US-Iran War: युद्ध को समाप्त करने के लिए राजी हुआ ईरान, अमेरिका को भेजा तीन सूत्रीय प्रस्ताव; जानें क्या-क्या शामिल

US-Iran War: युद्ध को समाप्त करने के लिए राजी हुआ ईरान, अमेरिका को भेजा तीन सूत्रीय प्रस्ताव; जानें क्या-क्या शामिल

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें युद्ध खत्म करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर जोर दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान द्वारा भेजा गए प्रस्ताव का मुख्य फोकस वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है।

क्या है प्रस्ताव में खास?

ईरान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में सीजफायर को लंबे समय तक बढ़ाने या फिर स्थायी रूप से समाप्त करने की बात है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेनिक नाकेबंदी को हटाना भी शामिल है। वहीं परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद के चरण में शुरू करना भी है। 

व्हाइट हाउस पहुंचा प्रस्ताव

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ट्रंप प्रशासन इस पर आगे बढ़ेगा या नहीं? 

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ऐसे संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दों पर मीडिया के जरिए बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी समझौते में अपनी प्राथमिकताओं से समझौता नहीं करेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अटकी हुई बातचीत के बीच प्रस्ताव

बता दें कि यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत लगभग ठप पड़ी है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी थी, जिसे शांति वार्ता का अहम हिस्सा माना जा रहा था।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान में लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। अब अराघची रूस पहुंच गए हैं, जहां उनकी मुलाकात पुतिन से होने वाली है।

क्या आगे बढ़ेगी डील?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इससे वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजर अमेरिका के अगले कदम पर टिकी है।

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