आखिर क्या हुआ था ध्रुव पंडोव के साथ? 13 साल में डेब्यू, सबसे तेज 1,000 रन; सचिन तेंदुलकर को टक्कर देने का था दम

आखिर क्या हुआ था ध्रुव पंडोव के साथ? 13 साल में डेब्यू, सबसे तेज 1,000 रन; सचिन तेंदुलकर को टक्कर देने का था दम

Dhruv Pandove Cricket Career: आज जिस तरह वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में उत्साह है, उसी तरह कभी ध्रुव पंडोव भी सभी की नजरों में थे। यह बात इतनी पुरानी हो चुकी है कि अब बहुत कम लोगों को याद होगा कि ध्रुव महेंद्र पंडोव महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के समकालीन थे। वह भी एक बल्लेबाजी प्रतिभा थे। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने पंजाब के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था। उनमें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को टक्कर देने का दम था। अगर वह हादसा नहीं हुआ होता, तो शायद भारतीय क्रिकेट के पास एक और ऐसा सितारा होता, जिस पर देश को गर्व होता।

क्या हुआ था ध्रुव पंडोव के साथ?

ध्रुव ने ओडिशा में देवधर ट्रॉफी का मुकाबला खेला था। इसके बाद वह अंबाला पहुंचे। वहां से उन्हें अपने माता-पिता से मिलने पटियाला जाना था। जनवरी का महीना था। उत्तर भारत में घना कोहरा पड़ रहा था। कई जगह सड़कों पर कुछ मीटर दूर तक देख पाना भी बेहद मुश्किल था। पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतन शर्मा ने उन्हें रुकने की सलाह दी थी, लेकिन ध्रुव जल्द से जल्द माता-पिता के पास पहुंचना चाहते थे, क्योंकि उन्हें कुछ दिनों बाद टूरिंग टीम के साथ मैच खेलना था। वह टैक्सी से पटियाला के लिए निकल पड़े, लेकिन रास्ते में हादसा हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। 31 जनवरी 1992 को महज 18 साल की उम्र में ध्रुव पंडोव की मौत हो गई। उस समय ध्रुव को भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा माना जाता था।

छोटी उम्र में बनाई अलग पहचान

ध्रुव पंडोव ने बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली थी। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में पंजाब के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया। सचिन तेंदुलकर ने 15 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था। ध्रुव उस समय देश के सबसे कम उम्र के फर्स्ट क्लास खिलाड़ियों में शामिल थे।

ध्रुव ने 14 साल की उम्र में शतक लगाया। 17 साल की उम्र में वह रणजी ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में 1,000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से होने लगी थी। सचिन उनसे करीब दो साल बड़े थे और तब तक भारतीय टीम के लिए खेलना शुरू कर चुके थे।

ध्रुव भी भारत के लिए खेलने का सपना देख रहे थे। उन्हें भरोसा था कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर जल्द ही राष्ट्रीय टीम में जगह बना सकते हैं। क्रिकेट के जानकारों को उनसे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

कई दिग्गजों को आज भी याद हैं ध्रुव

ध्रुव पंडोव के साथ खेलने वाले कई दिग्गज आज भी उनकी प्रतिभा को याद करते हैं। अनिल कुंबले ने उन्हें एक उभरता हुआ बेहतरीन बल्लेबाज बताया था। विक्रम राठौर के मुताबिक, ध्रुव काफी समझदार थे और उन्हें क्रिकेट की अच्छी समझ थी। अजय जडेजा ने भी उन्हें बेहद निडर खिलाड़ी बताया था। जडेजा के अनुसार, ध्रुव में गजब का आत्मविश्वास और जीतने का जज्बा था।

समय बीतता गया और ध्रुव पंडोव की कहानी भी धीरे-धीरे यादों में धुंधली पड़ गई। भारतीय क्रिकेट ने भी लंबा सफर तय किया। आज दुनिया के सबसे ताकतवर क्रिकेट बोर्डों में बीसीसीआई की गिनती होती है। लेकिन ध्रुव का नाम आते ही एक सवाल आज भी मन में उठता है- अगर वह हादसा नहीं हुआ होता, तो शायद भारतीय क्रिकेट के पास एक और ऐसा सितारा होता, जिस पर देश को गर्व होता।

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