अयोध्या के संतों ने अखिलेश यादव को बताया ‘नकली हिंदू’, नकली संत वाले बयान पर किया पलटवार

अयोध्या के संतों ने अखिलेश यादव को बताया ‘नकली हिंदू’, नकली संत वाले बयान पर किया पलटवार

अयोध्या : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘नकली संत’ बताए जाने के बयान पर मंगलवार को अयोध्या के संतों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अखिलेश यादव ने सोमवार को सुल्तानपुर में दिए बयान में योगी आदित्यनाथ पर रामायण के कालनेमि का इशारा करते हुए कहा था कि ‘कोई सही कहता है कि वे नकली संत हैं’ और बंगाल की जनता को सावधान रहने की अपील की थी। इस बयान ने यूपी की सियासत को गरमा दिया है।

अयोध्या के प्रमुख संतों ने अखिलेश यादव के बयान को ‘अपमानजनक’ और ‘मानसिक संतुलन खोने’ वाला बताया। करपात्री महाराज ने कहा, “अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है, लेकिन संतों के प्रति आस्था पर सवाल उठाने वाले अखिलेश यादव होते कौन हैं? संत की परिभाषा क्या है? राजनीति करने के बजाय उन्हें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। योगी पर सवाल उठाकर उन्होंने असल में भारत के सभी संतों पर सवाल उठा दिया है।”

अखिलेश को बताया नकली हिंदू

महाराज महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा, ‘जो दूसरों को कालनेमि कहता है, वह खुद कालनेमि है। अखिलेश यादव खुद नकली हिंदू हैं। वे सनातन संस्कृति, संतों और देवी सीता के बारे में भी विवादित बयान देते रहते हैं। अखिलेश यादव ने योगी को नकली संत कहा, ठीक वैसे जैसे रावण ने देवी सीता का अपहरण करने के लिए संत का वेश धारण किया था। मैं बंगाल के लोगों से अपील करता हूं कि ऐसे नकली संतों को भगा दें।’

अखिलेश मानसिक बीमारी से पीड़ित

साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अखिलेश मोहम्मद खान अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। उन्हें संस्कृति या मूल्यों की कोई समझ नहीं है। क्या आपके संस्कार ऐसे ही हैं? क्या यही आपकी संस्कृति है? क्या आपके माता-पिता या गुरुओं ने आपको यही सिखाया है? क्या आप संतों को कालनेमि कहेंगे?”

अयोध्या के संतों का कहना है कि अखिलेश यादव का बयान न सिर्फ योगी आदित्यनाथ का अपमान है, बल्कि पूरे संत समुदाय और सनातन परंपरा का अपमान है। उन्होंने इसे ‘राजनीतिक हताशा’ का परिणाम बताया।

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