‘बचपन में ट्रॉमा से गुजरे राहुल गांधी, अब हमारा सिरदर्द कर रहे’, कंगना रनौत ने विपक्ष के नेता को बताया जोक

‘बचपन में ट्रॉमा से गुजरे राहुल गांधी, अब हमारा सिरदर्द कर रहे’, कंगना रनौत ने विपक्ष के नेता को बताया जोक

Kangana Ranaut Slams Rahul Gandhi Loksabha Speech: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया संबोधन के बाद सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है। बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने राहुल गांधी के भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सिरदर्द पैदा करने वाला बताया और कहा कि इस तरह के बयान संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

राहुल गांधी पर कंगना ने बोला हमला (Kangana Ranaut Slams Rahul Gandhi Loksabha Speech)

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी का भाषण मुद्दों पर केंद्रित कम और भावनात्मक प्रसंगों पर ज्यादा आधारित था। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद जैसे गंभीर मंच पर व्यक्तिगत अनुभवों और प्रतीकात्मक कहानियों का इस्तेमाल कर राजनीतिक मैसेज देना सही नहीं है। कंगना के मुताबिक, देश और दुनिया की नजरें संसद की कार्यवाही पर होती हैं, ऐसे में नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी से बोलना चाहिए।

कंगना ने राहुल के भाषण पर हमला बोलते हुए कहा कि वो खुद बचपन में ट्रॉमा से गुजरे हैं और हमे सुनाकर अब हमारा सिरदर्द कर रहे हैं। कंगना ने राहुल के भाषण को संसद का जोक बताया।

राहुल गांधी के भाषण पर बोलीं कंगना

कंगना रनौत ने ये भी कहा कि राहुल गांधी का भाषण सुनना उनके लिए काफी मुश्किल अनुभव था। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रीय मुद्दों पर ठोस नजरिया प्रस्तुत करना चाहिए, न कि ऐसे प्रसंगों का सहारा लेना चाहिए जिनसे सदन का स्तर हल्का प्रतीत हो। उनके अनुसार, संसद बहस का मंच है, मनोरंजन का नहीं।

हेमा मालिनी ने जताई आपत्ति

इसी मुद्दे पर बीजेपी की वरिष्ठ सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को असंसदीय बताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। हेमा मालिनी ने कहा कि संसद में चर्चा तथ्य और नीति आधारित होनी चाहिए।

दरअसल, लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने संबोधन में एक बचपन की घटना का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने की कोशिश की थी। इसी संदर्भ में उनके कुछ शब्दों पर सत्तापक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई, जिसके बाद सदन की कार्यवाही से कुछ टिप्पणियों को हटाया भी गया।

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