राजगीर मलमास मेला में आज होगा दूसरा शाही स्नान:2 लाख श्रद्धालुओं पहुंचेंगे, 11 छावनियों के 500 साधु-संतों का निकलेगा जुलूस

राजगीर मलमास मेला में आज होगा दूसरा शाही स्नान:2 लाख श्रद्धालुओं पहुंचेंगे, 11 छावनियों के 500 साधु-संतों का निकलेगा जुलूस

ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर में चल रहे विश्व प्रसिद्ध मलमास (पुरुषोत्तम मास) मेले में आज साधु-संतों का दूसरा शाही स्नान पूरी भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न होगा। दूसरे शाही स्नान में करीब 2 लाख से ज्यादा साधु, संत और आम श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। साथ ही 11 छावनियों के 500 साधु-संतों का जुलूस निकलेगा। 17 मई से 15 जून तक चलने वाले इस महाआयोजन के सबसे प्रमुख आकर्षण ‘दूसरे शाही स्नान’ को लेकर अनुमंडल प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। देशभर से आए विभिन्न अखाड़ों, छावनियों और मठों के साधु-संत आज गाजे-बाजे और अपनी पारंपरिक शैली में पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। शाही स्नान के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। स्नान का रूट और समय निर्धारित प्रशासन की ओर से शाही स्नान को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी अखाड़ों और छावनियों का समय व रूट चार्ट पहले ही निर्धारित कर दिया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार, स्नान की विधिवत शुरुआत आज सुबह 6:30 बजे से खाक चौक ठाकुरबाड़ी और उससे जुड़ी 11 अन्य छावनियों के लगभग 500 साधु-संतों के जुलूस के साथ होगी। इनका जत्था ठाकुरबाड़ी से निकलकर नारद कुंड, सूर्य कुंड, सरस्वती कुंड, सप्तधारा कुंड और मुख्य ब्रह्मकुंड होते हुए वैतरणी कुंड तक जाएगा। इसके बाद सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच उदासीन सम्प्रदाय (बड़ी संगत), कबीर आश्रम, अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा, झुनकी बाबा मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ और कैलाश आश्रम सहित दर्जनों अन्य मठों के संत स्नान करेंगे। मार्गों पर भीड़ का किसी भी प्रकार का टकराव न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर शाही स्नान के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले, इसके लिए एक मजबूत सुरक्षा खाका तैयार किया गया है। प्रत्येक अखाड़े और आश्रम के जत्थे के साथ एक प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस और मेडिकल टीम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, जबकि अग्निशमन विभाग दमकल गाड़ी के साथ तैयार रहेगा। पारदर्शिता और सुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रमुख स्थानों और मार्गों की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। साथ ही, आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण नियमों का कड़ाई से पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है। मलमास में व्रत न करने की धारणा पूरी तरह भ्रामक मेले के इस आध्यात्मिक माहौल के बीच अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा से जुड़े और राजगीर कुंड के तीर्थ पुरोहित पंडित प्रमेन्द्र उपाध्याय ने इस पवित्र महीने के धार्मिक महत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में अधिकमास को ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा गया है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। पंडित उपाध्याय ने समाज में फैली इस भ्रांति का पूरी तरह खंडन किया कि अधिकमास में कोई व्रत या उपवास नहीं रखा जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा सोचना बिल्कुल शास्त्रसम्मत नहीं है, क्योंकि इसी महीने में पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी जैसी अत्यंत पुण्यदायी तिथियां आती हैं। इस पवित्र महीने में व्रत, जप, तप, दान, कथा और भजन करने से श्रद्धालुओं को कई गुना विशेष फल की प्राप्ति होती है। ‘मुहूर्त चिन्तामणि’ के अनुसार इन काम की है सख्त मनाही प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ ‘मुहूर्त चिन्तामणि’ का हवाला देते हुए पंडित उपाध्याय ने बताया कि मलमास में आध्यात्मिक काम का महत्व भले ही बढ़ जाता है, लेकिन सांसारिक और मांगलिक कार्य इस दौरान पूरी तरह वर्जित माने गए हैं। इस अवधि में नए कुएं, बावली, तालाब, उपवन और भवन का निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा और गृहप्रवेश करना पूरी तरह वर्जित है। इसके साथ ही विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, नए व्रतों का आरंभ या उद्यापन, देवता की नई प्राण-प्रतिष्ठा, नया तीर्थगमन, संन्यास ग्रहण करना, यात्रा और राज्याभिषेक जैसे काम भी निषिद्ध माने गए हैं। तीर्थ पुरोहित ने देशभर से आ रहे श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पुरुषोत्तम मास में भौतिक और सांसारिक आयोजनों से परहेज करें और अपना पूरा समय भगवान शिव व श्रीहरि विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति में लगाएं। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर में चल रहे विश्व प्रसिद्ध मलमास (पुरुषोत्तम मास) मेले में आज साधु-संतों का दूसरा शाही स्नान पूरी भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न होगा। दूसरे शाही स्नान में करीब 2 लाख से ज्यादा साधु, संत और आम श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। साथ ही 11 छावनियों के 500 साधु-संतों का जुलूस निकलेगा। 17 मई से 15 जून तक चलने वाले इस महाआयोजन के सबसे प्रमुख आकर्षण ‘दूसरे शाही स्नान’ को लेकर अनुमंडल प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। देशभर से आए विभिन्न अखाड़ों, छावनियों और मठों के साधु-संत आज गाजे-बाजे और अपनी पारंपरिक शैली में पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। शाही स्नान के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। स्नान का रूट और समय निर्धारित प्रशासन की ओर से शाही स्नान को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी अखाड़ों और छावनियों का समय व रूट चार्ट पहले ही निर्धारित कर दिया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार, स्नान की विधिवत शुरुआत आज सुबह 6:30 बजे से खाक चौक ठाकुरबाड़ी और उससे जुड़ी 11 अन्य छावनियों के लगभग 500 साधु-संतों के जुलूस के साथ होगी। इनका जत्था ठाकुरबाड़ी से निकलकर नारद कुंड, सूर्य कुंड, सरस्वती कुंड, सप्तधारा कुंड और मुख्य ब्रह्मकुंड होते हुए वैतरणी कुंड तक जाएगा। इसके बाद सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच उदासीन सम्प्रदाय (बड़ी संगत), कबीर आश्रम, अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा, झुनकी बाबा मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ और कैलाश आश्रम सहित दर्जनों अन्य मठों के संत स्नान करेंगे। मार्गों पर भीड़ का किसी भी प्रकार का टकराव न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर शाही स्नान के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले, इसके लिए एक मजबूत सुरक्षा खाका तैयार किया गया है। प्रत्येक अखाड़े और आश्रम के जत्थे के साथ एक प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस और मेडिकल टीम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, जबकि अग्निशमन विभाग दमकल गाड़ी के साथ तैयार रहेगा। पारदर्शिता और सुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रमुख स्थानों और मार्गों की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। साथ ही, आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण नियमों का कड़ाई से पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है। मलमास में व्रत न करने की धारणा पूरी तरह भ्रामक मेले के इस आध्यात्मिक माहौल के बीच अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा से जुड़े और राजगीर कुंड के तीर्थ पुरोहित पंडित प्रमेन्द्र उपाध्याय ने इस पवित्र महीने के धार्मिक महत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में अधिकमास को ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा गया है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। पंडित उपाध्याय ने समाज में फैली इस भ्रांति का पूरी तरह खंडन किया कि अधिकमास में कोई व्रत या उपवास नहीं रखा जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा सोचना बिल्कुल शास्त्रसम्मत नहीं है, क्योंकि इसी महीने में पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी जैसी अत्यंत पुण्यदायी तिथियां आती हैं। इस पवित्र महीने में व्रत, जप, तप, दान, कथा और भजन करने से श्रद्धालुओं को कई गुना विशेष फल की प्राप्ति होती है। ‘मुहूर्त चिन्तामणि’ के अनुसार इन काम की है सख्त मनाही प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ ‘मुहूर्त चिन्तामणि’ का हवाला देते हुए पंडित उपाध्याय ने बताया कि मलमास में आध्यात्मिक काम का महत्व भले ही बढ़ जाता है, लेकिन सांसारिक और मांगलिक कार्य इस दौरान पूरी तरह वर्जित माने गए हैं। इस अवधि में नए कुएं, बावली, तालाब, उपवन और भवन का निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा और गृहप्रवेश करना पूरी तरह वर्जित है। इसके साथ ही विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, नए व्रतों का आरंभ या उद्यापन, देवता की नई प्राण-प्रतिष्ठा, नया तीर्थगमन, संन्यास ग्रहण करना, यात्रा और राज्याभिषेक जैसे काम भी निषिद्ध माने गए हैं। तीर्थ पुरोहित ने देशभर से आ रहे श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पुरुषोत्तम मास में भौतिक और सांसारिक आयोजनों से परहेज करें और अपना पूरा समय भगवान शिव व श्रीहरि विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति में लगाएं।  

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