नगर नियोजन में प्राचीन विज्ञान का उपयोग जरूरी:ग्रीन बिल्डिंग वर्कशॉप में बोले सीएम- ग्लोबल वार्मिंग के सर्वाधिक साइड इफेक्ट किसानों पर

नगर नियोजन में प्राचीन विज्ञान का उपयोग जरूरी:ग्रीन बिल्डिंग वर्कशॉप में बोले सीएम- ग्लोबल वार्मिंग के सर्वाधिक साइड इफेक्ट किसानों पर

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि गर्मी से बचाव को लेकर पुराने समय में जो काम होते रहे हैं उनसे सीखा जा सकता है और इससे कम खर्च भी आता है। प्राचीन ज्ञान का उपयोग कर नगर नियोजन करने से अच्छे रिजल्ट सामने लाए जा सकते हैं। सरकार का पैसा सही काम में लगे, स्वास्थ्य और सुविधाओं का लाभ मिले, यह उचित है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जीपीएस तो अभी बना है लेकिन काल गणना की व्यवस्था सदियों पुरानी है। महाकाल के ऊपर जो एक पाइंट था वह आज खिसक कर 32 किमी दूर पहुंच गया है जहां पर आब्जर्वेटरी बनाई गई है। मांडव में जल प्रबंधन के लिए काम उसी तरह किया जा सकता है जैसे भोपाल में राजा भोज ने कराया था। पुरा स्थापत्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण मांडव बन सकता है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते आंधी तूफान आ रहे हैं और इसका नुकसान किसानों को होता है। आम के पेड़ों से आंधी के कारण आम झड़ने का जिक्र करते हुए सीएम यादव ने कहा कि आप समझिए कि उस किसान के मन पर क्या बीतती होगी जिसकी फसल पूरे साल बाद आती है और ग्लोबल वार्मिंग के चलते आंधी बारिश के कारण खराब हो जाती है। गांवों में एयरकंडीशन की डिमांड से बिगड़ेगी एनर्जी की स्थिति लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर में हर घर में, हर कार्यालय में एयर कंडीशनर की मांग हो रही है, इसके कारण ऊर्जा की खपत बढ़ रही है। हमारे देश में जहां बड़ी संख्या में गांव हैं और स्वाभाविक रूप से हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में भी एयर कंडीशनर की शुरुआत हो जाएगी और उसके कारण से ऊर्जा का एक बड़ा संकट आने वाले समय में हम सबके लिए होगा। इसका कोई समाधान है तो केवल और केवल वह ग्रीन बिल्डिंग ही है और इसीलिए इस पर चर्चा के लिए हम यहां पर एकत्रित हुए हैं। ग्रीन बिल्डिंग के लिए जो आवश्यक पदार्थ हैं और वेस्ट मैनेजमेंट है, उस पर चर्चा स्वाभाविक रूप से होगी। एनर्जी एफिशिएंसी की दिशा में और प्राकृतिक प्रकाश वेंटीलेशन इन सारे विषयों पर भी चर्चा होगी। स्मार्ट टेक्नोलॉजी पर भी चर्चा होगी 3D प्रिंटिंग से बनने वाले भवनों पर भी निश्चित रूप से चर्चा होगी जो आने वाले कल के लिए अत्यंत लाभदायक होगा। भविष्य की जो भी डिजाइनिंग से लेकर कंप्लीशन तक प्रोसेस होगी, इसकी मॉनिटरिंग ग्राहक के स्टैंडर्ड पर ही होगी। हम कह सकेंगे कि हमारे जो भी भवन है वह सारे के सारे ग्रीन सर्टिफाइड हैं। ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर काम कर रहा है विभाग सिंह ने कहा कि ग्राउंडवाटर रिचार्ज की दिशा में भी रिचार्ज बोर्ड बनाकर काम कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता हम करने जा रहे हैं। साथ ही जितने भी एलिवेटेड कॉरिडोर्स और फ्लाई ओवर हैं इन पर भी रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। लोक निर्माण मंत्री सिंह ने कहा कि हमारे इंजीनियर जनसंख्या की आवश्यकता के आधार पर भूमि और दूरी को देखते हुए वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर भविष्य की योजनाएं की तैयारी कर सकेंगे जो हमारे लिए आने वाले कल के लिए जरूरत को पूरा करेगा और अब हम इसको जोड़कर जनता को निर्माण और सुधार कार्यों के लिए जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

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