ट्विशा केस- नौकर से उतरवाई बॉडी, चचेरे भाई ने दिया CPR, CBI ने पूछे सवाल

ट्विशा केस- नौकर से उतरवाई बॉडी, चचेरे भाई ने दिया CPR, CBI ने पूछे सवाल

Twisha Sharma case: भोपाल के हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को घटना के 20 दिन बाद पीड़िता के घर पर क्राइम सीन का डिटेल्ड रीक्रिएशन किया। दिल्ली से आई एक स्पेशल फोरेंसिक टीम समेत दस मेंबर वाली CBI टीम ने ट्विशा के बॉडी वेट से मैच करती 80 किलो की डमी का इस्तेमाल करके घटनाओं का सीक्वेंस रीक्रिएट करने में करीब साढ़े तीन घंटे लगाए। इस दौरान सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के घर के घरेलू हेल्पर और समर्थ के चचेर भाई स्वराज सिंह (Swaraj Singh) को भी सीन रिक्रिएशन की प्रक्रिया और पूछताछ के लिए बुलाया था। उनसे घटना वाली रात को अपने एक्शन दिखाने के लिए कहा गया। फोरेंसिक एनालिसिस के लिए पूरी एक्सरसाइज की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई।

दो घंटे चली रिक्रिएशन प्रक्रिया, घरेलु हेल्पर और चचेरे भाई को भी बुलाया

बता दें कि, गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) के घर में सीन रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया दो घंटे से ज़्यादा चला। इस दौरान समर्थ सिंह (Samarth Singh) से पूछा गया कि बेल्ट को ठीक किस जगह पर बांधा गया था। फिर बेल्ट को ओवरहेड शेड स्ट्रक्चर पर उसी जगह और एंगल पर फिक्स किया गया। जांच एजेंसी के अधिकारी दोनों आरोपी से लगातार पूछताछ कर रहे थे। फिर पुतले को बेल्ट से लटका दिया गया और गर्दन में दो बार गांठ लगाकर फंदा बांधा गया।

इसके बाद गिरिबाला से फंदे को खोलने के लिए कहा गया। रीकंस्ट्रक्शन के मुताबिक, 12 मई की रात को जब गिरिबाला सिंह ने फंदा खोला, तो समर्थ सिंह ने डमी को पीछे से सपोर्ट दिया। फिर समर्थ ने डमी को नीचे उतारा और बिस्तर पर रख दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान समर्थ और गिरिबाला गुस्सा भी हो गए थे। फिर समर्थ के चचेरे भाई स्वराज सिंह और एक घरेलू नौकर की मदद से डमी को सीढ़ियों से नीचे लाया गया। इसके बाद समर्थ और स्वराज को कथित तौर पर किए गए CPR प्रोसीजर को भी रीक्रिएट करने को कहा गया।

2 जून को खत्म हो रही रिमांड

पूरे सीन रिक्रिएशन एक्सरसाइज के दौरान, पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह ज्यादातर चुप रहे और पूछताछ के दौरान इन्वेस्टिगेटर्स के साथ कोऑपरेट किया। उनकी CBI रिमांड मंगलवार को खत्म होने वाली है, जब दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।अगर आगे पूछताछ की जरुरत हुई तो इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी कस्टडी बढ़ाने की मांग कर सकती है। नहीं तो, कोर्ट उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का फैसला करेगी।

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