राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीखों पर ‘सस्पेंस’, अब आया मंत्री झाबर सिंह खर्रा का लेटेस्ट बयान

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीखों पर ‘सस्पेंस’, अब आया मंत्री झाबर सिंह खर्रा का लेटेस्ट बयान

राजस्थान में लंबे समय से अटके पड़े पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) के चुनावों को लेकर प्रदेश की जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधि बेसब्री से तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। इस बड़े चुनावी सस्पेंस के बीच राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) तथा स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा का एक ताजा बयान सामने आया है। राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कैबिनेट मंत्री खर्रा ने चुनाव संचालन को लेकर राज्य सरकार की प्रशासनिक तैयारियों और मंशा को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

झाबर सिंह खर्रा ने मीडिया के समक्ष पूरी जिम्मेदारी के साथ दोहराया कि राजस्थान में स्थानीय स्तर के चुनाव करवाना पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का अपना स्वतंत्र और संवैधानिक अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के स्तर पर जो भी कानूनी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां थीं, जैसे कि विभिन्न वार्डों का नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) करना, सीमाओं का पुनर्सीमांकन करना और अन्य विधिक औपचारिकताएं निभाना, वे सभी प्रक्रियाएं सरकार द्वारा समय रहते पूरी की जा चुकी हैं। अब यह पूरी तरह से आयोग के विवेक पर निर्भर करता है कि वह मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कब करता है और चुनाव के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा किस तिथि को करता है।

‘सरकार तैयार, चुनाव की गेंद आयोग के पाले में’

कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राज्य निर्वाचन आयोग को सरकार की तरफ से पूर्ण सहयोग दिए जाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत समय पर पारदर्शी चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग का सर्वोच्च अधिकार और दायित्व है। इस संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सरकार से जो भी प्रशासनिक या व्यावहारिक सहयोग मांगा जाएगा, उसे सरकार पूरी तरह से समयबद्ध तरीके से और बिना किसी देरी के उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि चुनाव संपन्न कराने के लिए चाहे संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता मामला हो, भारी-भरकम चुनावी खर्च के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की त्वरित जरूरत हो या फिर धरातल पर मतदान दल तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग हो; राज्य सरकार हर एक मोर्चे पर अपनी तैयारियां पहले ही मुकम्मल कर चुकी है। सरकार की मंशा में कोई खोट नहीं है और वह चुनाव टालने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।

चाहें तो कल ही करवा लें चुनाव

मीडिया से बातचीत करते हुए स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सरकार के आत्मविश्वास को प्रदर्शित करते हुए एक बड़ा बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय ने भले ही 31 जुलाई तक की समय सीमा निर्धारित की है, लेकिन यदि राज्य निर्वाचन आयोग प्रशासनिक रूप से कल सुबह ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने और मतदान कराने का ऐतिहासिक फैसला ले लेता है, तो भी राजस्थान की मौजूदा राज्य सरकार उस चुनौती को सहर्ष स्वीकार करने और चुनाव मैदान में उतरने के लिए चौबीसों घंटे तैयार बैठी है।

खर्रा के इस आक्रामक और स्पष्ट बयान से यह साफ संकेत मिलते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार इन स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है। सरकार को लगता है कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संगठन जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत स्थिति में है, इसलिए सरकार चुनाव में किसी भी प्रकार की देरी नहीं चाहती और पूरा दारोमदार अब निर्वाचन आयोग के अंतिम निर्णय पर टिका हुआ है।

31 जुलाई तक हर हाल में कराने होंगे चुनाव

Election Commission stern warning If Rajasthan Panchayat Local Body Elections are not held by 15 April government responsible for contempt
फाइल फोटो – AI

गौरतलब है कि राजस्थान में स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के चुनावों में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर माननीय राजस्थान हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र और लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने आदेश में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया था कि प्रदेश में जहां-जहां भी स्थानीय चुनाव लंबित हैं, उन्हें आगामी 31 जुलाई तक हर हाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न करवा लिया जाए।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद से ही सचिवालय से लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर तक बैठकों का दौर लगातार जारी है। चूंकि अदालत द्वारा तय की गई 31 जुलाई की समय सीमा नजदीक आ रही है, इसलिए आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर मतदान की वास्तविक तारीखों का ऐलान कब किया जाएगा। मंत्री झाबर सिंह खर्रा का यह ताजा बयान इसी न्यायिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक समय सीमा के संदर्भ में बेहद मायने रखता है।

अब आचार संहिता का इंतजार

Rajasthan Panchayat Nikai Chunav High Court Dismisses Contempt Petition Deadline 31 July
Rajasthan CM Bhajan Lal and High Court – File PIC

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव से पहले सबसे जटिल और विवादित कार्य विभिन्न वार्डों की सीमाओं का निर्धारण और आरक्षण लॉटरी निकालना होता है। कई बार विपक्षी दलों द्वारा परिसीमन की प्रक्रिया में राजनैतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। इन सभी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने बिना किसी राजनैतिक भेदभाव के, पूरी तरह से पारदर्शी और विधिक नियमों के दायरे में रहकर परिसीमन और पुनर्सीमांकन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा परिसीमन की अंतिम रिपोर्ट तैयार करके राज्य निर्वाचन आयोग को काफी पहले ही सुपुर्द की जा चुकी है। अब तकनीकी रूप से केवल आयोग के स्तर पर मतदाता सूचियों (Voter Lists) का अंतिम वार्ड-वाइज प्रकाशन किया जाना शेष है। जैसे ही आयोग इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगा, राजस्थान में स्थानीय चुनाव की तारीखों का बिगुल फूंक दिया जाएगा और पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो जाएगी।

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