दिनभर कार में घुमाया, शाम को अनजान राहगीर बनाकर दिखाई अफीम बरामदगी

दिनभर कार में घुमाया, शाम को अनजान राहगीर बनाकर दिखाई अफीम बरामदगी

श्रीगंगानगर। जिले के सादुलशहर थाना क्षेत्र में दर्ज एक एनडीपीएस प्रकरण ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीलीबंगा निवासी 20 वर्षीय युवक रिदम अग्रवाल की गिरफ्तारी और उसके पास से कथित तौर पर ढाई किलो अफीम बरामदगी के मामले में परिजनों ने यहां श्रीगंगानगर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद दायर कर पूरी कार्रवाई को संदिग्ध बताया है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस के अनुसार 26 फरवरी को सादुलशहर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि एसआई शंभु दयाल अपनी टीम गुरुचरण सिंह, गुरप्रीत सिंह, संदीप कुमार और चालक विनोद कुमार के साथ सरकारी बोलेरो से गश्त पर थे। शाम करीब सवा पांच बजे नूरपुरा-अलीपुरा लिंक नहर पुलिया के पास एक युवक संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया। पुलिस का दावा है कि युवक ने पुलिस को देखकर भागने की कोशिश की लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसकी पहचान रिदम अग्रवाल निवासी पीलीबंगा के रूप में हुई। उसके कंधे पर टंगे बैग की तलाशी लेने पर करीब 2 किलो 460 ग्राम अफीम बरामद होने का दावा किया गया। इसके बाद शाम करीब पौने सात बजे उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

परिजनों का आरोप: दिनभर कार में रखा, फिर बनाया केस

दूसरी ओर युवक की मां अनु अग्रवाल ने कोर्ट में दायर परिवाद में पुलिस की पूरी कहानी को झूठा बताया है। उनका कहना है कि रिदम 26 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे घर से निकला था, इसके बाद पीलीबंगा में ही 2-3 युवकों ने उसे जबरन कार में बैठा लिया। परिवाद के अनुसार युवक को पहले सूरतगढ़ की ओर ले जाया गया और फिर महियांवाली होते हुए सादुलशहर क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर घुमाया गया। मां का आरोप है कि इस दौरान कार में पुलिस अधिकारी और कुछ कर्मी सिविल ड्रेस में मौजूद थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवक को एक फैक्ट्री में ले जाकर कमरे में बैठाया गया, जहां उसे खाना दिया गया और करीब दो घंटे तक वहीं रखा गया। इसके बाद दूसरी गाड़ी में आए पुलिसकर्मियों के साथ उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहां कथित रूप से वीडियो बनाकर पूरे मामले को फिल्मी अंदाज में तैयार किया गया।

टोल नाके के सीसीटीवी फुटेज ने खोली परतें

मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब कोर्ट के निर्देश पर टोल नाकों की सीसीटीवी फुटेज मंगवाई गई। अनु अग्रवाल महियांवाली और सूरतगढ़ क्षेत्र के रंगमहल टोल प्लाजा पहुंचीं। जहां महियांवाली टोल से फुटेज वहां मैनेजर नहीं होने पर उपलब्ध हुई लेकिन रंगमहल टोल प्लाजा से 26 फरवरी की फुटेज उपलब्ध कराई गई। इस फुटेज में एक कार में युवक को पीछे की सीट पर बैठाकर ले जाते हुए देखा गया है। इस पर परिजनों ने सवाल उठाया है कि यदि युवक दिनभर पुलिस या संदिग्ध व्यक्तियों की कार में था, तो शाम को उसे अचानक अज्ञात राहगीर बताकर उसके पास से अफीम बरामदगी कैसे दिखा दी गई।

कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

श्रीगंगानगर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस की बजाय खुद के पास यह जांच का अधिकार रखा है। संबंधित साक्ष्यों, विशेषकर सीसीटीवी फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस मादक पदार्थ बरामदगी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सीसीटीवी फुटेज और परिजनों के आरोप कहानी को उलझा रहे हैं। अब निगाहें कोर्ट की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि मामला वास्तविक बरामदगी का है या फिर किसी साजिश के तहत यह केस तैयार किया गया।

छात्र है युवक, परिवार सदमे में

परिजनों के अनुसार रिदम अग्रवाल बीबीए का छात्र है और उसका किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। मां अनु अग्रवाल का कहना है कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि घटना के दिन रात करीब साढ़े नौ बजे एक पुलिसकर्मी से बेटे के पकड़े जाने की सूचना मिली, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया। बाद में जेल में मुलाकात के दौरान रिदम ने पूरी आपबीती बताई, इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।

एसपी बोले, जांच करवाएंगे, दोषी पर होगा एक्शन

जिले के कार्यवाहक एसपी रघुवीर प्रसाद शर्मा का कहना है कि इस मामले में नया पहलू सुनने को मिला है। इस मामले की जांच करवाएंगे और जांच में कोई भी दोषी होगा उस पर एक्शन लेेने में संकोच नहीं करेंगे।

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