जैसलमेर. प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संकट सामने आया है। कई स्थानों पर वितरित खेल किट और उपकरण समय से पहले टूटने और अनुपयोगी होने की स्थिति में पाए गए हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की बुनियादी खेल दक्षता, अभ्यास निरंतरता और चयन क्षमता पर पड़ रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक प्रशिक्षण स्तर ही कमजोर हो तो खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं। यही स्थिति भविष्य की खेल पाइपलाइन को कमजोर कर रही है।
स्वर्णनगरी सहित सीमावर्ती जिलों में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग निष्क्रिय स्थिति में है। सीमावर्ती जिला जैसलमेर में खेल सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। अनेक विद्यालयों में मानक खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों को अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। सीमावर्ती जिलों में कमजोर खेल ढांचा सीधे तौर पर राज्य की प्रतिभा उत्पादन क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूत स्थानीय आधार अनिवार्य है।
समस्याएं यह भी
– विद्यालय स्तर पर खेल मैदानों की गंभीर कमी
-अभ्यास के लिए खुली भूमि का अभाव
-पूर्व खेल स्थलों के उपयोग में बदलाव
-ग्रामीण प्रतिभाएं अवसरों से लगातार वंचित
शारीरिक शिक्षकों की अनिश्चितता
प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति और नियमितीकरण प्रक्रिया लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है। बार-बार जांच, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर प्रशिक्षण गुणवत्ता पर दिख रहा है। खेल प्रशासन विशेषज्ञों के अनुसार प्रशिक्षक ही खेल विकास की रीढ़ होते हैं। यदि वही अस्थिर हों तो खिलाड़ी की तैयारी और प्रदर्शन दोनों प्रभावित होते हैं, जिससे राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर पड़ती है।
यह है मौजूदा स्थिति
-लगभग 5000 शारीरिक शिक्षक -नियमितीकरण प्रक्रिया में
-अढ़ाई साल से अस्थिर सेवा स्थिति
-जांच और सत्यापन प्रक्रियाओं का लगातार दबाव
यह है हकीकत
-2 प्रतिशत खेल आरक्षण नीति लागू
-क्रियान्वयन प्रक्रिया अत्यधिक जटिल
-प्रशासनिक स्तर पर लगातार देरी
-वास्तविक लाभार्थियों तक सीमित पहुंच
खेल व्यवस्था कागजों पर मजबूत, हकीकत जुदा
राजस्थान की खेल व्यवस्था कागजों पर मजबूत दिखती है, लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है। स्कूलों में घटिया खेल सामग्री, शारीरिक शिक्षकों की अस्थिरता और खेल मैदानों की कमी ने पूरी प्रणाली को कमजोर कर दिया है। जब तक इन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक राज्य की प्रतिभाएं न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि विश्व मंच पर भी पिछड़ती रहेंगी। अब समय आ गया है कि खेल नीति को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
— प्रकाश बिश्नोई खारा, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ


