सुपौल में न्यायिक अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब निर्मली में नए अत्याधुनिक न्यायिक भवनों का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर संगम कुमार साहू, मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। इस मौके पर जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह सह सुपौल न्यायाधीशीय क्षेत्र के निरीक्षण न्यायाधीश भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी सावन कुमार, एसपी शरथ आरएस सहित अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे। न्यायालय से जुड़े अधिवक्ता, बार एसोसिएशन के सदस्य तथा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग भी समारोह के साक्षी बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने की। निर्मली अनुमंडल में आयोजित समारोह में 15 (G+4) कोर्ट रूम भवन, G+1 हाजत भवन, G+4 एमेनिटीज बिल्डिंग तथा 12 (G+3) पी.ओ. आवासीय क्वार्टर का लोकार्पण किया गया। वहीं वीरपुर अनुमंडलीय न्यायालय परिसर में शाम 04:00 बजे 10 (G+4) कोर्ट रूम भवन का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये की लागत आई है, जिससे स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। निर्मली की धरती संघर्ष और धैर्य का प्रतीक
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने कहा कि निर्मली की धरती केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और धैर्य की भी प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि मिथिलांचल की इस भूमि की अपनी विशिष्ट पहचान है, जहां कोसी जैसी जीवनदायिनी नदी के साथ-साथ उसके प्रकोप की पीड़ा भी लोगों ने झेली है। ऐसे क्षेत्र में न्यायिक सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक था।
उन्होंने कहा कि पहले यहां के लोगों को छोटे-छोटे मामलों के लिए लगभग 45 किलोमीटर दूर सुपौल जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ता था। न्यायिक सेवाओं में लंबे समय से लंबित सुधार लेकिन अब इस नए न्यायिक परिसर के निर्माण से स्थानीय लोगों को अपने ही अनुमंडल में न्याय मिल सकेगा। उन्होंने इसे “न्यायिक सेवाओं में लंबे समय से लंबित सुधार” करार दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि निर्मली का नया न्यायिक परिसर 15 कोर्ट रूम के साथ G+4 संरचना में बना है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त एमेनिटीज बिल्डिंग और हाजत भवन भी शामिल हैं। 37 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से बना भवन इस परियोजना पर लगभग 37 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत आई है। इसके अलावा 12 आवासीय क्वार्टर (G+3) का निर्माण करीब 11 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जिससे न्यायिक अधिकारियों को बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय की प्रभावशीलता केवल भवन की भव्यता से नहीं मापी जाती, बल्कि वहां मिलने वाली न्याय की निष्पक्षता और पारदर्शिता से तय होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।” इस तरह के आधुनिक और गरिमामय न्यायिक परिसर इस सिद्धांत को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। अधिवक्ताओं और वादकारियों को मिलेगा बेहतर वातावरण
कार्यक्रम में मौजूद जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि नए भवनों के निर्माण से न केवल मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी, बल्कि अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। उन्होंने बताया कि निर्मली अनुमंडल न्यायालय में पहले से लंबित करीब 350 मामलों की सुनवाई अब यहीं संभव होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि प्रशासन न्यायिक व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर आम लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। निर्मली अनुमंडल न्यायालय में लगभग 43 अधिवक्ता कार्यरत
कार्यक्रम के दौरान बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की भी उपस्थिति रही। जानकारी के अनुसार, निर्मली अनुमंडल न्यायालय में लगभग 43 अधिवक्ता कार्यरत हैं, जिनमें महिला अधिवक्ताओं की भी भागीदारी है। नए न्यायिक परिसर से उन्हें बेहतर बैठने और कार्य करने की सुविधा मिलेगी।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने नए भवनों का निरीक्षण किया और इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर बताया। इस पहल से सुपौल जिले में न्यायिक सेवाओं को नई गति मिलेगी और आम जनता को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मिल सकेगा। सुपौल में न्यायिक अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब निर्मली में नए अत्याधुनिक न्यायिक भवनों का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर संगम कुमार साहू, मुख्य न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। इस मौके पर जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह सह सुपौल न्यायाधीशीय क्षेत्र के निरीक्षण न्यायाधीश भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी सावन कुमार, एसपी शरथ आरएस सहित अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे। न्यायालय से जुड़े अधिवक्ता, बार एसोसिएशन के सदस्य तथा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग भी समारोह के साक्षी बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने की। निर्मली अनुमंडल में आयोजित समारोह में 15 (G+4) कोर्ट रूम भवन, G+1 हाजत भवन, G+4 एमेनिटीज बिल्डिंग तथा 12 (G+3) पी.ओ. आवासीय क्वार्टर का लोकार्पण किया गया। वहीं वीरपुर अनुमंडलीय न्यायालय परिसर में शाम 04:00 बजे 10 (G+4) कोर्ट रूम भवन का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये की लागत आई है, जिससे स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। निर्मली की धरती संघर्ष और धैर्य का प्रतीक
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने कहा कि निर्मली की धरती केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और धैर्य की भी प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि मिथिलांचल की इस भूमि की अपनी विशिष्ट पहचान है, जहां कोसी जैसी जीवनदायिनी नदी के साथ-साथ उसके प्रकोप की पीड़ा भी लोगों ने झेली है। ऐसे क्षेत्र में न्यायिक सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक था।
उन्होंने कहा कि पहले यहां के लोगों को छोटे-छोटे मामलों के लिए लगभग 45 किलोमीटर दूर सुपौल जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ता था। न्यायिक सेवाओं में लंबे समय से लंबित सुधार लेकिन अब इस नए न्यायिक परिसर के निर्माण से स्थानीय लोगों को अपने ही अनुमंडल में न्याय मिल सकेगा। उन्होंने इसे “न्यायिक सेवाओं में लंबे समय से लंबित सुधार” करार दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि निर्मली का नया न्यायिक परिसर 15 कोर्ट रूम के साथ G+4 संरचना में बना है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त एमेनिटीज बिल्डिंग और हाजत भवन भी शामिल हैं। 37 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से बना भवन इस परियोजना पर लगभग 37 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत आई है। इसके अलावा 12 आवासीय क्वार्टर (G+3) का निर्माण करीब 11 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जिससे न्यायिक अधिकारियों को बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय की प्रभावशीलता केवल भवन की भव्यता से नहीं मापी जाती, बल्कि वहां मिलने वाली न्याय की निष्पक्षता और पारदर्शिता से तय होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।” इस तरह के आधुनिक और गरिमामय न्यायिक परिसर इस सिद्धांत को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। अधिवक्ताओं और वादकारियों को मिलेगा बेहतर वातावरण
कार्यक्रम में मौजूद जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि नए भवनों के निर्माण से न केवल मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलेगी, बल्कि अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। उन्होंने बताया कि निर्मली अनुमंडल न्यायालय में पहले से लंबित करीब 350 मामलों की सुनवाई अब यहीं संभव होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि प्रशासन न्यायिक व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर आम लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। निर्मली अनुमंडल न्यायालय में लगभग 43 अधिवक्ता कार्यरत
कार्यक्रम के दौरान बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं की भी उपस्थिति रही। जानकारी के अनुसार, निर्मली अनुमंडल न्यायालय में लगभग 43 अधिवक्ता कार्यरत हैं, जिनमें महिला अधिवक्ताओं की भी भागीदारी है। नए न्यायिक परिसर से उन्हें बेहतर बैठने और कार्य करने की सुविधा मिलेगी।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने नए भवनों का निरीक्षण किया और इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर बताया। इस पहल से सुपौल जिले में न्यायिक सेवाओं को नई गति मिलेगी और आम जनता को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मिल सकेगा।


