Sushasan Tihar: पूर्व नक्सली दंपती की कहानी सुन भावुक हुए CM, दुकान से खरीदी पानी की बोतल, बढ़ाया हौसला

Sushasan Tihar: पूर्व नक्सली दंपती की कहानी सुन भावुक हुए CM, दुकान से खरीदी पानी की बोतल, बढ़ाया हौसला

रायपुर@राहुल जैन. Sushasan Tihar: बस्तर में बदलाव की नई बयार का नजारा मंगलवार को सुशासन तिहार के दौरान देखने को मिला। दरअसल, मुख्यमंत्री बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। वे चौपाल के लिए जा रहे थे, लेकिन काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। यह दुकान आत्मसमर्पित दंपती मासा तामो और जयमोती की थी।

बंदूक थामने वाला दंपती आज चाय दुकान चलाकर सम्मान से अपना जीवन यापन कर रहा है। यहां मुख्यमंत्री ने दोनों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।

बंदूक से रोजगार तक का सफर

मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया।

लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। अक्टूबर 2025 में उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। दोनों के संघर्ष की कहानी सुनकर सीएम भावुक हो गए।

बदलते बस्तर की कहानी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मासा और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर, विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है।

मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि जीवन में ऐसा बदलाव आएगा, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है।

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