सहरसा कोर्ट ने बलवाहट SHO, IO के खिलाफ NBW जारी:एसपी के निर्देश पर वेतन अटैच करने का भी दिया आदेश

सहरसा कोर्ट ने बलवाहट SHO, IO के खिलाफ NBW जारी:एसपी के निर्देश पर वेतन अटैच करने का भी दिया आदेश

सहरसा व्यवहार न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-IV अविनाश कुमार की अदालत ने बलवाहट थाना कांड संख्या 142/2025 से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बलवाहट थाना के थानाध्यक्ष (SHO) और अनुसंधान पदाधिकारी (IO) के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, दोनों अधिकारियों के वेतन को अटैच करने का निर्देश भी सहरसा पुलिस अधीक्षक (SP) को दिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश अदालत ने अपने आदेश में बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व में केस डायरी, आरोपितों का आपराधिक इतिहास और चोट से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, संबंधित पुलिस अधिकारियों ने ये आवश्यक दस्तावेज अदालत में जमा नहीं किए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी करते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन, वे निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने आदेश की अवमानना पर कार्रवाई की न्यायालय ने इस रवैये को अपने आदेश की अवमानना मानते हुए कड़ी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि संबंधित थाना के एसएचओ और IO (केस अनुसंधानकर्ता) के आचरण से प्रतीत होता है कि उन्हें न्यायालय के आदेश का कोई सम्मान नहीं है। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। मामला केस और काउंटर केस से जुड़ा हुआ सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि यह मामला केस और काउंटर केस से जुड़ा हुआ है। आरोपित पक्ष द्वारा पहले बलवाहट थाना कांड संख्या 141/2025 दर्ज कराया गया था। अधिवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि घायल आजाद कुमार यादव की बाद में मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके पुत्र प्रिंस कुमार मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में हैं। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने राहत प्रदान करते हुए आदेश दिया कि आरोपी और याचिकाकर्ता प्रिंस कुमार को अगले आदेश तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने अपने आदेश की प्रति अनुपालन के लिए सहरसा पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस सख्त कदम को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। सहरसा व्यवहार न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-IV अविनाश कुमार की अदालत ने बलवाहट थाना कांड संख्या 142/2025 से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बलवाहट थाना के थानाध्यक्ष (SHO) और अनुसंधान पदाधिकारी (IO) के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, दोनों अधिकारियों के वेतन को अटैच करने का निर्देश भी सहरसा पुलिस अधीक्षक (SP) को दिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश अदालत ने अपने आदेश में बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व में केस डायरी, आरोपितों का आपराधिक इतिहास और चोट से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, संबंधित पुलिस अधिकारियों ने ये आवश्यक दस्तावेज अदालत में जमा नहीं किए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी करते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन, वे निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने आदेश की अवमानना पर कार्रवाई की न्यायालय ने इस रवैये को अपने आदेश की अवमानना मानते हुए कड़ी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि संबंधित थाना के एसएचओ और IO (केस अनुसंधानकर्ता) के आचरण से प्रतीत होता है कि उन्हें न्यायालय के आदेश का कोई सम्मान नहीं है। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। मामला केस और काउंटर केस से जुड़ा हुआ सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि यह मामला केस और काउंटर केस से जुड़ा हुआ है। आरोपित पक्ष द्वारा पहले बलवाहट थाना कांड संख्या 141/2025 दर्ज कराया गया था। अधिवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि घायल आजाद कुमार यादव की बाद में मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके पुत्र प्रिंस कुमार मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में हैं। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने राहत प्रदान करते हुए आदेश दिया कि आरोपी और याचिकाकर्ता प्रिंस कुमार को अगले आदेश तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने अपने आदेश की प्रति अनुपालन के लिए सहरसा पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस सख्त कदम को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।  

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