रतलाम. विश्व प्रसिद्ध शहर का शासकीय माणकचौक अतिप्राचीन महालक्ष्मी मंदिर अनदेखी का शिकार हो रहा हैं। छत जर्जर हालत में है, तो किसी भी दिन हादसा होने का खतरा बना रहता हैं। फिर मानसून सिर पर है और कार्य पूरा नहीं होने पर भक्तों को दर्शन के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मरम्मत कार्य के लिए शासन की ओर से एक साल पहले ही इसके लिए 6 लाख रुपए से अधिक की राशि मंजूर की गई थी, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में मंदिर की छत को अंदर से अस्थायी रूप से टेंट के चद्दर से ढंक रखा है।
आस्था के साथ खिलवाड़
मानसून सिर पर है और परिसर में पानी टपकने से यहां आने वाले भक्तों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। धर्मस्व विभाग आस्था से खिलवाड़ कर रहा है और जनप्रतिनिधि पूरे मामले में मौन है।
देवास टेकरी पर हो चुका हादसा
हाल ही देवास टेकरी माता मंदिर का जर्जर हिस्सा गिरने से एक बड़ा हादसा टल गया था। रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर भी जन-जन की आस्था का केंद्र है, यहां हर दिन सैकड़ों की संख्या मेें सुबह से रात तक भक्तों को आना जाना लगा रहता हैं।
हर शुक्रवार को उमड़ती भीड़
विशेष कर शुक्रवार को काफी भीड़ रहती हैं। ऐसे में राशि स्वीकृत होने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मंदिर प्रबंधन द्वारा धर्मस्व विभाग को इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।
एकत्रित चांदी कब लगेगी
पिछले साल दीपावली के पूर्व पीओपी जर्जर छत को तोडकऱ टेंट के चद्दर लगाए थे, अब भी लगे हुए हैं। पिछली बारिश में पानी टपकता रहा, भक्त परेशान होते रहे। मंदिर के नाम पर समिति बनाकर भक्तों से एकत्रित की गई चांदी, जिसे गर्भगृह में लगाया जाना था, उसका भी अब तक कोई अता-पता नहीं है कि वह कब और कैसे उपयोग में लाई जाएगी।
प्रशासन को अवगत करा रखा हैं
मंदिर के अश्विन पुजारी के अनुसार पीओपी की जर्जर छत तोडकऱ टेंट के चद्दर लगाए थे, पिछले साल भी बारिश में पानी मंदिर परिसर में टपकता रहा। इस संबंध में धर्मस्व विभाग और प्रशासन को अवगत करा रखा हैं।
रुपए आ गए, कार्य देखना है
मंदिर के लिए रुपए तो आ गए है, लेकिन नोटशीट में किस-किस कार्य के लिए कितने रुपए मंजूर किए है, यह देखना शेष है। शीघ्र कार्य शुरू करेंगे।
ऋषभ ठाकुर, शहर तहसीलदार


