विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से तमिलनाडु की राजनीति में काफी हलचल देखी जा रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन अकेले सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं जुटा पाई।
ऐसे में विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने विजय को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे TVK को बहुमत वाले 118 के आंकड़े तक पहुंचने में मदद मिल गई है।
दिलचस्प बात यह है कि थिरुमावलवन खुद लोकसभा सांसद होते हुए इस बार विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बनना चाहते थे। लेकिन उन्होंने अंत में नाम वापस ले लिया। इसकी क्या वजह रही? आइये इसके बारे में विस्तार से जानें
थिरुमावलवन कौन हैं?
थोल थिरुमावलवन वीसीके पार्टी के संस्थापक और तमिलनाडु में दलित अधिकारों के मजबूत आवाज माने जाते हैं। 1962 में तिरुचिरापल्ली जिले के अंगनूर गांव में जन्मे थिरुमावलवन ने क्रिमिनोलॉजी और लॉ की पढ़ाई की।
थिरुमावलवन पहले फॉरेंसिक विभाग में काम करते थे, लेकिन तमिलनाडु में दलित आंदोलन के दौरान राजनीति में कूद पड़े। 1990 में उन्होंने वीसीके की शुरुआत की।
वे चिदंबरम लोकसभा सीट से सांसद हैं और तमिलनाडु में दलित समुदाय के बड़े चेहरे माने जाते हैं। उन्हें अक्सर हॉनर किलिंग के खिलाफ खुलकर बोलते हुए देखा जाता है।
नाम वापस लेने का पूरा मामला
इस बार थिरुमावलवन ने कट्टुमनारकोइल सीट से नामांकन भरा था। वे राज्य की राजनीति में वापसी करना चाहते थे। लेकिन गठबंधन की एकता और कुछ अफवाहों के चलते उन्होंने नाम वापस ले लिया।
बाद में उन्होंने जोतिमनी को इस सीट से उतारा, जो वीसीके के लिए जीतकर आए। पार्टी के कुछ कार्यकर्ता इस फैसले से निराश भी हुए, लेकिन थिरुमावलवन ने कहा कि यह गठबंधन की भलाई के लिए जरूरी था।
क्या है TVK की स्थिति?
2026 के विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतीं। लेकिन पूर्ण बहुमत (118) के लिए कुछ और समर्थन की जरूरत थी। कांग्रेस और वाम दलों (CPI-CPM) के साथ बातचीत के बाद VCK के दो विधायकों का समर्थन TVK के लिए गेम चेंजर साबित हुआ।
वीसीके ने बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया। थिरुमावलवन ने खुद विजय से फोन पर बात की और पार्टी की हाई लेवल कमिटी में चर्चा के बाद यह फैसला लिया। कुछ रिपोर्ट्स में कैबिनेट में जगह या डिप्टी सीएम जैसे दावों की भी खबरें आईं, लेकिन वीसीके ने इन्हें साफ किया।
क्या बोले थिरुमावलवन?
थिरुमावलवन ने कहा- ‘विजय जी ने फोन करके समर्थन मांगा। हमने पार्टी प्रक्रिया से फैसला लिया। हम सेकुलर गठबंधन चाहते हैं और विजय की DMK-AIADMK-BJP से दूरी की नीति को सही मानते हैं।’
अब माना जा रहा है कि त्रिची ईस्ट सीट पर थिरुमावलवन उपचुनाव में दावेदारी ठोक सकते हैं। इस सीट पर फिलहाल विजय ने जीत दर्ज की है।


