कानपुर में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर भारत सेवक समाज, कानपुर मंडल की ओर से सोमवार को मलिक गेस्ट हाउस में ‘क्रांतिकारियों में कानपुर और भगत सिंह का योगदान’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की। महामंत्री शरद प्रकाश अग्रवाल और संयोजक प्रदीप भाटिया ने अतिथियों का स्वागत किया। वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी में भगत सिंह समेत अनेक क्रांतिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भगत सिंह का कानपुर से भी गहरा जुड़ाव रहा। वे गणेश शंकर विद्यार्थी के संरक्षण में प्रताप प्रेस से जुड़े और छद्म नाम ‘बलवंत सिंह’ से लेखन किया। वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह ने अपने लेखन और विचारों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया। संगोष्ठी में भगत सिंह के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद सांडर्स हत्याकांड, केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने और इसके बाद गिरफ्तारी देने के प्रसंगों का उल्लेख किया। कहा गया कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान देश के स्वतंत्रता संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। कविताओं से दी श्रद्धांजलि कवयित्री सीमा ‘जागृति’ और कवि महेंद्र तिवारी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगत सिंह और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सराहनीय योगदान के लिए प्रमुख लोगों को अंगवस्त्र और ‘भगत सिंह सम्मान-2026’ स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुखबीर सिंह मलिक ने की। मुख्य अतिथि प्रादेशिक अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षक विधायक राज बहादुर सिंह चंदेल, विशिष्ट अतिथि पूर्व संयुक्त आयकर आयुक्त राघवेंद्र सिंह और मुख्य वक्ता रजनीश गुप्ता रहे। सिविल डिफेंस चीफ वार्डेन राजीव सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। संचालन महामंत्री शरद प्रकाश अग्रवाल ने किया।

