2.5 करोड़ की कारें, 61 प्लॉट और 5 कंपनियां:16 महीने में 13 बार विदेश गया, अफसरों का पैसा खपाया, टेंडर माफिया ‘रिशु श्री’ की डार्क स्टोरी

2.5 करोड़ की कारें, 61 प्लॉट और 5 कंपनियां:16 महीने में 13 बार विदेश गया, अफसरों का पैसा खपाया, टेंडर माफिया ‘रिशु श्री’ की डार्क स्टोरी

रिशु श्री….दवा का रिटेल कारोबार करने वाले विनोद कुमार का बेटा है। मूल रूप से खगड़िया का रहने वाला। 2012 में पटना NIT से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इस वक्त तक आमदनी का जरिया सिर्फ पिता का दवा कारोबार था। मगर अगले 13 सालों में रिशु ने तरक्की की ऐसी ‘लग्जरी’ इबारत लिखी, जिसकी कल्पना भी कोई आम इंसान नहीं कर सकता। शून्य से शुरू हुआ यह सफर पटना के मीठापुर स्थित कामता राम सखी इन्क्लेव के उस आलीशान फ्लैट तक जा पहुंचा, जहां सुख-सुविधा का वह हर साजो-सामान था जो किसी रईस की जिंदगी में होता है। रिशु को लग्जरी और स्पोर्ट्स गाड़ियों का इस कदर शौक चढ़ा कि वह BMW, BMW R-19, डिस्कवरी स्पोर्ट्स और पोर्श मैकान जैसी करीब ढाई करोड़ से अधिक कीमत की गाड़ियों का मालिक बन बैठा। पटना और हाजीपुर में दो बड़े पेट्रोल पंप खुल गए। यह सब सामने तब आया, जब 27 मई को स्पेशल विजिलेंस युनिट (SVU) ने पटना में इसके फ्लैट पर छापेमारी की थी। उस दरम्यान जांच एजेंसी के हाथ अलग-अलग शहरों में लिए गए जमीन के 61 डीड मिले। जिसकी डिल करोड़ों में है। साथ ही सवा दो करोड़ रुपए की सोने-चांदी और डायमंड की ज्वेलरी व 2.50 लाख रुपए कैश SVU ने बरामद किया था। रिशु के इस चकाचौंध भरी लाइफ के पीछे छिपा है बिहार के सरकारी विभागों में फैला भ्रष्टाचार का एक ऐसा कॉकटेल, जिसने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। संडे बिग स्टोरी में कहानी उसी रिशु श्री की… गुजरात की कंपनी से ‘मास्टर प्लान’ की शुरुआत 2012 में बीटेक पूरा करने के बाद 2013 में रिशु को पानी की टंकी और कूड़ेदान बनाने वाली गुजरात की एक कंपनी में नौकरी मिली। यह कंपनी उस वक्त बिहार के नगर विकास और आवास विभाग के तहत बुडको (BUIDCO) के लिए पटना में काम कर रही थी। नौकरी करते-करते रिशु का शातिर दिमाग यह भांप गया कि सरकारी सिस्टम से पैसा कैसे ऐंठा जाता है। उसे समझ आ गया था कि किस अधिकारी और कर्मचारी को कैसे साधना है। उसने टेंडर मैनेज करने का पूरा खेल सीख लिया और फिर नौकरी छोड़ खुद ‘खिलाड़ी’ बन गया। उसने एक-एक कर कुल 5 कंपनियां खड़ी कर दीं… IAS संजीव हंस से ‘सेटिंग’ और ले लिया 12 टेंडर रिशु की भूख बढ़ चुकी थी। नगर विकास विभाग के बाद उसने जल संसाधन विभाग का रुख किया, जहां तत्कालीन सचिव और IAS अधिकारी संजीव हंस से उसकी नजदीकियां बढ़ीं। यह नजदीकी कमिशनखोरी की बुनियाद पर एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) के मुताबिक, रिशु ने अकेले जल संसाधन विभाग से सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट और बायो रेमेडिएशन के करोड़ों रुपये के 12 टेंडर हथिया लिए। रिशु की कमाई का फॉर्मूला बेहद शातिराना था। वह 3 तरीकों पर काम करता था… इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब दिखा जब रिशु ने IAS संजीव हंस के जरिए गुजरात की कंपनी ‘मेसर्स सेवरॉक्स कंस्ट्रक्शन’ को सुपौल के बीरपुर में 125 करोड़ का ‘फिजिकल मॉडलिंग सेंटर’ का टेंडर दिलवाया। खुद 3% कमिशन लिया, संजीव हंस को मोटी रकम दिलवाई और फिर गेम पलटकर अपने स्टाफ संतोष के नाम वाली कंपनी ‘मेसर्स मातृत्व कंस्ट्रक्शन’ को उसी काम का पेटी कांट्रैक्ट दिलवा दिया। 3 प्रतिशत पर इंजीनियर्स को करता था सेट नगर विकास विभाग, बुडको, जल संसाधान विभाग के साथ इसने भवन निर्माण विभाग के अंदर भी गहरी पैठ बनाई थी। इन विभागों के इंजीनियर्स भी इसकी बड़ी मदद करते थे। पर मदद करने का काम वो फ्री में नहीं करते थे। इसके एवज में इंजीनियर्स भी कमिशन लेते थे। रिशु उन्हें हर एक टेंडर की बजट का 3 प्रतिशत कमिशन दिया करता था। SVU की मानें तो उसने इस बात को खुद ED की हुई पूछताछ में कबूल किया था। 16 महीने में 13 विदेश यात्रा रिशु ने मात्र 16 महीने में 13 बार विदेश यात्रा की है। उसकी यह यात्रा सितंबर 2021 से दिसंबर 2022 के बीच की है। जांच एजेंसी को आशंका है कि रिशु ने यह यात्रा विदेश में काली कमाई खपाने के लिए की है। इसमें बिहार के टॉप अफसरों का पैसा भी शामिल है। यौन शोषण केस से खुला ‘काली कमाई’ का राज रिशु श्री के इस साम्राज्य के ढहने की कहानी बेहद फिल्मी है। साल 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में एक महिला ने पूर्व विधायक गुलाब यादव और IAS संजीव हंस पर शादी के नाम पर यौन शोषण करने का आरोप लगाते हुए FIR (18/23) दर्ज कराई। यहीं से पता चला टेंडर के मैनेज का खेल ED की टीम अलग-अलग तारीखों पर बुलाकर रिशु श्री से अब तक 8 बार पूछताछ कर चुकी है। इसी क्रम में बिहार के सरकारी विभागों के अंदर IAS अधिकारियों, इंजीनियर्स और कुछ खास कर्मचारियों के साथ मिलकर टेंडर को मैनेज करने का खेल पता चला। जांच एजेंसी के मुताबिक, संजीव हंस को रुपए संतोष के माध्यम से दिए गए हैं। पहली बार 67 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया था। 28 जनवरी 2025 को ED ने रिशु श्री के घर पर छापेमारी की थी। उस वक्त इसके पास से करीब डेढ़ करोड़ की ज्वेलरी और 51 लाख रुपया कैश बरामद किया गया था। रिशु के लिए पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था इस खेल में सिर्फ रिशु और संजीव हंस ही नहीं थे, बल्कि पूरा एक सिंडिकेट काम कर रहा था। ED और SVU की जांच में जो खुलासे हुए, उन्होंने बिहार प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया। SVU में दर्ज हैं दो केस ED से इनपुट मिलने के बाद भ्रष्टाचार और सरकारी टेंडर में हेरफेर कर सरकार को नुकसान पहुंचाने के मामले में SVU ने एक साल के अंतराल में दो केस दर्ज किए। पहला केस 2024 में 5/2024 दर्ज हुआ। जिसमें IAS संजीव हंस, पूर्व विधायक गुलाब यादव और रिशु श्री समेत 10 लोगों को नामजद किया गया। ठीक एक साल बाद 2025 में दूसरा केस 5/2025 दर्ज किया गया। इसमें IAS संजीव हंस और रिशु श्री समेत कुल 4 लोगों को नामजद किया गया। इसी केस के तहत 27 मई को SVU की टीम ने रिशु के घर छापेमारी भी की और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। अब इसमें आगे क्या होगा? सवाल-कार्रवाई में देरी क्यों? रिशु श्री की गिरफ्तारी से इसके साथ कनेक्शन में रहने वाले राजनेताओं और अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। सबको डर सता रहा है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में कहीं वो उनका नाम न ले ले। क्योंकि, SVU ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि सबूतों के आधार पर उनकी जांच आगे बढ़ेगी और कार्रवाई भी होगी। पर एक महत्वपूर्ण सवाल अब यह उठ रहा है कि रिशु के खिलाफ कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्योंकि, देर होने से रिशु और इससे जुड़े लोगों को केस के महत्वपूर्ण सबूत नष्ट करने का पूरा वक्त मिल गया। रिशु श्री….दवा का रिटेल कारोबार करने वाले विनोद कुमार का बेटा है। मूल रूप से खगड़िया का रहने वाला। 2012 में पटना NIT से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इस वक्त तक आमदनी का जरिया सिर्फ पिता का दवा कारोबार था। मगर अगले 13 सालों में रिशु ने तरक्की की ऐसी ‘लग्जरी’ इबारत लिखी, जिसकी कल्पना भी कोई आम इंसान नहीं कर सकता। शून्य से शुरू हुआ यह सफर पटना के मीठापुर स्थित कामता राम सखी इन्क्लेव के उस आलीशान फ्लैट तक जा पहुंचा, जहां सुख-सुविधा का वह हर साजो-सामान था जो किसी रईस की जिंदगी में होता है। रिशु को लग्जरी और स्पोर्ट्स गाड़ियों का इस कदर शौक चढ़ा कि वह BMW, BMW R-19, डिस्कवरी स्पोर्ट्स और पोर्श मैकान जैसी करीब ढाई करोड़ से अधिक कीमत की गाड़ियों का मालिक बन बैठा। पटना और हाजीपुर में दो बड़े पेट्रोल पंप खुल गए। यह सब सामने तब आया, जब 27 मई को स्पेशल विजिलेंस युनिट (SVU) ने पटना में इसके फ्लैट पर छापेमारी की थी। उस दरम्यान जांच एजेंसी के हाथ अलग-अलग शहरों में लिए गए जमीन के 61 डीड मिले। जिसकी डिल करोड़ों में है। साथ ही सवा दो करोड़ रुपए की सोने-चांदी और डायमंड की ज्वेलरी व 2.50 लाख रुपए कैश SVU ने बरामद किया था। रिशु के इस चकाचौंध भरी लाइफ के पीछे छिपा है बिहार के सरकारी विभागों में फैला भ्रष्टाचार का एक ऐसा कॉकटेल, जिसने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। संडे बिग स्टोरी में कहानी उसी रिशु श्री की… गुजरात की कंपनी से ‘मास्टर प्लान’ की शुरुआत 2012 में बीटेक पूरा करने के बाद 2013 में रिशु को पानी की टंकी और कूड़ेदान बनाने वाली गुजरात की एक कंपनी में नौकरी मिली। यह कंपनी उस वक्त बिहार के नगर विकास और आवास विभाग के तहत बुडको (BUIDCO) के लिए पटना में काम कर रही थी। नौकरी करते-करते रिशु का शातिर दिमाग यह भांप गया कि सरकारी सिस्टम से पैसा कैसे ऐंठा जाता है। उसे समझ आ गया था कि किस अधिकारी और कर्मचारी को कैसे साधना है। उसने टेंडर मैनेज करने का पूरा खेल सीख लिया और फिर नौकरी छोड़ खुद ‘खिलाड़ी’ बन गया। उसने एक-एक कर कुल 5 कंपनियां खड़ी कर दीं… IAS संजीव हंस से ‘सेटिंग’ और ले लिया 12 टेंडर रिशु की भूख बढ़ चुकी थी। नगर विकास विभाग के बाद उसने जल संसाधन विभाग का रुख किया, जहां तत्कालीन सचिव और IAS अधिकारी संजीव हंस से उसकी नजदीकियां बढ़ीं। यह नजदीकी कमिशनखोरी की बुनियाद पर एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) के मुताबिक, रिशु ने अकेले जल संसाधन विभाग से सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट और बायो रेमेडिएशन के करोड़ों रुपये के 12 टेंडर हथिया लिए। रिशु की कमाई का फॉर्मूला बेहद शातिराना था। वह 3 तरीकों पर काम करता था… इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब दिखा जब रिशु ने IAS संजीव हंस के जरिए गुजरात की कंपनी ‘मेसर्स सेवरॉक्स कंस्ट्रक्शन’ को सुपौल के बीरपुर में 125 करोड़ का ‘फिजिकल मॉडलिंग सेंटर’ का टेंडर दिलवाया। खुद 3% कमिशन लिया, संजीव हंस को मोटी रकम दिलवाई और फिर गेम पलटकर अपने स्टाफ संतोष के नाम वाली कंपनी ‘मेसर्स मातृत्व कंस्ट्रक्शन’ को उसी काम का पेटी कांट्रैक्ट दिलवा दिया। 3 प्रतिशत पर इंजीनियर्स को करता था सेट नगर विकास विभाग, बुडको, जल संसाधान विभाग के साथ इसने भवन निर्माण विभाग के अंदर भी गहरी पैठ बनाई थी। इन विभागों के इंजीनियर्स भी इसकी बड़ी मदद करते थे। पर मदद करने का काम वो फ्री में नहीं करते थे। इसके एवज में इंजीनियर्स भी कमिशन लेते थे। रिशु उन्हें हर एक टेंडर की बजट का 3 प्रतिशत कमिशन दिया करता था। SVU की मानें तो उसने इस बात को खुद ED की हुई पूछताछ में कबूल किया था। 16 महीने में 13 विदेश यात्रा रिशु ने मात्र 16 महीने में 13 बार विदेश यात्रा की है। उसकी यह यात्रा सितंबर 2021 से दिसंबर 2022 के बीच की है। जांच एजेंसी को आशंका है कि रिशु ने यह यात्रा विदेश में काली कमाई खपाने के लिए की है। इसमें बिहार के टॉप अफसरों का पैसा भी शामिल है। यौन शोषण केस से खुला ‘काली कमाई’ का राज रिशु श्री के इस साम्राज्य के ढहने की कहानी बेहद फिल्मी है। साल 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में एक महिला ने पूर्व विधायक गुलाब यादव और IAS संजीव हंस पर शादी के नाम पर यौन शोषण करने का आरोप लगाते हुए FIR (18/23) दर्ज कराई। यहीं से पता चला टेंडर के मैनेज का खेल ED की टीम अलग-अलग तारीखों पर बुलाकर रिशु श्री से अब तक 8 बार पूछताछ कर चुकी है। इसी क्रम में बिहार के सरकारी विभागों के अंदर IAS अधिकारियों, इंजीनियर्स और कुछ खास कर्मचारियों के साथ मिलकर टेंडर को मैनेज करने का खेल पता चला। जांच एजेंसी के मुताबिक, संजीव हंस को रुपए संतोष के माध्यम से दिए गए हैं। पहली बार 67 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया था। 28 जनवरी 2025 को ED ने रिशु श्री के घर पर छापेमारी की थी। उस वक्त इसके पास से करीब डेढ़ करोड़ की ज्वेलरी और 51 लाख रुपया कैश बरामद किया गया था। रिशु के लिए पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था इस खेल में सिर्फ रिशु और संजीव हंस ही नहीं थे, बल्कि पूरा एक सिंडिकेट काम कर रहा था। ED और SVU की जांच में जो खुलासे हुए, उन्होंने बिहार प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया। SVU में दर्ज हैं दो केस ED से इनपुट मिलने के बाद भ्रष्टाचार और सरकारी टेंडर में हेरफेर कर सरकार को नुकसान पहुंचाने के मामले में SVU ने एक साल के अंतराल में दो केस दर्ज किए। पहला केस 2024 में 5/2024 दर्ज हुआ। जिसमें IAS संजीव हंस, पूर्व विधायक गुलाब यादव और रिशु श्री समेत 10 लोगों को नामजद किया गया। ठीक एक साल बाद 2025 में दूसरा केस 5/2025 दर्ज किया गया। इसमें IAS संजीव हंस और रिशु श्री समेत कुल 4 लोगों को नामजद किया गया। इसी केस के तहत 27 मई को SVU की टीम ने रिशु के घर छापेमारी भी की और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। अब इसमें आगे क्या होगा? सवाल-कार्रवाई में देरी क्यों? रिशु श्री की गिरफ्तारी से इसके साथ कनेक्शन में रहने वाले राजनेताओं और अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। सबको डर सता रहा है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में कहीं वो उनका नाम न ले ले। क्योंकि, SVU ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि सबूतों के आधार पर उनकी जांच आगे बढ़ेगी और कार्रवाई भी होगी। पर एक महत्वपूर्ण सवाल अब यह उठ रहा है कि रिशु के खिलाफ कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्योंकि, देर होने से रिशु और इससे जुड़े लोगों को केस के महत्वपूर्ण सबूत नष्ट करने का पूरा वक्त मिल गया।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *