आईआईटी पटना के कैंपस में 11 एकड़ में रिसर्च पार्क बनेगा। इसमें 100 से अधिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनियों को ठिकाना मिलेगा। 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट की पहली बैठक में इसकी स्थापना के लिए 305 करोड़ को मंजूरी दी गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव भी मौजूद थे। इसकी स्थापना पर 480 करोड़ खर्च होंगे। इनमें बिहार सरकार 305 करोड़ सहायक अनुदान आैर बाकी राशि केंद्र सरकार खर्च देगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए आईटी सचिव अभय कुमार सिंह ने बताया कि इस आईटी पार्क की स्थापना का मकसद पूर्वी भारत में नवाचार का बड़ा केंद्र विकसित करना है। इसके जरिए एकेडमिक संस्थानों के इंडस्ट्री के साथ सहयोग और समझौते को भी बढ़ावा दिया जाएगा। रिसर्च पार्क में फॉर्च्यून 1000 में शामिल कंपनियों को 20 साल या उससे अधिक अवधि के लिए जमीन पट्टे पर दी जाएगी। इसमें डिफेंस से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं वायरलेस टेक्नोलॉजी समेत दूसरे सेक्टर की मॉडर्न टेक्नोलॉजी के विकास पर काम होगा। तारापुर में जग्गी वासुदेव विकसित करेंगे सांस्कृतिक केंद्र
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र तारापुर में तमिलनाडु के चर्चित संत जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन की ओर से सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जाना है। इस सांस्कृतिक केंद्र के लिए 15 एकड़ जमीन नि:शुल्क देने की मंजूरी दी गई। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम फाउंडेशन के साथ एमओयू करेगा। एमओयू के माध्यम से 1 रुपए के टोकन शुल्क पर 99 साल के लिए लीज दी जाएगी। उधर, बीजों के विकास के लिए स्थापित 239 कृषि फार्मों में से कई शहरों के बीच में आ गए हैं। इससे इनके काम में बाधा आ रही है। दूसरी ओर राज्य सरकार की विकास योजनाओं के लिए भी जमीन की जरूरत हो रही है। इसलिए ऐसे कृषि फार्म शहरों से गांव में शिफ्ट किए जाएंगे। वहां शहर से दोगुनी जमीन दी जाएगी। बेगूसराय के बरौनी में होगी निफ्ट की स्थापना : बेगूसराय जिले में बरौनी के पास मल्हीपुर में निफ्ट की स्थापना होगी। इसके लिए 20 एकड़ जमीन नि:शुल्क दी जाएगी। बुजुर्गों के हस्ताक्षर कराने घर पहुंचेगा रजिस्ट्री ऑफिस 80 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को जमीन, प्लॉट या फ्लैट की रजिस्ट्री कराने की सुविधा उनके घर पर मिलेगी। रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारी उनके घर पहुंचकर सारी प्रक्रिया पूरी करेंगे। निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस करने पर भी सहमति दी गई। ई-फाइलिंग के माध्यम से दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराई जाएगी। आईआईटी पटना के कैंपस में 11 एकड़ में रिसर्च पार्क बनेगा। इसमें 100 से अधिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनियों को ठिकाना मिलेगा। 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट की पहली बैठक में इसकी स्थापना के लिए 305 करोड़ को मंजूरी दी गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव भी मौजूद थे। इसकी स्थापना पर 480 करोड़ खर्च होंगे। इनमें बिहार सरकार 305 करोड़ सहायक अनुदान आैर बाकी राशि केंद्र सरकार खर्च देगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए आईटी सचिव अभय कुमार सिंह ने बताया कि इस आईटी पार्क की स्थापना का मकसद पूर्वी भारत में नवाचार का बड़ा केंद्र विकसित करना है। इसके जरिए एकेडमिक संस्थानों के इंडस्ट्री के साथ सहयोग और समझौते को भी बढ़ावा दिया जाएगा। रिसर्च पार्क में फॉर्च्यून 1000 में शामिल कंपनियों को 20 साल या उससे अधिक अवधि के लिए जमीन पट्टे पर दी जाएगी। इसमें डिफेंस से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं वायरलेस टेक्नोलॉजी समेत दूसरे सेक्टर की मॉडर्न टेक्नोलॉजी के विकास पर काम होगा। तारापुर में जग्गी वासुदेव विकसित करेंगे सांस्कृतिक केंद्र
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र तारापुर में तमिलनाडु के चर्चित संत जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन की ओर से सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जाना है। इस सांस्कृतिक केंद्र के लिए 15 एकड़ जमीन नि:शुल्क देने की मंजूरी दी गई। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम फाउंडेशन के साथ एमओयू करेगा। एमओयू के माध्यम से 1 रुपए के टोकन शुल्क पर 99 साल के लिए लीज दी जाएगी। उधर, बीजों के विकास के लिए स्थापित 239 कृषि फार्मों में से कई शहरों के बीच में आ गए हैं। इससे इनके काम में बाधा आ रही है। दूसरी ओर राज्य सरकार की विकास योजनाओं के लिए भी जमीन की जरूरत हो रही है। इसलिए ऐसे कृषि फार्म शहरों से गांव में शिफ्ट किए जाएंगे। वहां शहर से दोगुनी जमीन दी जाएगी। बेगूसराय के बरौनी में होगी निफ्ट की स्थापना : बेगूसराय जिले में बरौनी के पास मल्हीपुर में निफ्ट की स्थापना होगी। इसके लिए 20 एकड़ जमीन नि:शुल्क दी जाएगी। बुजुर्गों के हस्ताक्षर कराने घर पहुंचेगा रजिस्ट्री ऑफिस 80 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को जमीन, प्लॉट या फ्लैट की रजिस्ट्री कराने की सुविधा उनके घर पर मिलेगी। रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारी उनके घर पहुंचकर सारी प्रक्रिया पूरी करेंगे। निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस करने पर भी सहमति दी गई। ई-फाइलिंग के माध्यम से दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराई जाएगी।


