Gold ETF और Gold Mutual Fund में क्या है फर्क, रिटर्न और टैक्स के मामले में कहां है ज्यादा फायदा?

Gold ETF और Gold Mutual Fund में क्या है फर्क, रिटर्न और टैक्स के मामले में कहां है ज्यादा फायदा?

Gold ETF Vs Gold Mutual Fund: सोने में निवेश की चाहत रखने वाले लोग अक्सर फिजिकल गोल्ड का विकल्प ढूंढ़ते रहते हैं। लेकिन पूरी जानकारी के अभाव में निवेश से पीछे हट जाते हैं। कई लोग तो गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड के बीच अंतर ही नहीं कर पाते। नाम सुनने में दोनों लगभग एक जैसे लगते हैं, मगर अंदर की कहानी बिल्कुल अलग है। अगर बिना समझे निवेश कर दिया, तो बाद में पछताना पड़ सकता है।

गोल्ड ETF क्या होता है?

असल फर्क निवेश के तरीके से शुरू होता है। गोल्ड ETF सीधे सोने की कीमत को ट्रैक करता है। यानी फंड हाउस असली सोना खरीदता है या उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है। इसकी कीमत बाजार में सोने के भाव के साथ ऊपर-नीचे होती रहती है। इसे शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदा और बेचा जा सकता है। इसलिए इसमें निवेश करने के लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है।

गोल्ड म्यूचुअल फंड क्या होता है?

दूसरी तरफ गोल्ड म्यूचुअल फंड सीधे सोना नहीं खरीदते। ये ज्यादातर गोल्ड ETF में पैसा लगाते हैं। आसान भाषा में कहें तो गोल्ड ETF जहां असली प्लेयर है, वहीं गोल्ड म्यूचुअल फंड उसके जरिए निवेश करता है। यही वजह है कि इसे Gold Fund of Funds भी कहा जाता है।

दोनों में से कौन है बेहतर?

अगर सिर्फ रिटर्न की बात करें, तो गोल्ड ETF थोड़ा आगे नजर आता है। इसकी वजह यह है कि यह सोने की कीमत को ज्यादा करीब से ट्रैक करता है और इसका एक्सपेंस रेशियो भी कम होता है। हालांकि, इसमें शेयर बाजार की तरह ब्रोकरेज चार्ज देना पड़ सकता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में इसमें एग्जिट लोड नहीं लगता।

वहीं, गोल्ड म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना चाहते हैं और डिमैट अकाउंट नहीं खुलवाना चाहते। इसमें निवेश आसान जरूर होता है, लेकिन खर्च थोड़ा ज्यादा हो सकता है। साथ ही कई फंड्स में कम समय में पैसा निकालने पर एग्जिट लोड भी देना पड़ता है।

टैक्स के मामले में भी दोनों में है फर्क

अगर आप गोल्ड ETF खरीदकर 12 महीने के भीतर बेच देते हैं, तो उस पर होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। वहीं, 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5 फीसदी लगेगा।

गोल्ड म्यूचुअल फंड में यह अवधि लंबी है। यहां 24 महीने तक निवेश रखने पर मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। 24 महीने बाद बेचने पर ही 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का फायदा मिलेगा।

लिक्विडिटी के मामले में भी Gold ETF आगे

लिक्विडिटी यानी तुरंत खरीदने-बेचने की सुविधा में भी गोल्ड ETF आगे माना जाता है। बाजार खुला हो तो इसे कभी भी शेयर की तरह ट्रेड किया जा सकता है। जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड में यूनिट्स का खरीदना और रिडीम करना AMC के जरिए होता है।

गोल्ड ETF को ट्रैक करना आसान

एक और दिलचस्प बात यह है कि गोल्ड ETF का प्रदर्शन आमतौर पर ज्यादा पारदर्शी माना जाता है, क्योंकि इसका NAV सीधे बाजार में सोने की कीमत से जुड़ा होता है। जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड में बीच में ETF की लेयर होने से थोड़ा फर्क आ सकता है।

दोनों में से कौन है बेस्ट?

अगर आप एक्टिव निवेशक हैं, डिमैट अकाउंट रखते हैं और कम खर्च में सोने की कीमत के हिसाब से बेहतर रिटर्न चाहते हैं, तो गोल्ड ETF आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप आसान निवेश चाहते हैं, SIP के जरिए थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाना चाहते हैं और डिमैट अकाउंट की झंझट नहीं चाहते, तो गोल्ड म्यूचुअल फंड ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *