West Asia Tensions: पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए किए जा रहे रणनीतिक प्रयासों एवं अमेरिकिा से हुई सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर ईरान ने बड़ा बयान दिया है। भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के उप प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियायेनिया ने कहा- वार्ता की प्रक्रिया में मध्यस्थता नहीं, बल्कि परिणाम महत्वपूर्ण है। जियायेनिया ने कहा कि वाशिंगटन और ईरान के बीच वार्ता की प्रक्रिया से ज्यादा उसके परिणाम मायने रखते हैं।
ईरान ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान को क्यों चुना?
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के उप प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियायेनिया ने न्यूज एजेंसी ANI से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के विषय पर बात की। बातचीत के दौरान जियायेनिया ने कहा कि मध्यस्थता की प्रभावशीलता का आकलन उसके परिणामों से किया जाना चाहिए, न कि उस देश से जो इसकी सुविधा प्रदान कर रहा है। डॉ. मोहम्मद हुसैन जियायेनिया ने आगे कहा कि पाकिस्तान को ईरान-अमेरिका की मध्यस्थता के लिए क्यों चुनाव गया, मुझे इसके पीछे की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।
मध्यस्थता में कई देशों की भूमिका
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के उप प्रतिनिधि जियायेनिया ने कहा- कई ऐसे देश थे, जिन्होंने पहले अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान को मध्यस्थता के लिए चुने जाने के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि यह निर्णय उस स्तर पर लिया गया है जो यह जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है। उनहोंने कहा- इसके पहले हमने देखा है कि ओमान, कतर और तुर्की मध्यस्थ थे। मुझे याद है 12 साल से पहले इराक और ऑस्ट्रिया मध्यस्थ थे। कई देश इस मध्यस्थता में शामिल रहे हैं।
जियायेनिया ने परिणाम को बताया महत्वपूर्ण
हुसैन जियायेनिया ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाले देशों के बजाय रिजल्ट पर जोर दिया। उन्होंने कहा- मध्यस्थता की भूमिका में इस बार पाकिस्तान है। हम आशा करते हैं कि ये वार्ताएं उस दिशा में आगे बढ़ें, जिससे स्थायी शांति प्राप्त हो। मध्यस्थता महत्वपूर्ण नहीं है, परिणाम महत्वपूर्ण है। जियायेनिया ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान लेबनान सहित क्षेत्र में स्थायी स्थिरता चाहता है। उन्होंने कहा- हमने यह शर्त रखी है कि लेबनान में स्थायी शांति कायम होनी चाहिए। इसलिए यह न केवल ईरान में, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति के लिए है।


