ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर को बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने खुद इसका ऐलान किया। हालांकि सीज़फायर बढ़ाने से पहले और इसके बाद भी ट्रंप ने साफ कर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप के इस फैसले पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने उन पर निशाना साधा है।
अमेरिकी नाकेबंदी को बताया ‘एक्ट ऑफ वॉर’
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी को विरोध करते हुए अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ‘एक्ट ऑफ वॉर’ है और इस तरह से यह सीज़फायर का उल्लंघन है। किसी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना और उसके चालक दल को बंधक बनाना उससे भी बड़ा उल्लंघन है। ईरान प्रतिबंधों को बेअसर करना, अपने हितों की रक्षा करना और दादागिरी का सामना करना जानता है।”
क्या है होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी जारी रखने की वजह?
होर्मुज स्ट्रेट और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के पीछे ट्रंप की सोची-समझी चाल है। ट्रंप जानते हैं कि ईरान के लिए यह जलमार्ग बेहद अहम है। देश की अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल के निर्यात की अहम भूमिका है जिसके लिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का करीब 20-30% तेल इसी जलमार्ग से गुज़रता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान को काफी नुकसान हो रहा है और ट्रंप यह बात अच्छी तरह से जानते हैं। ट्रंप का मानना है कि इससे ईरान पर दबाव बढ़ रहा है और जिससे उसके पास अमेरिका से समझौता करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
कब तक जारी रहेगी नाकेबंदी?
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं हो जाता। इसके लिए ट्रंप ने अपनी सेना को भी आदेश दे दिया है और और उसे पूरी तरह से तैयार रहने के लिए कहा है। अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है।


