Rajasthan: राजस्थान में यहां बन रहा है नया ‘शहर’, मशीनरी और कंटेनर पहुंचे, मारवाड़ की बदलेगी सूरत

रोहट। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) प्रोजेक्ट ने अब रोहट क्षेत्र में रफ्तार पकड़ ली है। जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया के तहत अधिग्रहित की गई सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। आने वाले कुछ वर्षों में यह प्रोजेक्ट रोहट क्षेत्र की आर्थिक और ढांचागत तस्वीर को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

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प्रथम चरण : बिजली, पानी और बुनियादी ढांचे पर जोर

प्रोजेक्ट का शुरुआती कार्य रोहट के निकट निम्बली क्षेत्र में शुरू हुआ है, जहां पूर्व में राष्ट्रीय जम्बूरी का आयोजन हुआ था। प्रथम चरण में बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। मौके पर निर्माण सामग्री और कंटेनर पहुंचने शुरू हो गए हैं। भारी मशीनरी और बॉयलर प्लांट लगाने के लिए पक्के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। सरकार की ओर से प्रथम चरण के लिए 1,000 बीघा से अधिक सरकारी भूमि पहले ही आवंटित की जा चुकी है।

हाईवे पर सुगम यातायात के लिए बन रहा पुल

प्रोजेक्ट की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए निम्बली मोड़ के पास हाईवे पर एक विशाल पुल का निर्माण भी युद्ध स्तर पर चल रहा है। यह पुल विशेष रूप से प्रोजेक्ट के भारी वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बनाया जा रहा है, ताकि मुख्य हाईवे के यातायात और राहगीरों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुआवजे का इंतजार : काश्तकारों में असमंजस

एक ओर जहां सरकारी भूमि पर निर्माण शुरू हो गया है, वहीं दूसरी ओर निजी भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काश्तकार मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। रीको ने अवार्ड जारी कर दिए हैं और किसानों ने अपने दस्तावेज भी जमा करवा दिए हैं। कुछ समय पहले ग्राम पंचायत में आयोजित शिविर में दावा किया गया था कि मुआवजा राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी, लेकिन अब तक किसानों को भुगतान नहीं मिला है। काश्तकारों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजा राशि जारी करने की मांग की है।

अनुमानित लागत 922 करोड़ रुपए

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) की ओर से विकसित की जा रही इस परियोजना की अनुमानित लागत 922 करोड़ रुपए तय की गई है। इस परियोजना के लिए लगभग 3600 हेक्टेयर भूमि को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। व्यापक स्वरूप को देखते हुए इसे एक नए औद्योगिक शहर के रूप में भी देखा जा रहा है।

जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक कॉरिडोर का निर्माण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर से सीधा लाभ मिलने की संभावना है, जिससे माल परिवहन तेज और किफायती होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर गांवों और कस्बों तक पहुंच सकेंगे। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सक्रिय होने के बाद मारवाड़ जंक्शन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह केवल रेलवे स्टेशन भर नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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