‘ईरान से कोई भी कमजोर डील नहीं होगी’, अब्राहम समझौते के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फिर बनाया दबाव

‘ईरान से कोई भी कमजोर डील नहीं होगी’, अब्राहम समझौते के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फिर बनाया दबाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्राहम समझौते के बीच ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि या तो बहुत अच्छा समझौता होगा या फिर कोई समझौता नहीं।

अगर बात नहीं बनी तो स्थिति और खराब हो सकती है, लेकिन अमेरिका तैयार है। इस बीच ट्रंप ने एक ऐसा भी सुझाव दिया है जो पूरे मिडिल ईस्ट की तस्वीर बदल सकता है।

क्षेत्रीय नेता शामिल, अब बड़े समझौते की तैयारी

ट्रंप ने शनिवार को सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों के प्रमुख नेताओं से बात की।

इनमें सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर और पाकिस्तान के आर्मी चीफ समेत कई बड़े नाम शामिल थे।

ट्रंप का कहना है कि ईरान मसले को सुलझाने के लिए इन सभी देशों को कम से कम अब्राहम समझौते पर एक साथ हस्ताक्षर कर देने चाहिए।

यूएई और बहरीन पहले ही अब्राहम समझौते का हिस्सा हैं। ट्रंप अब बाकी देशों को भी इसमें शामिल करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इससे ईरान वाला कोई भी समझौता और ज्यादा ऐतिहासिक बन जाएगा।

‘एक-दो देश न मानें तो भी चलेगा’

ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर कोई एक या दो देश इसमें शामिल होने में दिक्कत महसूस करें तो उसे स्वीकार किया जाएगा। लेकिन ज्यादातर देशों को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। उनका जोर है कि अमेरिका ने इस पेचीदा मुद्दे को सुलझाने के लिए काफी मेहनत की है, अब बाकी देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

ईरान को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी भी दी- कोई कमजोर डील नहीं चलेगी। अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो फिर पुरानी स्थिति वापस आ सकती है, यानी टकराव बढ़ सकता है।

ट्रंप का कहना है कि कोई भी इस टकराव को नहीं चाहता। इस पूरे बयान में ट्रंप ने शांति और मजबूत समझौते पर जोर दिया। अब्राहम समझौते को और फैलाने का उनका प्रस्ताव मध्य पूर्व में नई संभावनाएं खोल सकता है। अगर सऊदी अरब जैसे बड़े देश इसमें शामिल होते हैं तो क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।

क्या बदलेगा मध्य पूर्व का भविष्य?

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया ईरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव पर नजर रखे हुए है। अगर उनके सुझाव पर अमल होता है तो न सिर्फ ईरान डील मजबूत होगी बल्कि इजराइल और अरब देशों के बीच पहले से बने पुल और मजबूत हो सकते हैं।

पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों का शामिल होना इस समझौते को और व्यापक बना सकता है। हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कई देशों के अपने अलग हित और आंतरिक राजनीति है, जो फैसले को मुश्किल बना सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *