Inspirational Sports Story- ज्योति चौहान जब मैदान पर उतरती हैं तो विरोधी टीम की डिफेंस लाइन कांप उठती है। भारतीय जर्सी पहनकर उनका हर गोल देश के करोड़ों लोगों का सिर गर्व से ऊंचा कर देता है, लेकिन मैदान के बाहर उनकी जिंदगी संघर्ष, अभाव और सरकारी बेरुखी की ऐसी कहानी बयां करती है, जो खेल व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। झाबुआ जिले में इन दिनों आयोजित राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टूर्नामेंट में अपना दमखम दिखा रहीं भारतीय महिला फुटबॉल टीम की स्ट्राइकर ज्योति चौहान आज भी एक सुरक्षित छत और बेहतर जीवन की बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीत दिलाने वाली यह खिलाड़ी झाबुआ जिले के सरदारपुर में सरकारी जमीन पर बने एक छोटे से टीन शेड के मकान में परिवार के साथ रहने को मजबूर है।
मैदान में भारत की शान, घर में जिम्मेदारियों का पहाड़
ज्योति के कंधों पर सिर्फ देश के लिए गोल करने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी भी टिकी हुई है। पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं पर आ गई। मां और बहनों की देखभाल के साथ-साथ बड़ी बहन के पति के निधन के बाद उसकी दोनों बेटियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी ज्योति ही निभा रही हैं। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना, दूसरी तरफ परिवार के लिए रोज संघर्ष करना—ज्योति की जिंदगी इन दोनों मोर्चों के बीच लगातार दौड़ती रहती है।
विदेशी क्लबों में खेलकर जुटा रहीं घर खर्च
भारतीय टीम का हिस्सा होने के बावजूद ज्योति को सरकार की तरफ से कोई स्थायी आर्थिक सहायता नहीं मिल रही। घर चलाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें विदेशी क्लबों में खेलना पड़ता है। हाल ही में यूरोप के एक क्लब से खेलकर उन्होंने करीब चार लाख रुपए कमाए। इन पैसों से उन्होंने अपने जर्जर घर की मरम्मत कराई और पिता का पुराना कर्ज चुकाया। लेकिन हालात इतने कठिन हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी होने के बावजूद उन्हें सही डाइट तक नसीब नहीं हो पाती। घर में जो सामान्य भोजन बनता है, उसी से वह अपनी फिटनेस और खेल दोनों संभाल रही हैं।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में टूटा आशियाना
विडंबना यह है कि जिस खिलाड़ी को देश का गौरव बनाकर सम्मानित किया जाना चाहिए था, उसी का घर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में दो बार तोड़ा जा चुका है। स्थानीय प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने उनके मकान के आगे का हिस्सा ध्वस्त कर दिया था। ‘बेटियों को आगे बढ़ाने’ और खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने के दावों के बीच ज्योति की यह स्थिति सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
अभावों के बीच भी नहीं टूटा हौसला
आर्थिक संकट, पारिवारिक जिम्मेदारियां और असुरक्षित भविष्यज् इन सबके बावजूद ज्योति का जज्बा कमजोर नहीं पड़ा। अक्टूबर 2024 में नेपाल में आयोजित सैफ महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में भारत ने पाकिस्तान को 5-2 से हराया था। उस मुकाबले में ज्योति ने शानदार गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उनके खेल में आज भी वही जुनून नजर आता है, जो किसी बड़े सपने को सच करने के लिए जरूरी होता है।
पब्लिक वॉइस…सवाल अब भी कायम
देश के लिए गोल करने वाली यह बेटी आज भी अपने ही घर में असुरक्षा और अभावों से लड़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खिलाडिय़ों का सम्मान सिर्फ मंचों और भाषणों तक सीमित रहेगा, या फिर सिस्टम उन बेटियों तक भी पहुंचेगा जो विपरीत परिस्थितियों में भी तिरंगे का मान बढ़ा रही हैं।
देश के लिए खेलना गर्व की बात, बस थोड़ी मदद चाहिए
जब मैं देश की जर्सी पहनकर मैदान में उतरती हूं तो सिर्फ भारत की जीत नजर आती है। दुख इस बात का है कि देश के लिए सब कुछ देने के बावजूद अब तक कोई मदद नहीं मिली। मेरी सरकार से बस इतनी अपील है कि हमें रहने के लिए सुरक्षित छत और थोड़ी बुनियादी सहायता मिल जाए, ताकि मैं घरेलू चिंताओं से मुक्त होकर अपने खेल पर पूरा फोकस कर सकूं।
- ज्योति चौहान, महिला फुटबॉलर भारतीय टीम
कैबिनेट मंत्री बोलीं- हरसंभव मदद करेंगे
ज्योति चौहान प्रदेश की होनहार बेटी हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। ज्योति की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति बेहद संवेदनशील है। सरकार इस पूरे मामले की रिपोर्ट लेकर उन्हें आवास, बेहतर डाइट और खेल सुविधाओं सहित हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि भविष्य में उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
- निर्मला भूरिया, कैबिनेट मंत्री भोपाल


