सीवान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सीवान सदर अस्पताल में मंगलवार को दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक आपातकालीन कक्ष में एक भी अधिकृत सरकारी डॉक्टर मौजूद नहीं था। यह वही समय होता है जब अक्सर सड़क हादसे, झगड़े और अन्य गंभीर मामलों के मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। इस दौरान कई गंभीर मरीज और मेडिको-लीगल केस अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई जिम्मेदार चिकित्सक मौजूद नहीं था। हालात इतने खराब हो गए कि इंटर्नशिप कर रहे आयुष चिकित्सकों को ही मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। आपातकालीन कक्ष से नदारद रहे डॉक्टर अहमद अली रोस्टर के मुताबिक दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक डॉक्टर अहमद अली की ड्यूटी निर्धारित थी, लेकिन वे आपातकालीन कक्ष से नदारद रहे। आरोप है कि डॉक्टर ड्यूटी छोड़ अधीक्षक कार्यालय में बैठे रहे। यह न केवल कर्तव्यहीनता है, बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है। मामले का खुलासा तब हुआ जब मीडिया ने इस लापरवाही की जानकारी अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह को दी। इसके बाद ही डॉक्टर इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन तब तक कई मरीजों का प्राथमिक इलाज इंटर्न डॉक्टरों द्वारा किया जा चुका था। पूरे मामले को लेकर जब सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह से बात की गई तो उनके द्वारा तुरंत कार्रवाई करते हुए ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात चिकित्सक डॉ अहमद अली को तुरन्त आपातकालीन कक्ष में भेजा गया। जांच कर दोषी पर कार्रवाई करने का काम होगा। प्रशिक्षु चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दिया गया सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि मेडिको-लीगल जैसे संवेदनशील मामलों को भी प्रशिक्षु चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में कानूनी जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है। घटना के बाद मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज नहीं मिलता, तो कई मरीजों की जान जा सकती थी। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी लचर और गैरजिम्मेदार हो चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। सीवान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सीवान सदर अस्पताल में मंगलवार को दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक आपातकालीन कक्ष में एक भी अधिकृत सरकारी डॉक्टर मौजूद नहीं था। यह वही समय होता है जब अक्सर सड़क हादसे, झगड़े और अन्य गंभीर मामलों के मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। इस दौरान कई गंभीर मरीज और मेडिको-लीगल केस अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई जिम्मेदार चिकित्सक मौजूद नहीं था। हालात इतने खराब हो गए कि इंटर्नशिप कर रहे आयुष चिकित्सकों को ही मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। आपातकालीन कक्ष से नदारद रहे डॉक्टर अहमद अली रोस्टर के मुताबिक दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक डॉक्टर अहमद अली की ड्यूटी निर्धारित थी, लेकिन वे आपातकालीन कक्ष से नदारद रहे। आरोप है कि डॉक्टर ड्यूटी छोड़ अधीक्षक कार्यालय में बैठे रहे। यह न केवल कर्तव्यहीनता है, बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है। मामले का खुलासा तब हुआ जब मीडिया ने इस लापरवाही की जानकारी अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह को दी। इसके बाद ही डॉक्टर इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन तब तक कई मरीजों का प्राथमिक इलाज इंटर्न डॉक्टरों द्वारा किया जा चुका था। पूरे मामले को लेकर जब सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह से बात की गई तो उनके द्वारा तुरंत कार्रवाई करते हुए ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात चिकित्सक डॉ अहमद अली को तुरन्त आपातकालीन कक्ष में भेजा गया। जांच कर दोषी पर कार्रवाई करने का काम होगा। प्रशिक्षु चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दिया गया सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि मेडिको-लीगल जैसे संवेदनशील मामलों को भी प्रशिक्षु चिकित्सकों के भरोसे छोड़ दिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में कानूनी जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है। घटना के बाद मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज नहीं मिलता, तो कई मरीजों की जान जा सकती थी। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी लचर और गैरजिम्मेदार हो चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


