Stock Market: सेंसेक्स में 533 अंकों की भारी गिरावट, निफ्टी भी बेहाल, इन शेयरों में हो रही जबरदस्त बिकवाली

Stock Market: सेंसेक्स में 533 अंकों की भारी गिरावट,  निफ्टी भी बेहाल, इन शेयरों में हो रही जबरदस्त बिकवाली

Indian Stock Market: शेयर बाजार गुरुवार को भी गिरावट के साथ खुला। भारतीय बाजारों के साथ वैश्विक बाजारों में भी गिरावट का दौर दिखाई दिया। ईरान और अमेरिका की बातचीत रुकने और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना इसका सबसे बड़ा कारण है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक बाजारों में रिस्क टेकिंग कम हो गई है। इसी का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गुरुवार को सेंसेक्स 0.68 फीसदी की गिरावट के साथ और निफ्टी 0.72 फीसदी गिरावट के साथ खुला।

बाजार का गिरावट भरा प्रदर्शन

सेंसेक्स शुरुआत में 533 अंक की गिरावट के साथ खुलकर 77,983 के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही निफ्टी फिफ्टी भी 176 अंकों की गिरावट के साथ 24,202 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स 757 अंकों की गिरावट के साथ 78,516 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 199 अंकों की गिरावट के साथ 24,378 के स्तर पर बंद हुआ।

बैंक निफ्टी में दिखी बिकवाली

गुरुवार को निफ्टी बैंक इंडेक्स में गिरावट जारी है। बैंक इंडेक्स में 1 फीसदी की गिरावट रही। सबसे ज्यादा नुकसान देने वाले शेयर में आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक के शेयर है। इन सभी में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। इसके साथ ही सेंसेक्स पैक के शुरुआती 30 शेयरों में से ज्यादातर लाल निशान पर ट्रेंड कर रहे हैं।

दुनियाभर के बाजारों में रहा गिरावट का माहौल

भारतीय बाजारों के साथ ही एशिया के बाजारों में गिरावट का दौर देखने को मिला है। साउथ कोरिया, जापान और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों में गिरावट आई। कोस्पी में 1.56 फीसद, निक्केई में 1.4 फीसदी और हैंगसेंग में 0.9 फीसदी की गिरावट आई। इसके साथ ही यूरोप के बाजार Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 1.1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।

कच्चे तेल ने लगाई छलांग

बाजार में गिरावट का सबसे अहम कारण कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और उसकी लगातार मांग है। कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड पर कच्चा तेल 1.1 फीसदी बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इस साल क्रूड अब तक 70 फीसदी तक बढ़ चुका है, जिसमें ज्यादातर बढ़त मिडिल ईस्ट में शुरु हुए युद्ध के बाद आई है।

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