बंदोबस्ती परवाना की मांग को लेकर डीएम से मिलने पहुंचे आदिवासी

बंदोबस्ती परवाना की मांग को लेकर डीएम से मिलने पहुंचे आदिवासी

भास्कर न्यूज | किशनगंज जिस जमीन का मंगलवार को आईजी सीआईएसएफ और डीएम ने मुआयना किया था, उसी जमीन की बंदोबस्ती परवाना की मांग को लेकर बुधवार को दर्जनों आदिवासी समाहरणालय पहुंचे। समाहरणालय परिसर में पहुंचे बुढ़नई पंचायत के झाड़बाड़ी के लोगों ने अपनी समस्या रखते हुए बताया कि वे सभी भूमिहीन हैं और वर्षों से इसी जमीन पर रहकर खेती-बाड़ी कर अपनी जीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि थाना नंबर-79, खाता बिहार सरकार नंबर-1136 के विभिन्न खेसरा नंबर की जमीन पर आदिवासी परिवार अलग-अलग रकवा में घर बनाकर रह रहे हैं। कुछ लोगों ने सरकार द्वारा प्रदत्त इंदिरा आवास भी बनाकर वर्षों से वहीं बसोबास कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अंचलाधिकारी पोठिया को अपने बसोबास और खेती वाली जमीन के बंदोबस्ती परवाना के लिए आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे वे असुरक्षा की स्थिति में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से बसे हैं, उसका बंदोबस्ती परवाना उन्हें दिया जाए, ताकि उन्हें स्थायी अधिकार मिल सके और वे बिना डर के अपना जीवन यापन कर सकें। भास्कर न्यूज | किशनगंज जिस जमीन का मंगलवार को आईजी सीआईएसएफ और डीएम ने मुआयना किया था, उसी जमीन की बंदोबस्ती परवाना की मांग को लेकर बुधवार को दर्जनों आदिवासी समाहरणालय पहुंचे। समाहरणालय परिसर में पहुंचे बुढ़नई पंचायत के झाड़बाड़ी के लोगों ने अपनी समस्या रखते हुए बताया कि वे सभी भूमिहीन हैं और वर्षों से इसी जमीन पर रहकर खेती-बाड़ी कर अपनी जीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि थाना नंबर-79, खाता बिहार सरकार नंबर-1136 के विभिन्न खेसरा नंबर की जमीन पर आदिवासी परिवार अलग-अलग रकवा में घर बनाकर रह रहे हैं। कुछ लोगों ने सरकार द्वारा प्रदत्त इंदिरा आवास भी बनाकर वर्षों से वहीं बसोबास कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अंचलाधिकारी पोठिया को अपने बसोबास और खेती वाली जमीन के बंदोबस्ती परवाना के लिए आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे वे असुरक्षा की स्थिति में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से बसे हैं, उसका बंदोबस्ती परवाना उन्हें दिया जाए, ताकि उन्हें स्थायी अधिकार मिल सके और वे बिना डर के अपना जीवन यापन कर सकें।  

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