मधुबनी के जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने मंडल कारा, मधुबनी में आयोजित बंदी दरबार में भाग लिया। बुधवार दोपहर को उन्होंने बंदियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं व आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने सभी मामलों के शीघ्र और प्रभावी निष्पादन का आश्वासन दिया। बंदी दरबार के बाद, जिलाधिकारी ने मंडल कारा के विभिन्न हिस्सों का विस्तृत निरीक्षण किया। इसमें महिला वार्ड, सामान्य वार्ड, पुस्तकालय, पाकशाला और अस्पताल शामिल थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। महिला वार्ड के निरीक्षण में पाया गया कि महिला बंदियों को सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कौशल प्रशिक्षण बंदियों की आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह, कारा पुस्तकालय में पुरुष बंदियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। जिलाधिकारी ने इसे एक अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ते हैं और भविष्य में आजीविका के नए अवसर प्रदान करते हैं। निरीक्षण के दौरान, भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिए गए कि आवश्यकतानुसार वार्डों और अन्य भवनों की मरम्मत व रंग-रोगन का कार्य शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। इसका उद्देश्य कारा परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखना है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कारा की परिधि दीवार (परिमिटर वॉल) की ऊंचाई बढ़ाने और उस पर कंटीले तार लगाने का भी निर्देश दिया गया। इससे सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार, अपर समाहर्ता मुकेश रंजन झा, विशेष कार्य पदाधिकारी नितेश कुमार पाठक और जेल अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि कारा को केवल बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाना है। उनका लक्ष्य है कि बंदी यहां से समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक रूप से पुनः स्थापित हो सकें। मधुबनी के जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने मंडल कारा, मधुबनी में आयोजित बंदी दरबार में भाग लिया। बुधवार दोपहर को उन्होंने बंदियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं व आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने सभी मामलों के शीघ्र और प्रभावी निष्पादन का आश्वासन दिया। बंदी दरबार के बाद, जिलाधिकारी ने मंडल कारा के विभिन्न हिस्सों का विस्तृत निरीक्षण किया। इसमें महिला वार्ड, सामान्य वार्ड, पुस्तकालय, पाकशाला और अस्पताल शामिल थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। महिला वार्ड के निरीक्षण में पाया गया कि महिला बंदियों को सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कौशल प्रशिक्षण बंदियों की आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह, कारा पुस्तकालय में पुरुष बंदियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। जिलाधिकारी ने इसे एक अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ते हैं और भविष्य में आजीविका के नए अवसर प्रदान करते हैं। निरीक्षण के दौरान, भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिए गए कि आवश्यकतानुसार वार्डों और अन्य भवनों की मरम्मत व रंग-रोगन का कार्य शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। इसका उद्देश्य कारा परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखना है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कारा की परिधि दीवार (परिमिटर वॉल) की ऊंचाई बढ़ाने और उस पर कंटीले तार लगाने का भी निर्देश दिया गया। इससे सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार, अपर समाहर्ता मुकेश रंजन झा, विशेष कार्य पदाधिकारी नितेश कुमार पाठक और जेल अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि कारा को केवल बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र बनाना है। उनका लक्ष्य है कि बंदी यहां से समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक रूप से पुनः स्थापित हो सकें।


