कैमूर के अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कैमूर में मेडिकल कचरे के उपचार और निपटान के लिए अपना ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। ऐसे में अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को करीब 210 किलोमीटर दूर पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा जाता है। कचरा उठाने के लिए पर्याप्त गाड़ियां नहीं होने से परेशानी और बढ़ रही है। 308 अस्पतालों से निकलता है मेडिकल कचरा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कैमूर में 191 सरकारी और 117 निजी अस्पताल हैं। इनमें सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 176 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों से प्रतिदिन करीब 80 से 100 किलोग्राम मेडिकल कचरा निकलता है। इतने बड़े स्तर पर निकलने वाले कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं होने से व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। 10-12 गाड़ियों की जरूरत, दो से हो रहा काम मेडिकल कचरे के संग्रह और परिवहन की जिम्मेदारी संगम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास है। जानकारी के मुताबिक, इस काम के लिए 10 से 12 गाड़ियों की जरूरत है, लेकिन कंपनी केवल दो गाड़ियों से काम चला रही है। इससे कचरा उठाने और उसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाने में परेशानी होने की बात सामने आई है। गाड़ी खराब होने पर घंटों खड़ी रहती हैं गाड़ियां कैमूर से मेडिकल कचरा पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा जाता है। लंबी दूरी तय करने के दौरान गाड़ी खराब होने या सड़क पर जाम लगने की स्थिति में कचरा लदी गाड़ियां घंटों खड़ी रह जाती हैं। ऐसे में समय पर कचरे का निपटान सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा चिकित्सकों के मुताबिक, बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं होने पर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। दूषित सुई, इस्तेमाल की गई चिकित्सा सामग्री और संक्रमित कचरे के अनुचित प्रबंधन से हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसे संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा कचरे के गलत तरीके से निपटान से मिट्टी, भूजल-पर्यावरण भी प्रदूषित हो सकते हैं। जिले में ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की जरूरत मेडिकल कचरे की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कैमूर में कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्ल्यूटीएफ) स्थापित करने की जरूरत है। इससे जिले के अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा। साथ ही, लंबी दूरी तक कचरा ढोने की निर्भरता कम होगी और परिवहन संबंधी परेशानियों से भी राहत मिल सकती है। कैमूर के अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कैमूर में मेडिकल कचरे के उपचार और निपटान के लिए अपना ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है। ऐसे में अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को करीब 210 किलोमीटर दूर पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा जाता है। कचरा उठाने के लिए पर्याप्त गाड़ियां नहीं होने से परेशानी और बढ़ रही है। 308 अस्पतालों से निकलता है मेडिकल कचरा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कैमूर में 191 सरकारी और 117 निजी अस्पताल हैं। इनमें सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 176 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों से प्रतिदिन करीब 80 से 100 किलोग्राम मेडिकल कचरा निकलता है। इतने बड़े स्तर पर निकलने वाले कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा नहीं होने से व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। 10-12 गाड़ियों की जरूरत, दो से हो रहा काम मेडिकल कचरे के संग्रह और परिवहन की जिम्मेदारी संगम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास है। जानकारी के मुताबिक, इस काम के लिए 10 से 12 गाड़ियों की जरूरत है, लेकिन कंपनी केवल दो गाड़ियों से काम चला रही है। इससे कचरा उठाने और उसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाने में परेशानी होने की बात सामने आई है। गाड़ी खराब होने पर घंटों खड़ी रहती हैं गाड़ियां कैमूर से मेडिकल कचरा पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा जाता है। लंबी दूरी तय करने के दौरान गाड़ी खराब होने या सड़क पर जाम लगने की स्थिति में कचरा लदी गाड़ियां घंटों खड़ी रह जाती हैं। ऐसे में समय पर कचरे का निपटान सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा चिकित्सकों के मुताबिक, बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं होने पर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। दूषित सुई, इस्तेमाल की गई चिकित्सा सामग्री और संक्रमित कचरे के अनुचित प्रबंधन से हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसे संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा कचरे के गलत तरीके से निपटान से मिट्टी, भूजल-पर्यावरण भी प्रदूषित हो सकते हैं। जिले में ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की जरूरत मेडिकल कचरे की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कैमूर में कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्ल्यूटीएफ) स्थापित करने की जरूरत है। इससे जिले के अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा। साथ ही, लंबी दूरी तक कचरा ढोने की निर्भरता कम होगी और परिवहन संबंधी परेशानियों से भी राहत मिल सकती है।

