जमुई जिले के बरहट प्रखंड में नक्सलवाद के प्रतीक रहे अंतिम स्मारक को सोमवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में ध्वस्त कर दिया गया। गुरमाहा गांव के समीप स्थित इस स्मारक को जेसीबी मशीन की मदद से पूरी तरह जमींदोज किया गया। इस कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र में विकास की राह खुलने की उम्मीद जगी है। बरहट थाना पुलिस और एसटीएफ के जवानों ने इस अभियान को अंजाम दिया। कार्रवाई का नेतृत्व बीडीओ श्रवण कुमार पांडेय, सीओ किसलय कुमार, एसटीएफ डीएसपी और थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने संयुक्त रूप से किया। गुरमाहा गांव कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां नक्सलियों द्वारा जन अदालतें लगाई जाती थीं और मारे गए नक्सलियों की याद में यह स्मारक बनाया गया था। इस स्मारक पर समय-समय पर झंडे फहराकर सरकार को चुनौती दी जाती थी, जिसके कारण यह स्थानीय लोगों के लिए भय और आतंक का प्रतीक बन चुका था। नक्सल प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना उद्देश्य थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के निर्देश पर की गई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र का अंतिम नक्सली स्मारक था, जिसे हटाकर नक्सल प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। स्मारक ध्वस्त होने के बाद ग्रामीणों में खुशी और राहत का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब वे भयमुक्त जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रशासन की इस कार्रवाई को नक्सलमुक्त समाज की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड में नक्सलवाद के प्रतीक रहे अंतिम स्मारक को सोमवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में ध्वस्त कर दिया गया। गुरमाहा गांव के समीप स्थित इस स्मारक को जेसीबी मशीन की मदद से पूरी तरह जमींदोज किया गया। इस कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र में विकास की राह खुलने की उम्मीद जगी है। बरहट थाना पुलिस और एसटीएफ के जवानों ने इस अभियान को अंजाम दिया। कार्रवाई का नेतृत्व बीडीओ श्रवण कुमार पांडेय, सीओ किसलय कुमार, एसटीएफ डीएसपी और थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने संयुक्त रूप से किया। गुरमाहा गांव कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां नक्सलियों द्वारा जन अदालतें लगाई जाती थीं और मारे गए नक्सलियों की याद में यह स्मारक बनाया गया था। इस स्मारक पर समय-समय पर झंडे फहराकर सरकार को चुनौती दी जाती थी, जिसके कारण यह स्थानीय लोगों के लिए भय और आतंक का प्रतीक बन चुका था। नक्सल प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना उद्देश्य थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के निर्देश पर की गई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र का अंतिम नक्सली स्मारक था, जिसे हटाकर नक्सल प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। स्मारक ध्वस्त होने के बाद ग्रामीणों में खुशी और राहत का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब वे भयमुक्त जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रशासन की इस कार्रवाई को नक्सलमुक्त समाज की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।


