कोर्ट ने कहा कि बच्चे आपके यहां पढ़ते हैं, तो जिम्मेदारी भी आपकी, ‘वेबसाइट डेवलपर का बहाना बना नियमों से नहीं बच सकते स्कूल

कोर्ट ने कहा कि बच्चे आपके यहां पढ़ते हैं, तो जिम्मेदारी भी आपकी, ‘वेबसाइट डेवलपर का बहाना बना नियमों से नहीं बच सकते स्कूल

ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगाने वाले एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल केवल फ्रेंचाइजी होने या वेबसाइट का नियंत्रण किसी दूसरी कंपनी के पास होने का बहाना बनाकर सरकारी नियमों के पालन से पीछे नहीं हट सकता । कोर्ट ने कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्री-स्कूल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें जिला कलेक्टर ग्वालियर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस और उसके बाद दर्ज हुई एफआईआर को चुनौती दी गई थी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शैक्षणिक सामग्री की मनमानी बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत सभी निजी स्कूलों को अपने यहां चलने वाली किताबों की सूची, उनके दाम और उनके विक्रेताओं का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया था। कंगारू किड्स इंटरनेशनल प्री-स्कूल (ग्वालियर) द्वारा इस नियम का पालन न करने पर प्रशासन ने 26 मार्च 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। स्कूल ने 27 मार्च को इसका जवाब दिया, लेकिन प्रशासन ने जवाब से असंतुष्ट होकर 30 मार्च 2026 को स्कूल संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता , 2023 की धारा 223 (ए) के तहत मामला । स्कूल ने इसी एफआईआर और नोटिस को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता स्कूल की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह स्कूल केवल एक फ्रेंचाइजी यूनिट है। स्कूल की अपनी कोई स्वतंत्र वेबसाइट नहीं है। पूरी वेबसाइट का संचालन और नियंत्रण ‘लाइटहाउस लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा किया जाता है। किताबों का चयन, छपाई और उनकी कीमतें भी फ्रेंचाइजी मुख्यालय ही तय करता है, इसलिए स्कूल प्रबंधन की इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं है । स्कूल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके इस स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना ही दुर्भावनापूर्ण ढंग से एफआईआर दर्ज कर दी।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते स्कूल

हाई कोर्ट ने स्कूल तर्कों को पूरी तरह से ‘अस्पष्ट, टालमटोल वाला और भ्रामक’ करार दिया। याचिकाकर्ता एक फ्रेंचाइजी के रूप में काम कर रहे हैं, वे अपने वैधानिक और नियामक दायित्वों से मुक्त नहीं हो जाते। छात्र आपके संस्थान में प्रवेश लेते हैं और सभी शैक्षणिक गतिविधियां आपके प्रशासन व देखरेख में चलती हैं। इसलिए सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी कानूनी निर्देशों के पालन से आप यह कहकर नहीं बच सकते कि वेबसाइट कोई और चलाता है।

-न्यायालय ने यह भी नोट किया कि स्कूल के जवाब से ऐसा कहीं नहीं झलकता कि उन्होंने कलेक्टर के आदेश का पालन करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हों। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक जांच की प्रक्रिया में कोई स्पष्ट अवैधता या कानून का दुरुपयोग न दिख रहा हो, तब तक अदालत धारा 226 के तहत जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *