जयपुर: भगवान केदारनाथ के दर्शन करने की मन में इच्छा लिए घर से निकले जयपुर के सानकोटड़ा गांव के एक युवक की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। 34 वर्षीय विष्णु जांगिड़ उत्तराखंड में केदारनाथ के पैदल रास्ते पर भूस्खलन (पहाड़ खिसकने) की चपेट में आ गए थे। शनिवार को जब उनका शव उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई इस अचानक हुए हादसे से स्तब्ध है।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, आंधी कस्बे के बूज निवासी विष्णु जांगिड़ अपने भांजे पवन जांगिड़ के साथ 3 जून को केदारनाथ यात्रा के लिए घर से रवाना हुए थे। दोनों मामा-भांजा बेहद खुशी-खुशी बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे। 5 जून को दोपहर करीब पौने तीन बजे, जब वे गौरीकुंड से लगभग तीन किलोमीटर आगे पैदल मार्ग पर चल रहे थे, तभी अचानक सामने के पहाड़ से भारी मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगे।
हादसे में आई गंभीर चोटें
इस अचानक हुए हादसे में विष्णु मलबे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयानक था कि विष्णु के ठीक पास चल रहे एक घोड़े और उसके चालक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा।
उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद घायल विष्णु को वहां से निकाला और तुरंत पास के अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गांव में गमगीन माहौल, अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़
विष्णु की मौत के बाद उनका भांजा पवन शव को लेकर अपने गांव के लिए रवाना हुआ। शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जैसे ही विष्णु का शव सानकोटड़ा गांव पहुंचा, पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
अंतिम संस्कार के दौरान गांव में बेहद भावुक माहौल रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें अंतिम विदाई देने शामिल हुए। आसपास के गांवों के लोग भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक विष्णु का विवाह वर्ष 2016 में कालोता की रहने वाली करिश्मा के साथ हुआ था। उनके दो छोटे बेटे हैं, जिनमें बड़ा बेटा कवि (6 साल) और छोटा बेटा मयंक (4 साल) है। इन मासूम बच्चों को शायद अभी यह समझ भी नहीं है कि उनके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ चुका है।
विष्णु पेशे से एक इलेक्ट्रिशियन थे और दिन-रात कड़ी मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। उनके निधन से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।


