बजरी की आड़ में ‘लाल सोने’ की तस्करी का अंदेशा: खान निदेशालय ने दिए बजरी लीजों में गारनेट की जांच के आदेश

बजरी की आड़ में ‘लाल सोने’ की तस्करी का अंदेशा: खान निदेशालय ने दिए बजरी लीजों में गारनेट की जांच के आदेश

प्रदेश में बजरी खनन की आड़ में बहुमूल्य खनिज गारनेट की तस्करी की आशंका के चलते राज्य सरकार हरकत में आई है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से 18 अप्रेल को ली गई समीक्षा बैठक के बाद खान निदेशालय ने कड़े कदम उठाए हैं। खान निदेशक एमपी मीणा ने एक आदेश जारी कर प्रदेश के चार जिलों भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और जयपुर में चल रही बजरी की लीजों में गारनेट की सघन जांच के आदेश दिए हैं।

इस आदेश के पीछे मुख्यालय का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि कहीं बजरी माफिया, बजरी के साथ-साथ बेशकीमती गारनेट को निकालकर अवैध रूप से बाजार में तो नहीं खपा रहे हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि बजरी लीज क्षेत्र में गारनेट पाया जाता है, तो उसे भी खनन पट्टे में सम्मिलित करने के प्रस्ताव तुरंत भिजवाए जाएं।

यहां बिछा है अवैध खनन का जाल

विभागीय आदेश भले ही केवल स्वीकृत बजरी लीजों की जांच तक सीमित हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। भीलवाड़ा जिले में गारनेट का मुख्य भंडार बरसाती नालों और कुछ विशिष्ट इलाकों में छिपा है। जिले में प्रमुख रूप से यह गारनेट कोटड़ी, जहाजपुर, कोचरिया के अलावा कोटड़ी क्षेत्र के बरसाती नालों में बहुतायत से पाया जाता है। जहां गारनेट की लीज है वहां से बरसाती पानी के साथ बहकर नाले में आता है, वही कुछ ऐसे स्थान है जहां गारनेट है, लेकिन खान विभाग को इसकी जानकारी नहीं है।

खदानों के बीच से बह रहे नालों में ‘बड़ाखेल’

असली खेल स्वीकृत लीजों के बाहर चल रहा है। जिले में एक खदान तो ऐसी है जिसके ठीक बीच से एक बरसाती नाला गुजर रहा है। इस नाले से निकलने वाले उच्च गुणवत्ता के गारनेट को लंबे समय से अवैध रूप से निकाला और बेचा जा रहा है। माफिया इस लाल सोने को कौड़ियों के भाव निकालकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

पत्रिका का सवाल: लीज की जांच काफी है या अवैध ठिकानों का हो सर्वे?

खान निदेशालय ने अधीक्षक खनि अभियंता और सहायक खनि अभियंताओं को बजरी लीजों की जांच का फरमान तो थमा दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जो गारनेट बरसाती नालों और अवैध ठिकानों से निकाला जा रहा है, उसकी रोकथाम कैसे होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि खान निदेशालय को केवल बजरी की लीजों की जांच करने के बजाय, उन स्थानों का भौतिक सर्वे कराना चाहिए जहां से अवैध रूप से गारनेट निकाला जा रहा है। अगर विभाग बरसाती नालों और अवैध खनन वाले स्थानों का निष्पक्ष सर्वे कराए, तो गारनेट तस्करी की बहुत बड़ी सच्चाई सामने आ सकती है और राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का फायदा हो सकता है। उधर भीलवाड़ा जिले की 4 बजरी लीजों की जांच के मामले में अधीक्षण खनिज अभियंता भीलवाड़ा ओपी काबरा ने जांच कराने से इंकार किया है।

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