देर रात ईरान (Iran) के हमले से यूएई (UAE) दहल उठा है। सीज़फायर के बाद यह इस तरह का पहला हमला है, जिससे मिडिल ईस्ट में पहले से ही चल रहा तनाव और बढ़ गया है। ईरान के हमले में 3 भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता और संभावित खतरे को देखते हुए बहरीन (Bahrain) में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने एक बड़ा बयान दिया है।
“प्रोजेक्ट फ्रीडम है प्रोजेक्ट डेडलॉक”
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “होर्मुज स्ट्रेट में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। पाकिस्तान के उदार प्रयासों से शांति-वार्ता में प्रगति हो रही है। ऐसे में अमेरिका को अपने दुश्मनों द्वारा दलदल में घसीटे जाने से सावधान रहना चाहिए। यूएई को भी यही सावधानी बरतनी चाहिए। प्रोजेक्ट फ्रीडम प्रोजेक्ट डेडलॉक है।”
क्या है ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ एक मानवीय नेवी अभियान है, जिसमें अमेरिकी नेवी होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में फंसे तटस्थ देशों के व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालेगी। यह अभियान सोमवार से शुरू हो गया है। ट्रंप ने इसे ‘निरपराध बाईस्टैंडर्स’ की मदद बताया है, जिनके जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर उनके इस अभियान में कोई बाधा डाली गई तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीँ ट्रंप के इस अभियान पर ईरान ने चेतावनी दी है। ईरानी नेता इब्राहिम अजीज़ी ने चेताया है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की दखलंदाज़ी को सीज़फायर का उल्लंघन माना जाएगा।


