उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा के 2 नए ऑफर, क्या मानेंगे:मोदी कैबिनेट में शामिल होइए, मंत्री दीपक प्रकाश के लिए खास प्लान

उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा के 2 नए ऑफर, क्या मानेंगे:मोदी कैबिनेट में शामिल होइए, मंत्री दीपक प्रकाश के लिए खास प्लान

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री पद छोड़ेंगे या नहीं? इस सवाल की चर्चा बिहार के सियासी गलियारे में तेज है। इन सबके बीच भाजपा ने कुशवाहा को नया ऑफर दिया है। भाजपा का नया ऑफर क्या है। दीपक प्रकाश के लिए क्या है प्लान, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… 8 मई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के 9 प्रत्याशियों (BJP-4, JDU-4, LJP(R)-1) ने नामांकन किया। इसमें NDA के सभी नेता शामिल हुए, लेकिन राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पटना में होते हुए भी दूर रहे। नाराजगी की खबरों के बीच वह उसी दोपहरिया पटना से दिल्ली रवाना गए। हालांकि, दिल्ली जाते वक्त उन्होंने नाराजगी की चर्चा को फालूत बताया और कहा कि हम एकजुट हैं। सूत्रों के मुताबिक, अंदरखाने भाजपा ने साफ कर दिया है कि हम दीपक प्रकाश को मंत्री पद छोड़ने को नहीं कहेंगे। उनको कब तक मंत्री रहना है, वह खुद और उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा तय करें। आगे क्या करना है, यह निर्णय वह खुद लें। कुशवाहा को मोदी कैबिनेट में शामिल होने का ऑफर सूत्रों के मुताबिक, 20 जून के आसपास संभावित मोदी कैबिनेट के फेरबदल में उपेंद्र कुशवाहा को शामिल किया जा सकता है। वह इससे पहले 2014 की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, दिल्ली पहुंचे कुशवाहा लगातार सिचुएशन को कंट्रोल करने का प्रयास कर रहे हैं। संभव है कि अगले दो सप्ताह में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए बीच का रास्ता निकल सकता है। दीपक प्रकाश के लिए 2 खास प्लान 7 मई को दूसरी बार मंत्री बने दीपक प्रकाश अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियम के तहत मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर यानी 6 नवंबर से पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनको मंत्री पद छोड़ना ही होगा। जून में हो रहे विधान परिषद चुनाव में NDA ने उनको प्रत्याशी नहीं बनाया। अब विधान परिषद का चुनाव नवंबर में होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस बदली हुई परिस्थिति में भाजपा ने दीपक प्रकाश के लिए 2 प्लान सुझाए हैं। 1. पत्नी की जगह बेटे को विधायक बनाएं कुशवाहा सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने कुशवाहा को साफ कह दिया है कि दीपक को मंत्री बनाए रखना या नहीं-यह आप खुद तय करें। 2. शिक्षक या स्नातक कोटे से चुनाव लड़े और जीते सूत्रों के मुताबिक, अगर स्नेहलाता को विधायक बनाए रखते हैं, उस परिस्थिति में कुशवाहा को नवंबर में होने वाले विधान परिषद चुनाव में बेटे को लड़ाने का सुझाव दिया गया है। 16 नवंबर 2026 को विधान परिषद में शिक्षक कोटे की 4 और स्नातक कोटे की 4 सीटें खाली हो रही है। भाजपा का ऑफर मानने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं ऊपर के इन दोनों ऑफरों को छोड़कर कुशवाहा के पास एकमात्र ऑप्शन NDA से अलग होने का है। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा और उनके विधायक माधव आनंद ने साफ कहा है कि हम NDA में थे, हैं और आगे भी रहेंगे। मतलब अलग होने की संभावना नहीं हैं। हालांकि, राजनीति में कुछ भी पक्के तौर पर नहीं होता। जनसुराज पार्टी कुशवाहा के प्रति हमदर्दी जता रही है। अगर कुशवाहा भाजपा के लिखित वादों से मुकरने को स्वाभिमान की लड़ाई बनाते हैं और NDA से नाता तोड़ते हैं, तो वे अपनी जाति कुशवाहा समाज के बीच जाकर पीड़ित होने की सहानुभूति बटोर सकते हैं। वे कह सकते हैं कि भाजपा ने लिखित में वादा करने के बाद भी हमें धोखा दिया है। हमको दबा रही है। लेकिन इसके 3 गंभीर परिणाम होंगे… ऐसा नहीं होगा इसकी गारंटी नहीं है। ममता बनर्जी की TMC, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की NCP के साथ ऐसा हो चुका है। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री पद छोड़ेंगे या नहीं? इस सवाल की चर्चा बिहार के सियासी गलियारे में तेज है। इन सबके बीच भाजपा ने कुशवाहा को नया ऑफर दिया है। भाजपा का नया ऑफर क्या है। दीपक प्रकाश के लिए क्या है प्लान, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… 8 मई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के 9 प्रत्याशियों (BJP-4, JDU-4, LJP(R)-1) ने नामांकन किया। इसमें NDA के सभी नेता शामिल हुए, लेकिन राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पटना में होते हुए भी दूर रहे। नाराजगी की खबरों के बीच वह उसी दोपहरिया पटना से दिल्ली रवाना गए। हालांकि, दिल्ली जाते वक्त उन्होंने नाराजगी की चर्चा को फालूत बताया और कहा कि हम एकजुट हैं। सूत्रों के मुताबिक, अंदरखाने भाजपा ने साफ कर दिया है कि हम दीपक प्रकाश को मंत्री पद छोड़ने को नहीं कहेंगे। उनको कब तक मंत्री रहना है, वह खुद और उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा तय करें। आगे क्या करना है, यह निर्णय वह खुद लें। कुशवाहा को मोदी कैबिनेट में शामिल होने का ऑफर सूत्रों के मुताबिक, 20 जून के आसपास संभावित मोदी कैबिनेट के फेरबदल में उपेंद्र कुशवाहा को शामिल किया जा सकता है। वह इससे पहले 2014 की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, दिल्ली पहुंचे कुशवाहा लगातार सिचुएशन को कंट्रोल करने का प्रयास कर रहे हैं। संभव है कि अगले दो सप्ताह में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए बीच का रास्ता निकल सकता है। दीपक प्रकाश के लिए 2 खास प्लान 7 मई को दूसरी बार मंत्री बने दीपक प्रकाश अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियम के तहत मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर यानी 6 नवंबर से पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनको मंत्री पद छोड़ना ही होगा। जून में हो रहे विधान परिषद चुनाव में NDA ने उनको प्रत्याशी नहीं बनाया। अब विधान परिषद का चुनाव नवंबर में होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस बदली हुई परिस्थिति में भाजपा ने दीपक प्रकाश के लिए 2 प्लान सुझाए हैं। 1. पत्नी की जगह बेटे को विधायक बनाएं कुशवाहा सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने कुशवाहा को साफ कह दिया है कि दीपक को मंत्री बनाए रखना या नहीं-यह आप खुद तय करें। 2. शिक्षक या स्नातक कोटे से चुनाव लड़े और जीते सूत्रों के मुताबिक, अगर स्नेहलाता को विधायक बनाए रखते हैं, उस परिस्थिति में कुशवाहा को नवंबर में होने वाले विधान परिषद चुनाव में बेटे को लड़ाने का सुझाव दिया गया है। 16 नवंबर 2026 को विधान परिषद में शिक्षक कोटे की 4 और स्नातक कोटे की 4 सीटें खाली हो रही है। भाजपा का ऑफर मानने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं ऊपर के इन दोनों ऑफरों को छोड़कर कुशवाहा के पास एकमात्र ऑप्शन NDA से अलग होने का है। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा और उनके विधायक माधव आनंद ने साफ कहा है कि हम NDA में थे, हैं और आगे भी रहेंगे। मतलब अलग होने की संभावना नहीं हैं। हालांकि, राजनीति में कुछ भी पक्के तौर पर नहीं होता। जनसुराज पार्टी कुशवाहा के प्रति हमदर्दी जता रही है। अगर कुशवाहा भाजपा के लिखित वादों से मुकरने को स्वाभिमान की लड़ाई बनाते हैं और NDA से नाता तोड़ते हैं, तो वे अपनी जाति कुशवाहा समाज के बीच जाकर पीड़ित होने की सहानुभूति बटोर सकते हैं। वे कह सकते हैं कि भाजपा ने लिखित में वादा करने के बाद भी हमें धोखा दिया है। हमको दबा रही है। लेकिन इसके 3 गंभीर परिणाम होंगे… ऐसा नहीं होगा इसकी गारंटी नहीं है। ममता बनर्जी की TMC, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की NCP के साथ ऐसा हो चुका है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *