गरीब-परेशान आदिवासियों को टारगेट करके धर्म परिवर्तन करते:बीमारी ठीक करने, आर्थिक मदद का लालच दिया जाता; हिंदू संगठन ने कहा- 10 साल से चल रहा

उदयपुर जिले के छोटे गांवों में आदिवासी परिवारों को बीमारी दूर करने, पैसों का लालच और धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। जिले के ऋषभदेव इलाके में कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर क्षेत्र में लंबे समय से छत्तीसगढ़-झारखंड के मिशनरीज पदाधिकारियों का मूवमेंट हो रहा था। दैनिक भास्कर टीम ने कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर से जुड़े गांवों में जाकर पड़ताल की तो सच सामने आया। इसमें जानकारी मिली कि कुछ स्थानीय नेताओं की मदद से छोटे गांवों में गरीब और पेयजल जैसी समस्याओं से परेशान लोगों को टारगेट किया जा रहा था। पहले गांवों में बाहर से पादरियों को लाकर चौराहों या किसी चर्च में बीमारियों को ठीक करने के नाम पर लोगों को कन्वेंस किया जाता। इसके बाद उन्हें हर संडे होने वाली प्रार्थना सभा से जोड़कर ईसाई धर्म में शामिल करने की पूरी कोशिश की जाती। कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर में 20 फीसदी से ज्यादा आदिवासी परिवार इसी मजबूरी के चलते हिंदू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म तक अपना चुके हैं। हर गांव में इन लोगों की मदद से उनके रिश्तेदारों को फोन कर उनके हिंदू धर्म के देवी-देवताओं को आडंबर बताया जाता था, ताकि धीरे-धीरे लोगों का मन हिंदू धर्म से हटने लगे और वे ईसाई धर्म से जुड़ें। हिंदू संगठन से जुड़े पन्नालाल मीणा ने कहा- खेरवाड़ा के 50 से ज्यादा गांवों में 10 साल से लोगों को गुमराह करके, दबाव में तो कभी आर्थिक प्रलोभन देकर हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में कन्वर्ट किया गया। यह अभियान अभी भी जारी है। वहीं सांसद मन्नालाल रावत ने कहा- यह अंतरराज्यीय षड्यंत्र जैसा लगता है। बता दें कि आदिवासी परिवारों को लालच देकर 6 जून को धर्म परिवर्तन करवाने पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। मामले में 3 पादरी सहित 11 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पहले धार्मिक पुस्तकें-दवाइयां बांटते, फिर धमकी देकर जोड़ते स्थानीय लोगों ने बताया- गांवों में सबसे पहले धार्मिक पुस्तकें और दवाइयां बांटी जाती। बाद में स्थानीय नेताओं की मदद से ग्रामीणों को धमकाकर जबरन हिंदू धर्म छोड़ने और ईसाई धर्म अपनाने पर मजबूर किया जाता। इसके लिए मिशनरीज ग्रुप ने हर गांव में 3 से 4 ऐसे स्थानीय समाज के नेताओं को प्रभारी बना रखा है। ये पहले उन गरीब आदिवासियों को जुड़वाते। बाद में कुछ आर्थिक मदद देने के बाद चर्च या प्रार्थना में नहीं पहुंचने पर उन्हें डराते-धमकाते। ऐसे में डर और आर्थिक मजबूरी में कई लोग दबाव में उनके साथ जुड़े। पहले देखें PHOTOS
लोगों को जैसा कहा, वे मानते गए 2 दिन तक प्रार्थना सभा में गए मनीष मीणा ने बताया- वहां 200 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पहले दिन भी बीमारियों के नाम पर आदिवासियों को धर्म परिवर्तन कर लोगों को किसी भी सूरत में उनकी बात मानने का बोल रहे थे। सभी उनकी बातों में कई दिनों से आ गए थे। जैसा वो बोल रहे थे, वैसा ही लोग कर रहे थे। वे बार-बार उनके धर्म से जुड़ने पर आर्थिक लाभ से जीवन में तरक्की की बात कर रहे थे। वे कह रहे थे कि खेती से लेकर आपके स्वास्थ्य में हम लोग मदद करेंगे। ग्रामीण बोलीं- लंबे समय से गांव में लोग एक्टिव; परिवार पर हमले का खतरा गांव की रहने वाली गंगा कलासुआ ने बताया- लंबे समय से ऐसे लोग गांव में एक्टिव हैं। महिलाओं को ज्यादा जोड़ने पर इनका फोकस रहता है। कमला बाई ने कहा- गांव के दबंगों की वजह से हम कुछ बोल नहीं सकते। मेरे बेटा सहित उसका परिवार बाहर रहते हैं। ऐसे में उन पर हमले का खतरा रहता है। हम प्रकृति पूजक हैं और देवी की पूजा के साथ ही अपने धर्म में खुश हैं। हम अपना धर्म छोड़कर क्यों दूसरा धर्म अपनाएं? प्रार्थना करने से किसी की बीमारी-समस्या कम नहीं हुई गांव के निवर्तमान उप-सरपंच कांतिलाल ने बताया- पादरी ज्यादातर लोगों को उनके शरीर में बीमारी का बताकर कहते हैं कि उनके पास आने से ही वो ठीक हो सकती है। कई लोगों को घरों में एक साथ प्रार्थना कराकर कन्वेंस करने की कोशिश हो रही थी। वे हैंडपंप, कुआं और ट्यूबवेल खोदने का लालच भी देते हैं। कांतिलाल ने कहा- वे सिर्फ भोले लोगों को बीमारी दूर करने का बोलकर जोड़ते हैं, जबकि ऐसा कुछ हुआ नहीं। न उनके प्रार्थना करने से किसी की बीमारी या कोई समस्या कम हुई है। उन्होंने कहा- हम अपने धर्म में ही रहना चाहते हैं। ये लोग गांव-गांव में अपने धर्म के नेटवर्क को मजबूत करना चाहते हैं, अपने सदस्य बनाना चाहते हैं। गरीब और भोले लोग शिकायत नहीं करते हिंदू संगठन से जुड़े पन्नालाल मीणा ने कहा- धर्म परिवर्तन इस इलाके में नया नहीं है। गरीब और भोले लोग सामने आने से डरते हैं। कभी शिकायत नहीं करते हैं। जैसे ही सूचना मिली, हम यहां पहुंचे। हिंदू परिवारों को धमकाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हम लोग नानालाल जैसे कई परिवारों के साथ हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। हर गांव में किसी न किसी समाज के दबंग नेता का डर युवाओं में काफी ज्यादा है। वे इस पर आगे होकर पुलिस थाने जाना तो दूर, एक शब्द सार्वजनिक रूप से बोलने से भी बचते हैं। हाल ही में हुई कार्रवाई के बाद ज्यादातर गांवों के लोग नाराज हैं। वहीं थाने में शनिवार को शिकायत दर्ज करवाने वाले नानालाल कलासुआ ने कहा- पिछले कुछ दिनों से गांव में प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को बुलाया गया था। मेरे घर से महज 100 मीटर की दूरी पर प्रार्थना सभा हो रही थी। पहले दिन जब मैं सभा में पहुंचा तो मौजूद पादरियों ने कहा- हिंदू धर्म छोड़ दो, तुम्हारी सारी बीमारियां दूर हो जाएंगी और हर तरीके से आर्थिक लाभ भी मिलेगा। आदिवासियों को झांसे में लेने के लिए उनके खेतों में कुआं और ट्यूबवेल खुदवाने तक का ऑफर दिया गया। कोई उस कार्यक्रम से बाहर निकलकर जाए, उससे पहले वहां दबंग लोग उन्हें धमकी भरी नजरों से देख रहे थे। मैंने पहले इस तरह के कार्यक्रमों का विरोध किया था। इस बार सभा के बाहर विरोध किया तो जान से मारने की धमकी दी गई। पूरे गांव में दूर-दूर घर बने हुए हैं। ऐसे में उन दबंगों से उन्हें जान से मारने का खतरा है। सांसद बोले- यह अंतरराज्यीय षड्यंत्र उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने कहा- गांव में काफी बड़ी संख्या में परिवारों को धर्म परिवर्तन करने की कोशिश हो रही थी। हमारी जिम्मेदारी है कि यहां के क्षेत्र में जो मूल अस्मिता है, वो बनी रहे। वो जब बनी रहेगी तो विकास की गतिविधियां भी तेज होंगी। कोई अवैध तरीके से काम होता है तो मुझे लगता है ये गलत है, वैधानिक रूप से भी गलत है। राजस्थान सरकार ने इसका कानून भी बनाया है। धरातल पर जानकारी लेने पर बड़ा आंकड़ा निकलकर आ रहा है। करीब एक-तिहाई के आसपास लोग प्रभाव में आए हैं। महिलाएं आपस में चर्चा कर रही हैं कि एक महिला दूसरी को बहला-फुसलाकर ले गई और थाने में लोग परेशान हो रहे हैं। ये एक सुनियोजित प्लान है। यह अंतरराज्यीय षड्यंत्र जैसा लगता है। पादरी सहित 11 लोग गिरफ्तार ऋषभदेव डीएसपी राजीव राहर ने बताया- पूछताछ में सामने आया है कि ईसाई धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन और धमकियां दी जा रही हैं। आरोपियों के मोबाइल और बैंक खाते खंगालते हुए जांच की जा रही है। 3 पादरी सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं, उनसे पूछताछ जारी है। थानाधिकारी हेमंत अहारी ने बताया- इस गांव के बाबूलाल के नेतृत्व में प्रार्थना सभा चल रही थी। आसपास के 20 से ज्यादा गांवों के लोगों को बुलाया गया था। गांव के नानालाल की सूचना पर पुलिस पहुंची तो वहां 200 से ज्यादा लोग मौजूद थे। इन लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
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