कर्नाटक के श्री चक्रेश्वरी मंदिर से जसोल-धाम आएगी पावन ज्योत:धार्मिक स्थलों और मंदिरों से होते हुए पहुंचेगी, पारंपरिक मालाणी रीति-रिवाजों के साथ होगा स्वागत

राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थस्थल जसोल-धाम में मंगलवार रात एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण साकार होने जा रहा है। दक्षिण भारत के कर्नाटक स्थित प्राचीन श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर से प्रज्वलित ज्योत जसोल-धाम पहुंच रही है। इस ज्योत के आगमन को लेकर क्षेत्रभर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। यह पावन ज्योत महंत गणेश पुरी महाराज के सानिध्य में जसोल-धाम लाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिव्य ज्योत शक्ति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालु इसे एक आध्यात्मिक महापर्व के रूप में देख रहे हैं। 15 मई से शुरू हुई यात्रा, 20 मई को होगी पूर्ण श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान के प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया- यह पावन ज्योत यात्रा 15 मई 2026 से प्रारंभ हुई थी। यात्रा विभिन्न धार्मिक स्थलों, मंदिरों और आध्यात्मिक पड़ावों से गुजरते हुए 20 मई 2026 को पूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य देशभर में सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक चेतना को जोड़ना है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जूना अखाड़ा और संत समाज का मिल रहा सानिध्य इस संपूर्ण यात्रा में पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली एनसीआर संत महामंडल के अध्यक्ष नारायण गिरी जी महाराज का विशेष आशीर्वाद और सानिध्य प्राप्त हो रहा है। उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन में यात्रा गरिमा, अनुशासन और भक्ति भाव के साथ आगे बढ़ रही है। संत समाज की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक दिव्यता एवं आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की है। 19 मई की रात जसोल-धाम में होगा भव्य स्वागत आयोजन समिति के अनुसार 19 मई 2026 को रात्रि 11 बजे जसोल-धाम में ज्योत का पारंपरिक मालाणी रीति-रिवाजों के साथ ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा। स्वागत कार्यक्रम को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। मंदिर परिसर और जसोल-धाम को विशेष रूप से सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान पुष्प वर्षा, फूल-मालाओं से अभिनंदन, ढोल-थाली की टंकार के साथ अगवानी, दीप सज्जा और रात्रि जागरण का आयोजन होगा। इसके अलावा पुष्कर से आए नगाड़ा कलाकारों और गैर नृत्य कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। लोक संस्कृति और भक्ति का यह अनूठा संगम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। राणीसा भटियाणीसा मंदिर के गर्भगृह में विराजित होगी अखंड ज्योत स्वागत कार्यक्रम के बाद पावन दिव्य अखंड ज्योत को रात्रि में श्री राणीसा भटियाणीसा मंदिर के गर्भगृह में विधिवत स्थापित किया जाएगा। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। 20 मई 2026 को सुबह 05:30 बजे से 07:25 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए दिव्य ज्योत के दर्शन की व्यवस्था रहेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर संस्थान और आयोजन समिति ने सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। पालिया-धाम के लिए प्रस्थान करेगी पावन ज्योत दर्शन के बाद सुबह 07:30 बजे अखंड ज्योत श्री राणी रूपादे जी मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। इस अवसर पर श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक वातावरण के बीच ज्योत यात्रा में शामिल होंगे। आयोजन समिति के अनुसार यह कार्यक्रम राजस्थान की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण अवसर है। मंदिर संस्थानों ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं, संत समाज और क्षेत्रवासियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है।

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