लखनऊ में गौरैया संस्कृति संस्थान की लोकसंगीत कार्यशाला का सातवां दिन लोकधुनों और पारंपरिक गीतों से सराबोर रहा। कार्यशाला में महिलाओं और युवतियों ने पूरे उत्साह के साथ लोकगीतों की बारीकियां सीखीं। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। आकाशवाणी की ए ग्रेड कलाकार रंजना मिश्रा ने प्रतिभागियों को राम भजन “राम जय राम”, विवाह गीत “बेरिया की बेरि तुही बरजेहु बाबा”, पचरा गीत “सुमिरिला सरदा भवानी पत राखा महारानी” और “रटन लागी जिभिया” जैसे पारंपरिक गीत सिखाए। जेठ के मंगल के अवसर पर हनुमान भजन भी प्रशिक्षण का हिस्सा रहा। गीतों की प्रस्तुति के दौरान माहौल पूरी तरह भक्तिमय और लोकसंस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। पारंपरिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा रंजना मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला में विवाह गीत, बधाई गीत, दादरा, पचरा, सोहर, नकटा, सरिया और लोक भजन जैसी पारंपरिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 11 ऐसे गीत सिखाए जाएंगे, जो अलग-अलग सामाजिक और पारिवारिक अवसरों से जुड़े हैं। इससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों और लोकसंस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। ढोलक पर विशाल मिश्रा और हारमोनियम पर शंकर दूबे ने संगत कर कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया। कार्यशाला में लोकसंगीत सीखने वालों का उत्साह देखते ही बन रहा था। संस्था की ओर से बताया गया कि जो लोग लोकगीत और पारंपरिक संगीत सीखना चाहते हैं, वे संपर्क कर कार्यशाला से जुड़ सकते हैं। ये रहीं मौजूद कार्यशाला में सुनीता चौरसिया, रीना सिंह, कुमकुम मिश्रा, अल्पना श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा रस्तोगी, रंजना सिंह, रमा सिंह, आशा तिवारी, सुषमा सक्सेना, नवनीता जफा, अनुराधा गुप्ता, अमिता द्विवेदी, भावना शुक्ला, आभा मिश्रा, आभा शुक्ला, सुनीता निगम और रेनुका त्रिपाठी समेत कई महिलाएं शामिल रहीं।


