डीएम सौरभ जोरवाल ने छात्रों को पढ़ाया:मोतिहारी मॉडल स्कूल में शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

पूर्वी चंपारण में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल स्वयं शिक्षक की भूमिका में मोतिहारी के लखौरा स्थित मॉडल विद्यालय श्री रामदवन विभीषण उच्च माध्यमिक +2 विद्यालय पहुंचे। उन्होंने कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाया और उनसे संवाद किया। इस दौरान डीएम ने छात्रों से पढ़ाई, अनुशासन और विद्यालय की व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे, साथ ही उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। 27 प्रखंडों में मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे डीएम ने शिक्षण कार्य के साथ-साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। इस पहल से प्रशासन की शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति गंभीरता और बच्चों के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता सामने आई है। यह पहल बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। इसके तहत पूर्वी चंपारण जिले के 27 प्रखंडों में एक-एक मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इन विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रदान करना है। प्रत्येक विद्यालय में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिल सके। इन मॉडल विद्यालयों में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) के लिए संगीत, ललित कला, नृत्य और शारीरिक शिक्षा सहित कुल 8 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 11-12) के लिए 16 शिक्षकों की तैनाती होगी। शिक्षकों का चयन शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होगा। मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन इन मॉडल विद्यालयों से जिले के लाखों छात्रों को अपने ही प्रखंड में उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, NMMS परीक्षा में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन दिया जाएगा। डीएम सौरभ जोरवाल ने बताया कि ये विद्यालय केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि आसपास के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए भी शैक्षणिक मार्गदर्शन और संसाधन साझा करने का कार्य करेंगे। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन विद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता का मॉडल बनाया जाएगा। अब पूर्वी चंपारण के छात्रों का सपना सरकारी विद्यालयों में ही साकार होता नजर आ रहा है। पूर्वी चंपारण में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। जिला पदाधिकारी सौरभ जोरवाल स्वयं शिक्षक की भूमिका में मोतिहारी के लखौरा स्थित मॉडल विद्यालय श्री रामदवन विभीषण उच्च माध्यमिक +2 विद्यालय पहुंचे। उन्होंने कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाया और उनसे संवाद किया। इस दौरान डीएम ने छात्रों से पढ़ाई, अनुशासन और विद्यालय की व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे, साथ ही उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। 27 प्रखंडों में मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे डीएम ने शिक्षण कार्य के साथ-साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। इस पहल से प्रशासन की शिक्षा की गुणवत्ता के प्रति गंभीरता और बच्चों के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता सामने आई है। यह पहल बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। इसके तहत पूर्वी चंपारण जिले के 27 प्रखंडों में एक-एक मॉडल विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इन विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और नवाचार-आधारित शिक्षा प्रदान करना है। प्रत्येक विद्यालय में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिल सके। इन मॉडल विद्यालयों में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) के लिए संगीत, ललित कला, नृत्य और शारीरिक शिक्षा सहित कुल 8 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 11-12) के लिए 16 शिक्षकों की तैनाती होगी। शिक्षकों का चयन शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और साक्षात्कार के आधार पर पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होगा। मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन इन मॉडल विद्यालयों से जिले के लाखों छात्रों को अपने ही प्रखंड में उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, NMMS परीक्षा में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को मेरिट के आधार पर नामांकन दिया जाएगा। डीएम सौरभ जोरवाल ने बताया कि ये विद्यालय केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि आसपास के अन्य सरकारी विद्यालयों के लिए भी शैक्षणिक मार्गदर्शन और संसाधन साझा करने का कार्य करेंगे। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन विद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता का मॉडल बनाया जाएगा। अब पूर्वी चंपारण के छात्रों का सपना सरकारी विद्यालयों में ही साकार होता नजर आ रहा है।  

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