं किया गया। ढाई करोड़ से ज्यादा भुगतान, काम अब भी अधूरा स्थानीय लोगों और नगर परिषद से मिली जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार को करीब ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद योजना का काम पूरा नहीं हुआ। बताया गया है कि सिर्फ 3 वार्डों में पाइपलाइन की टेस्टिंग कर पानी सप्लाई शुरू करने का दावा किया गया, जबकि बाकी वार्डों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। भुगतान और अधूरे काम को लेकर नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व पार्षद राकेश जायसवाल के मुताबिक, भुगतान के बाद ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और करीब दो साल से नगर में वापस नहीं आया। 15 से ज्यादा नोटिस, ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव नगर परिषद के सीएमओ देव नारायण दांगी ने बताया कि ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए 15 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं। ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया है। हालांकि, अब तक योजना का अधूरा काम पूरा नहीं हो सका है। पूर्व पार्षदों की शिकायत के बाद पीएचई, लोक निर्माण और सिंचाई विभाग की टीम ने भी नगर परिषद के उपयंत्री और पार्षदों की मौजूदगी में योजना की जांच की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच में कुछ कमियां सामने आने के बावजूद आगे की कार्रवाई नहीं हुई। सड़कें भी अधूरी, कई जगह पाइप खुले में पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई कई सड़कें और गलियां अब तक पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कें परेशानी का कारण बनी हुई हैं। कई घरों के बाहर पाइप कनेक्शन खुले में लटके हुए हैं। लोगों का कहना है कि नल लगे होने के बावजूद पानी नहीं आता, इसलिए उन्हें बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। रोज 20 से 25 रुपए खर्च कर खरीद रहे पानी पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से कई परिवार निजी कैम्पर और केन से पानी खरीदकर काम चला रहे हैं। लोगों के मुताबिक, इसके लिए रोजाना करीब 20 से 25 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी बन गया है। नगर परिषद कार्यालय में भी खरीदा जा रहा पानी पेयजल व्यवस्था की स्थिति यह है कि नगर परिषद कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारियों के लिए भी पीने का पानी बाहर से मंगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कार्यालय में कैम्पर मंगाने पर करीब 35 हजार रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नगर परिषद खुद पीने का पानी खरीद रही है, तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। 20-25 साल में 35 से 40 करोड़ खर्च, फिर भी समस्या कायम नगरवासियों के मुताबिक, पिछले 20 से 25 साल में फतेहपुरा कुआं पाइपलाइन, गणेशपुरा पाइपलाइन, बग्गा-फत्तूखेड़ी योजना, मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना समेत कई योजनाओं पर बिजली खर्च सहित करीब 35 से 40 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद नगर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। लोगों का कहना है कि योजनाएं आती रहीं, पाइपलाइन बिछती रहीं, लेकिन घरों तक नियमित पीने का पानी नहीं पहुंचा। जांच और कार्रवाई की मांग नगरवासियों ने योजना की पूरी जांच कराने, अधूरे काम को पूरा कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब योजना के लिए करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं तो उसका लाभ भी उन्हें मिलना चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधूरी पड़ी पेयजल योजना कब पूरी होगी और खिलचीपुर के 12 वार्डों के घरों में पाइपलाइन के जरिए पानी कब पहुंचेगा।

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