डॉक्टर की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पेट सामान्य आया। कोई बीमारी भी नहीं मिली। कुछ घंटे बाद एक तांत्रिक ने उसी व्यक्ति के पेट से नींबू के जरिए कांच के टुकड़े, हड्डी और लौंग निकालने का दावा किया। वहीं, दूसरे बाबा ने घर में दबे 35 किलो सोने को निकालने के बदले सवा 11 किलो सोना दान में मांग लिया। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-1 में आपने बुंदेलखंड के उन बाबाओं का स्टिंग पढ़ा था, जो सोशल मीडिया के जरिए अपने दरबार का प्रचार करते हैं। अब पार्ट-2 में यूपी के महोबा और एमपी के छतरपुर-सतना में किए गए स्टिंग देखिए और पढ़िए। हमारी टीम मरीज, श्रद्धालु और इन्वेस्टर बनकर पहुंची और अलग-अलग काल्पनिक समस्याएं रखीं। बातचीत में बाबाओं के दावों और उनके तरीकों की पड़ताल की गई। महोबा के तांत्रिक मकबूल खान का दावा है कि जादू-टोने के जरिए पेट में पहुंचाई गई सामग्री को वे बिना ऑपरेशन के बाहर निकाल सकते हैं। इस दावे की पड़ताल के लिए भास्कर टीम ने पहले अपने ड्राइवर का अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट सामान्य आई और पेट में कोई बाहरी वस्तु नहीं मिली। इसके बाद टीम तांत्रिक के दरबार पहुंची, जहां टोटका हटवाने के लिए लोग कतार में थे। दरबार में तांत्रिक के बेटे ने रिपोर्टर के साथी के हाथ पर मेहंदी लगाई। आधे घंटे बाद मेहंदी हटाने पर हल्के धब्बे दिखे। उसने कहा, ‘इन्हें दिनाई (जादू-टोना) निकालनी पड़ेगी।’ इसके बाद वह नींबू लाया, उसे रिपोर्टर के साथी के मुंह में रखा और नीम के पत्तों से झाड़-फूंक की। फिर नींबू बाहर निकाला। तांत्रिक के बेटे ने नींबू को चाकू से काटकर रिपोर्टर के हाथ पर निचोड़ा। उसमें से हड्डी का टुकड़ा, कांच की चूड़ियों के टुकड़े, लौंग और चावल के दाने गिराए गए। उसने दावा किया, ‘इन्हें किसी ने जादू-टोना करके यह सब खिला दिया था। अब एक हफ्ते में ठीक हो जाएंगे।’ इसके बाद ₹400 लिए गए, जिसका भुगतान रिपोर्टर ने पेटीएम से किया। छतरपुर के पिपौरा गांव में पप्पू रैकवार बाबा दरबार लगाते हैं। उनका दावा है कि उनके शरीर में नरसिंह भगवान आते हैं और वे नशा छुड़ाने, गृह क्लेश दूर करने से लेकर बीमारियां ठीक कर सकते हैं। भास्कर टीम दरबार शुरू होने से पहले यहां पहुंची। बाबा उस समय सामान्य रूप से फोन पर बात कर रहे थे। दोपहर 12 बजे के बाद करीब 200 लोगों के जुटने पर वे अचानक उठे और छाती पीटते हुए चिल्लाने लगे-‘बोलो जय नरसिंह भगवान की!’ टीम ने ऑब्जर्व किया कि, यह प्रक्रिया करीब हर आधे घंटे में दोहराई गई। ₹110 में नींबू की बूंदों से नशा छुड़ाने का दावा करीब 50 लोगों को नशा छुड़ाने के लिए कतार में लगाया गया। बाबा ने उनके मुंह में नींबू के रस की कुछ बूंदें डालीं और प्रति व्यक्ति ₹110 लिए। बाबा की बेटी भुगतान की निगरानी कर रही थी। सोना निकालने की डील शाम को रिपोर्टर ने बाबा से अकेले में मुलाकात की। उसने खुद को बड़ा इन्वेस्टर बताते हुए कहा कि उसके घर में 30-35 किलो सोना दबा है। सोना निकालने के उपाय के बारे में पूछने पर बाबा ने दान की शर्त बताई। बाबा ने कहा, ‘ठीक है, हम खुद आकर सोना निकाल देंगे। लेकिन इसके लिए तुम्हें सवा 11 किलो सोना दान करना होगा। इसमें से 10 किलो दरबार के नाम रहेगा और सवा किलो से कन्याओं को भोजन कराएंगे।’ सतना के सिद्धेश्वर धाम में बाबा आदर्श कृष्ण शास्त्री पर्चा लिखने का दावा करते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने खुद को अमीर बिजनेसमैन बताकर बाबा के सेवक से मुलाकात की। दरबार खत्म होने के बाद सेवक ने रिपोर्टर को बंद कमरे में बाबा से मिलवाया। रिपोर्टर ने दरबार में बड़ा इन्वेस्टमेंट करने की इच्छा जताई। बाबा चुप रहे, जबकि सेवक ने बाहर लगे बोर्ड के QR कोड से ऑनलाइन दान करने को कहा। इसके बाद रिपोर्टर ने काल्पनिक समस्या रखी-‘मेरे साथी की एक किडनी खराब होने के कारण निकाल दी गई है, दूसरी भी खराब है। वह परेशान है और उसकी शादी भी नहीं हो रही है।’ इसके बाद बाबा ने झोले से एक छोटा घोंटा (मसाला कूटने वाला) और पीतल के हनुमान जी की छोटी मूर्ति निकाली। आंखें बंद कर कुछ बुदबुदाने के बाद उन्होंने कहा, ‘कोई समस्या नहीं आएगी, किडनी भी ठीक हो जाएगी और शादी भी हो जाएगी।’ टीम के बाहर निकलने पर बाबा का सेवक भी आया। उसने रिपोर्टर का मोबाइल नंबर नोट किया और फिर कहा कि दान की राशि बाहर लगे QR कोड पर ट्रांसफर कर दें। भास्कर टीम के साथ गए शास्त्री बोले- ये सभी फर्जी बाबा फर्जी बाबाओं के दरबारों की पड़ताल के लिए भास्कर टीम के साथ गए पंडित प्रदीप शास्त्री ने कहा, “मैं दैनिक भास्कर की टीम के साथ सात से ज्यादा चमत्कारी दरबारों में गया। वहां पाया कि कोई भी बाबा पर्चा ठीक से नहीं बना सका। ये लोग झूठ और गोरखधंधे का कारोबार चला रहे हैं। मनमाने मंत्र बनाकर लोगों को परोस रहे हैं, जिनका शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं है।कई बाबाओं को हनुमान चालीसा तक नहीं आती। उन्हें गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र की भी जानकारी नहीं है।

