Anti-D Injection: क्या आपने कभी सोचा है कि एक मां की सिर्फ एक गलती उसके तीन बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है? हाल ही में डॉक्टर हेतवी पटेल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने एक ऐसी ही महिला का जिक्र किया। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर उस मां से ऐसी क्या गलती हुई?
दरअसल, उस महिला का ब्लड ग्रुप Negative था और उसके पति का Positive। जब उनका पहला बच्चा हुआ, तो उसका ब्लड ग्रुप भी पॉजिटिव था। लेकिन डिलीवरी के बाद मां ने Anti-D इंजेक्शन नहीं लगवाया, जिसके कारण बाद में उनके तीन एबॉर्शन (गर्भपात) हुए। आइए जानते हैं कि Anti-D इंजेक्शन क्या होता है, यह क्यों जरूरी है और इसे कहां लगवाया जा सकता है।
Anti-D Injection क्या है?
Rh Immune Globulin ही Anti-D Injection है। यह इंजेक्शन उन महिलाओं को लगाया जाता है जिनका ब्लड ग्रुप Rh-Negative होता है। जब Rh-Negative ब्लड ग्रुप वाली महिला का पहला बच्चा Rh-Positive पैदा होता है, तो डिलीवरी के समय मां और बच्चे का रक्त आपस में मिल जाता है। पहली गर्भावस्था में तो इससे कोई विशेष परेशानी नहीं होती, लेकिन यदि समय पर Anti-D इंजेक्शन न लगवाया जाए, तो महिला का शरीर Rh-Positive तत्व को बाहरी तत्व समझकर उसके खिलाफ Antibodies (एंटीबॉडीज) बनाने लगता है। यही एंटीबॉडीज अगली गर्भावस्था में भ्रूण को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे बार-बार एबॉर्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। एंटी-डी इंजेक्शन मां के शरीर में इन घातक एंटीबॉडीज को बनने से रोकता है।
कब लगाया जाता है Anti-D Injection?
यह इंजेक्शन आमतौर पर गर्भावस्था के 28वें हफ्ते में और डिलीवरी के 72 घंटों के भीतर लगाया जाता है। इसके अलावा, गर्भपात (Miscarriage) होने या प्रेगनेंसी के दौरान पेट पर किसी भी तरह की चोट लगने की स्थिति में भी इसे लगाना अनिवार्य होता है।
Anti-D Injection की कीमत
प्राइवेट हॉस्पिटल और मेडिकल स्टोर्स में 300 mcg के एक इंजेक्शन की कीमत आमतौर पर ₹2,500 से ₹4,500 के बीच होती है। राजस्थान सहित भारत के कई राज्यों में जननी शिशु सुरक्षा योजना (JSSK) के तहत गर्भवती महिलाओं को यह इंजेक्शन और अन्य जरूरी दवाएं नि:शुल्क (Free) उपलब्ध कराई जाती हैं। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में यह सुविधा आसानी से मिल जाती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


