बरनाला जिले के कलालमाजरा गांव में पंचायत अधिकारों को लेकर चल रहा संघर्ष 27 घंटे बाद समाप्त हो गया। सरपंच जगजीवन सिंह को पानी टंकी से सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। प्रशासन के साथ बातचीत के बाद बनी सहमति को गांववासियों, पंचायत और विभिन्न संगठनों ने स्वीकार किया। सरपंच जगजीवन सिंह बीते दिनों पंचायत सदस्यों के साथ वाटर वर्क्स की टंकी पर चढ़ गए थे। उन्होंने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की थी कि गांव के विकास कार्य पंचायत के माध्यम से शुरू किए जाएं और नियुक्त किए गए प्रबंधक को हटाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी न होने तक संघर्ष जारी रहेगा। भाई लालो पंजाबी मंच के नेता हरजीत सिंह ख्याली, शिरोमणि अकाली दल (बादल) के हलका इंचार्ज जत्थेदार नाथ सिंह हमीदी, सीपीआई के जिला सचिव कामरेड खुशिया सिंह बरनाला, मीत प्रधान कौर सिंह कलालमाजरा और समाजसेवी भान सिंह जस्सी ने इस संघर्ष का समर्थन किया। सरपंचों के साथ हो रही ‘धक्केशाही’ बर्दाश्त नहीं उन्होंने कहा कि सरकारें पंचायतों को अधिकार देने का दावा करती हैं, लेकिन चुने हुए सरपंचों के कार्यों में बाधा डाल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरपंचों के साथ हो रही ‘धक्केशाही’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन के साथ बातचीत के बाद बीडीपीओ महल कलां भूषण कुमार, तहसीलदार सुखबीर सिंह और थाना महल कलां के प्रभारी कुलविंदर सिंह धालीवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरपंच जगजीवन सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और गांव में कोई प्रबंधक नियुक्त नहीं होगा। अधिकारियों ने ग्राम पंचायत से कोरम पूरा कर गांव के विकास कार्य आगे बढ़ाने को कहा। सहमति बनने के बाद अधिकारी टंकी पर चढ़े और सरपंच को जूस पिलाकर सुरक्षित नीचे उतारा। टंकी से नीचे उतरते ही गांववासियों ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। विभिन्न संगठनों के नेताओं ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आगे भी मजबूती से आवाज उठाई जाएगी। इस दौरान शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के राष्ट्रीय महासचिव गुरजंट सिंह कट्टू, होप फॉर महल कलां के इंचार्ज कुलवंत सिंह टिब्बा, भारतीय किसान यूनियन कादियां के नेता डॉ. सुखदीप सिंह गिल समेत पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में गांववासी मौजूद रहे।


